दादा-दादी के साथ रहने वाले बच्चे क्यों होते हैं औरों से अलग, बुजुर्गों के साथ रहने से बच्चों को होते हैं ये फायदे

कुछ स्टडीज के अनुसार अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहनेवाले बच्चों को इस तरह के फायदे हो सकते हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 23, 2022 2:42 PM IST

Living with grandparents health benefits: अच्छे और खुशहाल परिवार की कल्पना करने को कहा जाए तो एक बेटा एक बेटी और उनके साथ हसंते-खिलखिलाते दादा-दादी के चेहरे आंखों के आगे दिखायी देने लगते हैं। हम भारतीय घरों में खुशहाल परिवार की ऐसे दृश्य हम में से अधिकांश लोगों ने देखा है और इसीलिए, हम बचपन में दादा-दादी या नाना-नानी के साथ बिताए गए समय को बहुत ही प्यारी यादों के तौर पर याद करते हैं। लेकिन, इसके साथ यह भी अफसोस होता है कि मौजूदा समय में जहां एकल परिवारों या न्यूक्लियर फैमिलीज का चलन बढ़ा है ऐसे में लोगों को अपने मां-बाप से दूर दूसरे शहरों या विदेश जाकर काम करना पड़ता है। ऐसे में परिवार के बच्चों को दादा-दादी से मिलने का मौका कभी-कभार ही मिल पाता है। लेकिन, अगर साइंस की मानें तो बच्चों के लिए दादा-दादी, नाना-नानी और घर के बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं उनके मानसिक, बौद्धिक और इमोशनल विकास बेहतर तरीके से होते हैं। कुछ स्टडीज के अनुसार अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रहनेवाले बच्चों को इस तरह के फायदे हो सकते हैं। (Why Living with grandparents is beneficial for kids in Hindi)

बच्चे सीखते हैं एडजस्टमेंट

सिंगल किड्स के साथ आज जो एक बड़ी समस्या आती है वह यह है कि वे अन्य बच्चों या लोगों के साथ एडजस्ट नहीं कर पाते, अपनी जगह या अपने खिलौने शेयर नहीं करना चाहते और ना ही अपने माता-पिता के करीब किसी और बच्चे को देख पाना उन्हें पसंद आता है। लेकिन, दादा-दादी के साथ रहने से बच्चों को माता-पिता के अलावा इन दोनों के साथ रहने, उनकी बातें सुनने, उनसे सलाह लेने और अपने मन की बातें शेयर करने का भी मौका मिलता है। इसके अलावा छुट्टियों में दादा-दादी या नाना-नानी से बच्चों को मिलाने का रूटीन जिन घरों में होता है वहां बच्चों को अपने चचेरे-ममेरे, मौसेरे और फुफेरे भाई-बहनों के साथ घुलने-मिलने का भी मौका मिलता है। इस तरह वे एकसाथ रहते हुए साथ खेलना-कूदना, खाना-पीना और मस्ती करना सीखते हैं जो उन्हें सोशल बनने में अधिक मदद करता है।

बड़ों को सम्मान देना सीखते हैं बच्चे

बच्चों को अच्छे संस्कार देने की कोशिश हर माता-पिता की होती है। दादा-दादी के साथ रहनेवाले बच्चों के मामले में यह काम आसानी से हो सकता है। बड़े होने के नाते दादा-दादी जहां आपके बच्चे की शैतानियों को माफ करने और उन्हें खुलकर बचपन जीने में मदद करते हैं। वहीं, बच्चे को खेल-खेल में दादा-दादी अच्छी बातों की सीख दे सकते हैं, उन्हें माफ करना, सहन करना और लोगों का सम्मान करना सिखाते हैं। इस तरह बच्चा ना केवल दादा-दादी और मां-बाप के प्रति अधिक सम्मानजनक व्यवहार सीखता है बल्कि, वह अपने दोस्तों, क्लासमेट्स और आसपास के अन्य लोगों को भी इज्जत देना और उनकी फिक्र करना सीखता है।

बढ़ता है बच्चों का आत्मविश्वास

जॉइंट फैमिली में रहने के कारण बच्चे परिवार और टीम का अर्थ बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और इससे बच्चों को अच्छे संस्कार देना संभव हो पाता है। बच्चे दादा-दादी से प्रेम, समर्पण और सहयोग करने जैसी भावनाएं सीखते हैं। बुजुर्गों के साथ रहने से बच्चों को अलग-अलग स्थितियों को हैंडल करने में आसानी भी होती है जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे खुद को अधिक साहसी और उत्साही महसूस करते हैं।

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