
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 15, 2024 7:31 AM IST
Parenting Tips For Bonding Between Father And Kids: पेरेंटिंग मां और पिता दोनों के लिए एक नया और जिम्मेदारीभरा अनुभव होता है। बच्चे की देखभाल और परवरिश के दौरान माता और पिता दोनों को एक्टिविली हिस्सेदारी लेनी पड़ती है और इसी से बच्चों को भी दोनों पेरेंट्स से जुड़ने और उनसे नयी-नयी चीजें सीखने का मौका मिलत है।
आमतौर पर देखा जाता है कि बच्चे अपना अधिकांश समय अपनी मां के पास ही रहते हैं इसीलिए, वे उनसे अधिक जुड़ाव भी महसूस करते हैं। वहीं, पिता के जो अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं या बच्चों के साथ सख्ती से पेश आते हैं इसीलिए, उन्हें बच्चे के साथ कनेक्ट करने में थोड़ी मुश्किल आती है।
एक पिता के तौर पर अगर आप भी अपने बच्चे के साथ अपनी बॉडिंग मजबूत बनाना चाहते हैं तो आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं। ये टिप्स आपको अपने बच्चे के साथ अपने रिश्ते को मजबूत और बेहतर बनाने में मदद करेंगे।
अक्सर पिता और बच्चों के बीच कम बातचीत होती है क्योंकि वे बहुत कम समय तक एक-दूसरे के साथ रहते हैं। छुट्टियों वाले दिन भी अक्सर बच्चे अपने दोस्तों के साथ ही खेलने में वक्त बिताते हैं और पिता के साथ उन्हें कम समय ही मिलता है। इससे कम्यूनिकेशन गैप (communication gap) बढ़ सकता है। ऐसे में पिता को कोशिश करनी होगी कि वे बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। केवल संडे ही नहीं हर दिन बच्चे को थोड़ा समय दें, उनके साथ खेलें और होमवर्क में उनकी मदद करें। इससे बच्चे को भी आपके साथ समय बिताना अच्छा लगेगा।
बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करें। इसके लिए आप उन्हें आसपास के पार्क्स, चिड़ियाघर, लाइब्रेरी (library) जैसी जगहों पर ले जा सकते हैं। इससे बच्चा और आप ना केवल अच्छा वक्त साथ गुजार पाएंगे बल्कि इससे आप दोनों की बॉडिंग (kid-father bonding) भी बेहतर होती है।
बॉडिंग मजबूत बनाने के लिए आप बच्चे के डेली के छोटे-मोटे काम कर सकते हैं। बच्चे को ब्रश करने में मदद करें, उनका स्कूल बैग पैक करवाएं। इसी तरह नाश्ता कराने के लिए मां की जगह पिता बच्चे के साथ बैठ सकते हैं।
आमतौर पर भारतीय घरों में मां प्यार-दुलार और पापा डांटने या डिसिप्लिन सिखाने वाली पर्सनालिटी के तौर पर देखे जाते हैं। बच्चे के साथ केवल सख्ती से पेश आने की बजाय उन्हें प्यार से समझाएं और उनसे बात करें। बच्चे के साथ दोस्ती करें और उनकी बातों को समझने की कोशिश करें।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।