
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : August 10, 2022 5:02 PM IST
दूध को संपूर्ण आहार कहा जाता है, क्योंकि इसमें लगभग वे सभी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी होते हैं। यही कारण है कि छोटे बच्चों के लिए मिल्क बेहद जरूरी होता है। छोटे बच्चों का शरीर विकसित हो रहा होता है, जिसके लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है। जिन बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है, तो उनकी नॉर्मल ग्रोथ रुक जाती है और कुछ गंभीर स्थितियों में बच्चे कुपोषण का शिकार भी हो जाते हैं। इसलिए डॉक्टर बच्चों को पर्याप्त मात्रा में दूध पिलाने का सुझाव देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि बच्चों को एक लिमिट से ज्यादा दूध पिलाना उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, वैसे तो लिमिट से ज्यादा खाया गया कोई भी फूड हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा दूध का सेवन करने से बच्चों को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपके घर में भी बच्चे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि उन्हें रोजाना कितनी मात्रा में दूध मिलना चाहिए।
छोटे बच्चों के लिए कितना दूध उचित है यह उनकी उम्र पर निर्भर करता है। kidshealth के अनुसार बच्चे की उम्र के अनुसार उसके लिए दूध की उचित मात्रा निम्न दी गई है -
वहीं अगर बच्चा एक से दो साल का है या फिर उससे भी बड़ा हो गया है, तो उसकी भूख, शारीरिक वजन और स्वास्थ्य के अनुसार दूध की मात्रा को कम ज्यादा किया जा सकता है। अगर आप निश्चित नहीं कर पा रहे हैं कि बच्चे के कितना दूध देना चाहिए, तो ऐसे में आप किसी अच्छे डाईटीशियन से बात कर सकते हैं।
कई बार पेरेंट्स को पता नहीं होता है और वे शिशुओं को ज्यादा दूध पिला देते हैं, जिससे बच्चे को पेट संबंधी कई समस्याएं हो जाती हैं। ज्यादा दूध के कारण कई बार शिशुओं को कब्ज, दस्त या पेट फूलना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ज्यादा दूध पीने से कई बार बच्चों के पेट में गंभीर दर्द हो जाता है, जिससे वे लगातार रोने लगते हैं।
अगर बच्चा लगभग 2 साल का है, तो भी उसके लिए दूध की उचित मात्रा जरूरी है। इस उम्र के बच्चों की पाचन क्रिया भी इतने अच्छे से काम नहीं कर पाती है और साथ ही वे बाहर की चीजें खाना शुरू कर देते हैं। ऐसी स्थितियों में दूध की सही मात्रा को निश्चित करना जरूरी है। दूध में फैट ज्यादा होता है और ज्यादा दूध को पचाने में समय लगता है। कई बार बच्चा दूध पीने के बाद कुछ और नहीं खा पाता है और उसे भूख लगना कम हो जाती है। पोषण में असंतुलन होने से भी उसे कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।