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सिर्फ बॉडी को ही नहीं दिमाग को भी तेज बनाता है फुटबॉल, पेरेंट्स जरूर जानें क्यों बच्चों के लिए जरूरी है फुटबॉल

आजकल बच्चों में लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम के बीच हम यह समझेंगे कि फुटबॉल जैसे स्पोर्ट्स भाग लेना बच्चों की फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है और इसके लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

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Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 8, 2026 11:58 PM IST

जहां पहले बच्चे दिनभर खेलते नहीं थकते थे और पेरेंट्स की डांट सुनते थे, आज के समय में स्थिति पूरी तह से बदलकर उसका उल्टा हो गई है। आजकल बच्चे सारा दिन फोन में घुसे रहते हैं और इस कारण से पेरेंट्स की डांट सुनते हैं। Fifa world cup 2026 चल रहा है, जिसने भारतीय पेरेंट्स का ध्यान भी खींचा है। एक या दो नहीं बल्कि सैंकड़ों ऐसी रिसर्च हैं, जिन्हें अपने-अपने डाटा में बताया है कि रेगुलर स्पोर्ट्स या फिजिकल एक्टिविटी में भाग लेना आने वाले समय में व्यक्ति के लिए कई लाइफस्टाइल डिजीज के खतरे को कम करने में मदद करता है। इसलिए हर उस पेरेंट्स को इस आर्टिकल के बारे में जानना चाहिए जो अपने बच्चे को हेल्दी और बीमारियों से दूर रखना चाहते हैं। हालांकि, सिर्फ फुटबॉल ही नहीं बल्कि किसी भी कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स या कॉम्पिटिशन स्पोर्ट्स का हिस्सा होना बच्चे की फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद होत है। डॉ. रचित गुलाटी, हेड, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR) डिपार्टमेंट, ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल नें इस बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी।

फुटबॉल बढ़ाएगा डिसीजन मेकिंग

अगर बच्चे को शुरू में ही फुटबॉल या किसी अन्य स्पोर्ट्स में डालने से बच्चे की डिसीजन मेंकिंग शुरुआत में ही इम्प्रूव हो जाती है। फुटबॉल सिर्फ एक हाई इंटेंसिटी स्पोर्ट नहीं बल्कि एक क्विक डिसीजन मेकिंग गेम भी है। अगर बच्चे की डिसीजन मेकिंग अच्छी होगी, तो उसे भविष्य में आने वाली चुनौतियों से निपटने में काफी मदद मिलेगी।

मेंटल हेल्थ नहीं होगी खराब

लगातार मोबाइल देखने से मानसिक तनाव बढ़ता है और वहीं फुटबॉल जैसे खेलों में भाग लेना स्ट्रेस को खत्म करने में मदद करता है। क्योंकि कोई भी स्पोर्ट्स एक्टिविटी करते समय एंडोर्फिन जैसे हैप्पी हार्मोन रिलीज होते हैं, जो तनाव, डिप्रेशन, एंग्जाइटी और मूड ऑफ जैसी समस्याओं को दूर करते हैं।

स्लीप साइकिल सही होगा

आजकल बच्चों को रात देर तक नींद नहीं आती है और उसके पीछे का एक कारण उनकी दिन की जीवनशैली भी है। दिनभर फोन में लगे रहने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो पाती है, जिसके कारण रात को ठीक से नींद नहीं आती है। वहीं अगर बच्चा दिन में फुटबॉल जैसे खेल खेलता है, तो शारीरिक मेहनत होगी और थकान के कारण रात को नींद भी अच्छी आएगी।

सही समय पर भूख लगेगी

अगर बच्चा फिजिकल एक्टिविटी करता है, तो उससे उसका डाइजेशन व मेटाबॉलिज्म भी अच्छा होगा। सही डाइजेशन और मेटाबॉलिज्म बच्चे की हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है, जिससे खाया-पीया अच्छे से पचेगा और शरीर में भी लगेगा। साथ ही स्पोर्ट्स एक्टिविटी करने पर बच्चे को शरीर में एनर्जी की जरूरत पड़ती है, जिससे वे अपनी हेल्थ को लेकर जागरूक हो जाते हैं और बाहर की चीजों को न खाकर घर के हेल्दी खाने पर ज्यादा ध्यान देने लगते हैं।

पेरेंट्स के लिए जरूरी सलाह

हालांकि, पेरेंट्स को इस बात का ध्यान भी रखना है कि बच्चे की किस खेल में ज्यादा रुचि है। अगर बच्चा फुटबॉल में न जाकर किसी अन्य स्पोर्ट में जाना चाहता है, तो बच्चे का उसमें साथ देना चाहिए। साथ ही अगर बच्चे का फिजिकल एक्टिविटी में अगर नहीं है, तो उसे इसके लिए प्रोत्साहित करना आपका काम है और यह ठीक उसी प्रकार है जैसे बच्चे का पढ़ने का मन नहीं होता, लेकिन फिर भी आप उससे पढ़ाई कराते हैं।

डिसक्लेमर: यह लेख किसी खेल प्रचार नहीं करता है और इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य सिर्फ बच्चों को फुटबॉल जैसे स्पोर्ट्स में डालने से मिलने वाले फायदों के बारे में बताना है। इस लेख में दी गई जानकारी सिर्फ इंटरनेट पर मौजूद जानकारियों पर आधारित है और thehealthsite.com किसी जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।