
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : July 8, 2024 10:46 AM IST
Signs of bad parenting that make children fussy in hindi: बच्चों की परवरिश करना आसान काम नहीं है। वहीं अगर वह टीनएज में प्रवेश करने जा रहे हो तो ऐसे में परवरिश करना किसी चुनौती से काम नहीं होता। इस दौरान बच्चों के मनोविज्ञान को समझना और उनके साथ सही तरीके से संवाद करना बहुत महत्वपूर्ण है। कई बार पेरेंट्स अनजाने में ऐसी बातें कह जाते हैं, जो बच्चों को गुस्सा दिला सकती हैं और उनका आत्मसम्मान कम कर सकती हैं। यहाँ आज हम आपको कुछ सामान्य गलतियाँ बताने जा रहें हैं, जो पेरेंट्स अक्सर करते हैं।
बच्चों को यह कहना कि तुम कुछ नहीं कर पाओगे तुम ना खा रहे हो तुम केवल असफल ही हो सकते हो उनके आत्मविश्वास को चोट पहुंचता है। बाल मनोवैज्ञानिक भी बताते हैं कि इस तरह की नकारात्मक बातें बच्चों के आत्मविश्वास को ठेस पहुँचाती हैं और उन्हें निराश कर सकती हैं।
बच्चों की अच्छी परवरिश करने का सबसे पहला और अहम नियम है किसी से उनकी तुलना नाकरना। तुलना करने से बच्चों को हीन भावना महसूस हो सकती है और वे अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लगते हैं। ऐसा करने से उनका आत्मविश्वास कम होता है और उनमें दूसरों के प्रति घृणा और जलन की भावना पैदा होने लगती है जो की उनके व्यक्तित्व विकास के लिए हानिकारक है। हर बच्चे की अपनी विशेषताएँ और क्षमताएं होती हैं। तुलना करने की बजाय उनके अनूठे गुणों की सराहना करें।
तुम काम नहीं केवल गलतियां कर सकते हो यह कहना बच्चों को मानसिक हानि पहुंचतीहै। इससे उन्हें लगने लगता है कि वह कभी कोई भी कम अच्छी तरीके से नहीं कर सकते। इस प्रकार की जनरलाइजेशन (सामान्यीकरण) वाली बातें बच्चों को गुस्सा दिला सकती हैं और उनके आत्मसम्मान को कम कर सकती हैं।
बच्चों से उम्मीदें लगाना अच्छा है लेकिन अपनी उम्मीदें उन पर थोपना उन्हें परेशान कर सकता है। बच्चों पर बहुत ज्यादा दबाव डालने से वे तनाव में आ सकते हैं और उन्हें असफलता का डर सताने लगता है। इसलिए आपको कभी भी अपनी उम्मीदों का बोझ अपने बच्चों पर नहीं डालना चाहिए और ना ही उन्हें ऐसे ही बातें बोलनी चाहिए जिनसे उन्हें बुरा लगे।
पेरेंट्स बच्चों को गुस्सा दिलाने वाली बातें कहने के बजाय उनको निम्नलिखित बातें कहकर उन्हें अपनी बात समझ सकते हैं,
सकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें: बच्चों को प्रेरित करने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन और सकारात्मक बातें कहें।
गलतियों को सीखने का अवसर मानें: बच्चों को उनकी गलतियों के लिए दंडित करने की बजाय, उन्हें समझाएं कि गलतियाँ सीखने का हिस्सा होती हैं और उनसे कैसे सीखा जा सकता है।
सपोर्टिव और समझने वाले बनें: बच्चों की भावनाओं और दृष्टिकोण को समझने की कोशिश करें और उन्हें महसूस कराएं कि आप उनके साथ हैं।
स्पष्ट और सकारात्मक उम्मीदें रखें: बच्चों से अपनी उम्मीदों को स्पष्ट और यथार्थवादी तरीके से व्यक्त करें, और उन्हें बताएं कि आप उनकी कितनी सराहना करते हैं।
बच्चों की अच्छी परवरिश करने के लिए आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए और उन्हें कोई भी बात कहते हुए सकारात्मक शब्द और वाक्य का ही प्रयोग करना चाहिए यह उनके व्यक्तित्व के विकास में सहायक होते हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ाने और आत्मविश्वास से जीने की शक्ति भी देते हैं।