स्लीप रिग्रेशन क्या है? न्यू पेरेंट्स के लिए गाइड

4 महीने की उम्र से टॉडलर स्टेज में बच्चों में स्लीप रिग्रेशन होना काफी कॉमन है, ऐसे में आपको घबराने की जरूरत नहीं होती है। आइए डॉक्टर से इस विषय के बारे में विस्तार से समझते हैं-

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Written By: Kishori Mishra | Published : May 19, 2026 11:27 AM IST

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Medically Verified By: Dr Indu Khosla

Sleep regression in babies : नए माता-पिता के लिए बच्चे की नींद सबसे बड़ी चिंता बन जाती है। कई बार ऐसा होता है कि बच्चा पहले आराम से पूरी रात सोता है, लेकिन अचानक रात में बार-बार उठने लगता है, सोने में परेशान करता है या दिन में भी ठीक से नहीं सोता। इस स्थिति को स्लीप रिग्रेशन कहा जाता है। हालांकि, यह समस्या माता-पिता के लिए थका देने वाली हो सकती है, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह बच्चे के सामान्य विकास का हिस्सा है।

मुंबई स्थिति नारायणा हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. इंदु खोसला  का कहना है कि स्लीप रिग्रेशन अस्थाई होता है और ज्यादातर बच्चे कुछ समय बाद फिर से सामान्य तरीके से सोने लगते हैं। ऐसे में माता-पिता को इसे लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं होती है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे स्लीप रिग्रेशन क्या है और माता-पिता इस स्थिति में क्या करेंय़

क्या होता है स्लीप रिग्रेशन?

स्लीप रिग्रेशन वह स्थिति है जब बच्चा अचानक अपनी नींद की आदत बदल देता है। जो बच्चा पहले अच्छी नींद ले रहा था, वह रात में कई बार जाग सकता है, बार-बार गोद मांग सकता है या सोने से मना कर सकता है। कई बच्चों की दिन की नींद भी प्रभावित हो जाती है। यह समस्या आमतौर पर कुछ दिनों या हफ्तों तक रहती है और फिर धीरे-धीरे ठीक हो जाती है।

किन उम्र में ज्यादा होता है यह बदलाव?

डॉ. इंदु खोसला के मुताबिक, स्लीप रिग्रेशन अक्सर बच्चे के विकास के खास चरणों में देखने को मिलता है। यह आमतौर पर 4 महीने की उम्र में या फिर 8 महीने की उम्र के बच्चों में देखने को मिलता है। इसके बाद स्लीप रिग्रेशन बच्चों में टॉडलर स्टेज में ज्यादा होता है।

इन दिनों बच्चे का दिमाग तेजी से विकसित हो रहा होता है। वह नई चीजें सीख रहा होता है और आसपास की आवाजों और गतिविधियों को ज्यादा महसूस करने लगता है। ऐसे में माता-पिता को इस स्थिति को समझने की जरूरत होती है।

बच्चे की नींद क्यों हो जाती है खराब?

जब बच्चा नई स्किल्स सीखना शुरू करता है, तो उसका दिमाग लगातार एक्टिव रहता है। जैसे - पलटना सीखना,  घुटनों के बल चलना,  बैठना और दांत निकलना, इत्यादि। ये सभी बदलाव बच्चे की नींद को प्रभावित कर सकते हैं। कई बार बच्चा रात में जागकर फिर से सो नहीं पाता क्योंकि उसका दिमाग और शरीर लगातार नई चीजों को समझने में लगा होता है।

ऐसी स्थिति में माता-पिता क्या करें?

स्लीप रिग्रेशन के दौरान माता-पिता को धैर्य रखने की जरूरत होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चे की नींद सुधारने के लिए कुछ आसान बातें मदद कर सकती हैं। आइए जानते हैं इस  बारे में-

तय करें बेडटाइम रुटीन - हर दिन बच्चे को एक ही समय पर सुलाने की कोशिश करें। सोने से पहले हल्की लोरी, धीमी रोशनी और शांत माहौल बच्चे को रिलैक्स करने में मदद करता है।

सोने से पहले ज्यादा एक्टिविटी न कराएं - अगर बच्चा सोने से पहले बहुत ज्यादा खेलता है या तेज आवाजों के बीच रहता है, तो उसे शांत होने में समय लग सकता है।

कमरे का माहौल रखें शांत - कम रोशनी और कम शोर वाला कमरा बच्चे की बेहतर नींद में मदद करता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

डॉ. इंदु खोसला कहती हैं कि स्लीप रिग्रेशन सामान्य है, इसलिए तुरंत घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो, खाने में दिक्कत हो, बार-बार बुखार या बीमारी हो और लंबे समय तक नींद की गंभीर समस्या बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

Disclaimer : स्लीप रिग्रेशन माता-पिता के लिए मुश्किल समय हो सकता है, लेकिन यह बच्चे के विकास का एक सामान्य हिस्सा है। सही रूटीन, शांत माहौल और थोड़े धैर्य के साथ ज्यादातर बच्चे धीरे-धीरे फिर से अच्छी नींद लेने लगते हैं।

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