
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : June 11, 2026 10:25 AM IST
Medically Verified By: Dr Shorouq Motwani
Smart Toys
Smart Toys for Baby: आजकल बच्चों के खेलने का तरीका तेजी से बदल रहा है। खिलौनों की दुनिया में अब सिर्फ गुड़िया, कार या गेंद नहीं रह गए हैं, बल्कि उनकी जगह ले रहे हैं स्मार्ट टॉयज आ गए हैं। स्मार्ट टॉयज में ऐसे खिलौने शामिल होते हैं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वॉइस कमांड, सेंसर और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी तकनीकें शामिल होती हैं।
बात करने वाली गुड़िया, सवालों के जवाब देने वाले रोबोट और बच्चों के साथ इंटरैक्ट करने वाले इलेक्ट्रॉनिक पेट्स अब आम हो चुके हैं। लेकिन इसी के साथ एक बड़ा सवाल भी सामने खड़ा होता है कि क्या ये स्मार्ट टॉयज बच्चों की सोशल और इमोशनल स्किल्स को प्रभावित कर रहे हैं? इस बात की जानकारी के लिए हमने हमने Narayana Health SRCC Children's Hospital के चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री, कंसल्टेंट डॉ. शोरूक मोटवानी से बातचीत की है। आइए विस्तार से समझते हैं इस बारे में-
बच्चों का मानसिक और सामाजिक डेवलपमेंट मुख्य रूप से इंसानों के साथ बातचीत, खेल और अनुभवों से होता है। लेकिन स्मार्ट टॉयज के आने से यह पैटर्न धीरे-धीरे बदल रहा है।
डॉक्टर का कहना है कि ये टॉयज एक ओर बच्चों को सीखने और बोलने में मदद करते हैं, लेकिन दूसरी ओर वे असली सामाजिक दुनिया से दूरी भी बना सकते हैं। डॉक्टर का कहना है कि स्मार्ट टॉयज को टूल की तरह देखना चाहिए, रिप्लेसमेंट की तरह नहीं।
डॉक्टर कहते हैं कि स्मार्ट टॉयज के कुछ फायदे भी हो सकते हैं, जैसे-
1. लैंग्वेज और कम्युनिकेशन स्किल्स में सुधार : स्मार्ट टॉयज बच्चों से बात करते हैं, सवाल पूछते हैं और जवाब देने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे बच्चों की भाषा क्षमता और आत्मविश्वास बढ़ सकता है।
2. खेल-खेल में शिक्षा : अक्षर, नंबर और बेसिक नॉलेज को इंटरैक्टिव तरीके से सिखाने वाले ये टॉयज बच्चों के लिए पढ़ाई को मजेदार बना देते हैं।
3. शर्मीले बच्चों के लिए सहारा : जो बच्चे दूसरों से बात करने में हिचकिचाते हैं, उनके लिए ये टॉयज एक सुरक्षित शुरुआत दे सकते हैं, जिससे वे धीरे-धीरे खुलने लगते हैं।
डॉक्टर कहते हैं कि एक ओर स्मार्ट टॉयज के इस्तेमाल से बच्चों को फायदे होते हैं। वहीं, दूसरी ओर इससे बच्चों को नुकसान भी हो सकते हैं, जैसे-
1. असली सामाजिक संपर्क में कमी : अगर बच्चा ज्यादा समय स्मार्ट टॉयज के साथ बिताता है, तो वह असली लोगों से बातचीत कम करने लगता है। यही बातचीत आगे चलकर सोशल स्किल्स की नींव बनाती है।
2. भावनात्मक समझ की कमी : स्मार्ट टॉयज प्रोग्राम्ड होते हैं, वे असली भावनाओं को महसूस या समझ नहीं सकते। इसलिए वे बच्चे को वास्तविक भावनात्मक अनुभव नहीं दे पाते।
3. अकेले खेलने की आदत : इनमें से कई टॉयज व्यक्तिगत उपयोग के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जिससे ग्रुप प्ले और टीम इंटरैक्शन कम हो सकता है।
4. टेक्नोलॉजी पर निर्भरता : लगातार डिजिटल इंटरैक्शन से बच्चे आउटडोर गेम्स और क्रिएटिव एक्टिविटीज़ से दूर हो सकते हैं।
डॉ. मोटवानी का कहना है कि समस्या स्मार्ट टॉयज में नहीं, बल्कि उनके काफी ज्यादा इस्तेमाल में है। अगर माता-पिता सही संतुलन रखें तो ये टॉयज सीखने के अच्छे माध्यम बन सकते हैं। लेकिन अगर ये असली सामाजिक इंटरैक्शन की जगह लेने लगें, तो यह बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टर का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के साथ खुद भी खेलने और बातचीत करने का समय निकालना चाहिए, ताकि बच्चे वास्तविक दुनिया से जुड़े रहें।
नहीं, स्मार्ट टॉयज को पूरी तरह हटाने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। असली सीख और भावनात्मक विकास हमेशा इंसानों के साथ रिश्तों, बातचीत और अनुभवों से ही आता है।
Disclaimer : स्मार्ट टॉयज आधुनिक तकनीक का एक बड़ा बदलाव हैं, जो बच्चों के सीखने और खेलने के तरीके को नया रूप दे रहे हैं। ये बच्चों की भाषा और समझ को बढ़ा सकते हैं, लेकिन अगर इनका उपयोग असंतुलित हो जाए तो यह सामाजिक और भावनात्मक विकास पर असर डाल सकते हैं।