बच्चों को यूं सिखाएं मोरल वैल्यूज की बातें

अपने बच्चे को उन बच्चों के साथ घुलने-मिलने दें, जिनके पास भौतिक सुख-सुविधाओं की थोड़ी कमी हो। ऐसे में अपनी चीजों को उनके साथ शेयर करना सीखेंगे।

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Written By: Anshumala | Published : July 3, 2018 5:41 PM IST

बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं, आप उन्हें जिस आकार में ढालेंगी वह ढल जाएंगे। बच्चे आसपास की चीजों को बहुत जल्दी ऑब्जर्व करके सीखते और समझते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि उन्हें छोटी उम्र से ही जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण वैल्यूज के बारे में बताएं। व्यक्तित्व को संवारने के लिए महत्वपूर्ण वैल्यूज (मूल्य) जितने जरूरी हैं, उतना ही यह पॉजिटिव मैनर्स के लिए भी जरूरी है। आज के बच्चे सुपर स्मार्ट होते हैं और अपनी इनोसेंस बहुत जल्द खो देते हैं, जिस वजह से वे यंग एज में ही परिपक्व या मौच्योर हो जाते हैं। इसलिए उन्हें इन वैल्यूज के बारे में जरूर बताएं-

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ईमानदारी का पाठ- कम उम्र में ही बच्चे बहुत ही ज्यादा ईमानदार और सच्चे होते हैं। फिर भी, जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, वे झूठ की दुनिया में प्रवेश करते हैं। ऐसा इसिलए भी होता है, क्योंकि उनका कई तत्वों से सामना होता है, जिससे वे प्रभावित होते हैं जैसे दूसरे बच्चे, वयस्क, खास किस्म का डर आदि। इसलिए आप खुद ही उन्हें जीवन में ईमानदारी की महता को बताएं। उन्हें कहें कि आप हमेशा उनके साथ हैं और किसी भी गलत काम के लिए झूठ बोलने की कोशिश न करे।

इज्जत करना सिखाएं- यह ऐसी चीज है जिसे बच्चा सबसे पहले अपने पेरेंट्स या परिवार के बड़े- बुजर्गों के जरिए ही सीखता है। यदि आप अपने परिवार के बड़े सदस्यों को इज्जत देती हैं, तो यह बच्चे पर पॉजिटिव असर करता है। साथ ही आप अपने बच्चे के साथ उनकी भावनाओं, इच्छाओं का भी सम्मान करें ताकि भविष्य में वह भी अपने से कम उम्र के लोगों और बड़ों को इज्जत दे।

अनुशासन और शिष्टाचार- व्यक्ति के जीवन में शिष्टाचार के महत्व को शब्दों से नहीं समझाया जा सकता। साधारण शब्द जैसे प्लीज, थैंक यू, सॉरी, एक्सक्यूज मी आदि दूसरों पर बेहतर असर करते हैं। इसलिए बच्चों को हमेशा समझाएं कि वह दूसरों से या अपने हमउम्र दोस्तों से भी विनम्रता से बात करें। चाहे वह अपरिचित, अंजान व्यक्ति ही क्यों न हो। ठीक उसी तरह, अनुशासन भी कैरेक्टर निर्माण के लिए बहुत जरूरी फैक्टर है। सेल्फ-डिसिप्लिन्ड (आत्मानुशासन) से हमेशा जीत मिलती है, फिर चाहे वह कोई भी फील्ड क्यों न हो। इन बातों का बेहतर उदाहरण देकर बच्चे को इनके महत्वों के बारे में समझाने की कोशिश करें।

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शेयरिंग- आज की फैमिली न्यूक्लीयर फैमिली है, जिसमें सिंगल चाइल्ड का रिवाज भी बढ़ता जा रहा है। वर्किंग पेरेंट्स जिनके पास अपने बच्चे के लिए भी अधिक समय नहीं होता, वह इस कमी को भौतिक सुख-सुविधाओं (मैटीरियल थिंग्स) के जरिए पूरा करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बच्चा इससे पहले की अपनी इच्छाओं को बता सके, सब कुछ पाता चला जाता है। आसपास किसी कजिन ब्रदर-सिस्टर के न होने से किसी के साथ किसी चीज को शेयर करने का सवाल ही नहीं उठता। जो बच्चे को हद से ज्यादा सेल्फ-सेंटर्ड बना देता है। इससे उसकी एडल्ट लाइफ के लिए समस्या पैदा हो सकती है, जहां कई तरह के समझौते और कम्प्रोमाइजेज करने होते हैं ताकि अपनी जिंदगी में दूसरों को जगह दे सके। लिहाजा, अपने बच्चे को उन बच्चों के साथ घुलने-मिलने दें, जिनके पास भौतिक सुख-सुविधाओं की थोड़ी कमी हो। ऐसे में अपनी चीजों को उनके साथ शेयर करना सीखेंगे। तभी वे गिविंग और शेयरिंग की ज्वॉय को अनुभव कर सकेंगे।

जिम्मेदारी- बच्चे को रिस्पॉनसिबल एडल्ट बनाने के लिए यह भी एक महत्वपूर्ण वैल्यू है। वह जो भी करे, उसकी जिम्मेदारी लेना उन्हें बताएं चाहे वह सही हो या गलत। अपनी गलतियों का दायित्व उठाने पर उसे समझने में मदद होगी कि वह जो भी किया है, वही जिम्मेदार है और सजा का हकदार है। कम उम्र से ही इस वैल्यू को मन में बिठाने से असमर्थ व्यक्ति बनने से रोकता है, जो अपनी गलतियों के लिए हमेशा दूसरों को दोषी ठहराएं।

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प्यार- प्यार व्यक्ति के जीवन का सबसे खुबसूरत और महत्वपूर्ण क्वालिटी है। अपने प्रियजनों को प्यार करना आसान होने के साथ नेचुरल भी होता है पर हर कोई बिना किसी शर्तों के प्यार नहीं कर सकता। दूसरों को यहां तक की अपने दुश्मनों को भी प्यार करने के महत्व को समझाएं। जैसा कि प्यार करने से प्यार और बढ़ता है। दूसरों की गलतियों को भुलाकर माफ कर देना सीखें, क्योंकि शिकायत या दुश्मनी रखना सिर्फ दुख पहुंचाने के साथ आपको तुच्छ बनाता है। यह भी बताएं कि अपना प्यार सिर्फ ह्यूमन बीइंग्स तक ही सीमित न रखे, बल्कि जानवरों से भी प्यार करना जरूरी है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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