मां-बाप की ये 6 आदतें बच्चे के लिए बन सकती हैं इमोशनल अब्यूज का कारण, उसकी मेंटल हेल्थ पर पड़ सकता है असर

इस लेख में पढ़ें बच्चों में इमोशनल अब्यूज के लक्षण और उनकी मदद करने के कुछ उपायों के बारे में।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : October 18, 2022 5:52 PM IST

Emotional Abuse By Parents: बच्चों को अनुशासन, अच्छा व्यवहार और सही-गलत का फर्क समझाने के लिए माता-पिता अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। लेकिन, कई बार माता-पिता बच्चों के साथ इतना स्ट्रिक्ट हो जाते हैं कि बच्चे इसकी वजह से बहुत अधिक मानसिक और भावनात्मक दबाव भी महसूस करते हैं। धीर-धीरे यह दबाव इतना अधिक बढ़ जाता है कि बच्चों के मन में माता-पिता का नाम सुनते ही दहशत-सी महसूस होने लगती है। ऐसे बच्चे अपने माता-पिता से बात करने से भी कतराने लगते हैं और वे मेंटली खुद को अकेला, दुखी और असहाय पाते हैं। इस स्थिति को इमोशनल अब्यूज कहा जाता है। परेशानी भरी बात यह है कि माता-पिता को भी इस बात का अंदाजा नहीं होता कि वे अपने बच्चे को सुधारने या निखारने की कोशिश में उसका बुरा कर रहे हैं। क्योंकि उनके व्यवहार की वजह से बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।

इमोशनल अब्यूज या बच्चों का भावनात्मक शोषण उनके मनोवैज्ञानिक विकास पर बुरा असर डालता है। इससे बच्चों का व्यक्तित्व भी खुलकर विकसित नहीं हो पाता और वे कई तरह की साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम्स भी महसूस कर सकते हैं। इस लेख में पढ़ें बच्चों में इमोशनल अब्यूज के लक्षण (Symptoms of emotional abuse in kids) और उनकी मदद करने के कुछ उपायों के बारे में।

इन तरीकों से मां-बाप करते हैं बच्चे का इमोशनल अब्यूज (Emotional Abuse in kids in Hindi)

  1. दूसरों के सामने बच्चे को सम्मान ना देना।
  2. बच्चे से ठीक तरीके से बात ना करना।
  3. बच्चों को हमेशा डरा-धमका कर रखना।
  4. बच्चे को प्यार ना देना।
  5. उसकी भावनात्मक जरूरतों को ना समझना।
  6. बच्चे को डांटना-फटकारना या गाली देना।

बच्चों में इमोशन अब्यूज के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of emotional abuse in kids in Hindi)

  1. बच्चे के मन में माता-पिता के लिए डर बैठ जाना, उनका नाम सुनते ही बच्चे का डर जाना।
  2. बच्चे में उदासी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं।
  3. पढ़ाई-लिखाई में बच्चे की रूचि कम होना।
  4. बच्चे का खुद को कोसना या भला-बुरा कहना।
  5. दोस्तों और दूसरे बच्चों के साथ खेलने-कूदने से कतराना।

भावनात्मक शोषण वाले बच्चों की मदद कैसे करें ?

  • बच्चों की साइकोलॉजिकल जरूरतों (Psychological Needs) को समझते हुए उनकी समस्या को समझें और उनकी मदद करें।
  • बच्चे के व्यवहार को बेहतर बनाने और उसे मेंटली हेल्दी बनाने के लिए प्रयास करें।
  • उनके साथ बात करते हुए अपनी भाषा, लहजे और आवाज की टोन पर ध्यान दें।
  • बच्चे का विश्वास जीतें और उसे समझाएं कि आप उसे सपोर्ट करने के लिए हैं।