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गलत पॉजिशन में बैठने से रुक सकता है बच्चों का मानसिक विकास, ये है बच्चों के बैठने की सबसे सही पॉजिशन

जब बच्चा बैठता है तो उसे अपने खिलौनों के साथ खेलने में भी आसानी होती है और वह अपनी बॉडी के भार को उठाने में भी सक्षम हो पाते हैं। लेकिन इस स्टेज पर पेरेंट्स को थोड़ा सजग और सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि बच्चा बैठ रहा है यह तो खुशी की बात है लेकिन आपको इसके साथ यह भी देखना होगा कि आपका ​बच्चा सही पॉजिशन में बैठ रहा है या नहीं। क्योंकि गलत पॉजिशन में बैठने से बच्चे का न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है।

गलत पॉजिशन में बैठने से रुक सकता है बच्चों का मानसिक विकास, ये है बच्चों के बैठने की सबसे सही पॉजिशन
गलत पॉजिशन में बैठने से रुक सकता है बच्चों का मानसिक विकास, ये है बच्चों के बैठने की सबसे सही पॉजिशन

Written by Rashmi Upadhyay |Updated : October 9, 2020 8:01 PM IST

जब कोई माता पिता अपने बच्चे को बिना किसी मदद से खुद बैठता हुए देखते हैं तो उस पल ​उनकी जिंदगी के खास पलों में से एक होता है। यह उन्हें इस चीज का आभास कराता है कि अब उनका नन्हा मुन्ना बेबी बड़ा हो रहा है। जब बच्चा बैठता है तो उसे अपने खिलौनों के साथ खेलने में भी आसानी होती है और वह अपनी बॉडी के भार को उठाने में भी सक्षम हो पाते हैं। लेकिन इस स्टेज पर पेरेंट्स को थोड़ा सजग और सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि बच्चा बैठ रहा है यह तो खुशी की बात है लेकिन आपको इसके साथ यह भी देखना होगा कि आपका ​बच्चा सही पॉजिशन में बैठ रहा है या नहीं। क्योंकि गलत पॉजिशन में बैठने से बच्चे का न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है।

W पॉजिशन में बैठना है बच्चों के लिए खतरनाक

W पॉजिशन वह पॉजिशन होती है जिसमें बच्चे अपने घुटने को पीछे की ओर मोड़ते हैं और हिप को जमीन पर टिकाकर रखते हैं। जब बच्चे बैठना सीखते हैं तो अक्सर शुरुआत W पॉजिशन से ही करते हैं। क्योंकि इस पॉजिशन में बैठना बच्चों के लिए बहुत आसान होता है। हालांकि शुरुआत में या कुछ समय के लिए इस पॉजिशन में बैठना नुकसानदायक नहीं होता है। लेकिन जब बच्चा लंबे समय तक इस तरीके से बैठे तो बच्चों की सेहत पर इसका जरूर असर पड़ता है। इससे बच्चों के घुटने कमजोर होने, बोन मसल्स के कमजोर होने, पाइगन टोड, सेरिब्रल पैल्सि और तंत्रिका संबंधी आदि स्थिति दिक्कतें हो सकती हैं।

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हो सकती है हाइपरमोबाइल की समस्या

गलत पॉजिशन में बैठने से बच्चों को हाइपरमोबाइल की समस्या भी हो सकती है। जोड़ों के असामान्य रूप से मुड़ने की स्थिति को हाइपरमोबिलिटी के नाम से जाना जाता है। हाइपरमोबिलिटी होने पर बच्चों को जोड़ों में दर्द हो सकता है और ट्रंक की मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती है। ऐसी ​स्थि​ति में बच्चों के घुटनों में तनाव आ जाता है और वह सक्रिय नहीं हो पाते हैं।

रुक सकता है मानसिक विकास

एक्सपर्ट कहते हैं कि जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है तो पेरेंट्स को अपने बच्चे की हर एक एक्टिविटी पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि वो क्या खा रहा है, कैसे उठ-बैठ रहा है, किन खेलों में रुचि ले रहा है और किस तरह से उसका स्वभाव है। क्योंकि इन सब चीजों का असर बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य पर तो तुरंत दिख जाता है लेकिन मानसिक स्वास्थ्य पर दिखने में समय लगता है। और जब वह दिखता है तो उसे कंट्रोल कर पाना मुश्किल भरा हो सकता है। गलत पॉजिशन में बैठने से भी बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। जब बच्चे के शरीर में सही तरह से डेवलपमेंट नहीं होती है तो इसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।

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ये है बच्चों के बैठने की सबसे बेस्ट पॉजिशन

सुखासन बच्चों के बैठने की सबसे बेस्ट पॉजिशन मानी जाती है। इस पॉजिशन को ईजी पोज/ डीसेंट पोज या प्लीजेंट पोज भी कहते हैं। वैसे तो यह पॉजिशन हर उम्र के व्यक्ति के लिए अच्छी होती है लेकिन बच्चों को अगर शुरू में ही इस तरीके से बैठना सिखाए तो वह हमेशा इसी तरह से बैठने का प्रयास करेंगे। इस तरह से बैठने से पैर और घुटने भी सीधे रहते हैं और रीढ़ की हड्डी भी एक्टिव रहती है। इस पॉजिशन में बैठने के लिए दोनों पैरों को बारी-बारी से क्रॉस करते हुए घुटनों को भीतर की तरफ मोड़ना होता है। इसमें घुटने बाहर की तरफ रहते हैं और पॉजिशन पालथी जैसी बन जाती है।