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स्कूल बैग में मुनासिब वजन हो, तो बच्चे की पीठ को नुकसान पहुंचने की आशंका होती है कम

हाल ही में हुए अध्ययन में यह कहा गया है कि पीठ पर लादे जाने वाले बैग में एक मुनासिब वजन होने और उसके सही फिट आने पर बच्चे की पीठ को नुकसान पहुंचने की आशंका नहीं होती है।

अब तक स्वास्थ्य विशेषज्ञ यही कहते आए हैं कि बच्चों का स्कूल बैग इतना भारी होता है, जिसके कारण उन्हें पीठ दर्द और मांसपेशियों की समस्याओं व गर्दन दर्द से जूझना पड़ सकता है। इससे कई मां-बाप अपने बच्चों की सेहत को लेकर काफी चिंतित भी रहते हैं। यदि आप भी इस बात को लेकर परेशान रहते हैं, तो ऐसा करना छोड़ दीजिए। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि पीठ पर लादे जाने वाले भारी-भरकम बैग बच्चों की पीठ की सेहत के लिए सही होते हैं।

अगर आप अपने बच्चे के बस्ते के बोझ को लेकर चिंतित हैं तो चैन की सांस ले सकते हैं क्योंकि इस अध्ययन के अनुसार, पीठ पर लादे जाने वाले बैग में एक मुनासिब वजन होने और उसके सही फिट आने पर बच्चे की पीठ को नुकसान पहुंचने की आशंका नहीं होती है।

यह अध्ययन कनाडा के ब्रोक यूनिवर्सिटी में किया गया। इस यूनिवर्सिटी के सहायक प्रोफेसर माइकल होम्स का कहना है कि हाल में आए अध्ययन से माता-पिताओं की चिंताएं कम हो सकती हैं क्योंकि इससे पता चला है कि स्कूल बैग के इस्तेमाल और दर्द के बीच संबंध के ज्यादा सबूत नहीं हैं।

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उन्होंने कहा कि जैवयांत्रिकी और पीठ में दर्द के बीच संबंध को स्थापित करना मुश्किल रहा है। होम्स ने कहा कि मेरा मानना है कि अगर माता-पिता हैं तो आपको इस संबंध में ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा अगर किसी बैग में मुनासिब वजन है एवं वह सही तरह से पीठ पर फिट आ रहा है और बच्चे उसे ज्यादा देर तक पीठ पर नहीं लाद रहे हैं तो उसका लंबे समय के लिए किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हो सकता है।

सावधानी जरूर बरतें- बेशक अध्ययन में यह कहा गया है कि देर तक बच्चे बैग पीठ पर न लादे रहें, तो उन्हें अधिक नुकसान नहीं होगा, फिर भी कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें।

-स्कूल जाने वाले किसी भी छात्र के बैग का वजन बच्चे के वजन के 10 प्रतिशत से ज्‍यादा नहीं होना चाहिए।

- बच्चे के बैग में सभी किताबों और नोटबुक्स को न रखें। जिसकी जरूरत हो उन्हें ही टाइम टेबल के अनुसार रखें। कई किताबें ऐसी होती हैं जिनकी साल भर पढ़ाई नहीं होती इसलिए ऐसी किताबों को ले जाने से बचना चाहिए। - स्कूलों में छात्रों को कबर्ड और लॉकर की सुविधा दें, जिससे वह जरूरी किताबें ही घर ले जाएं और शेष स्कूल के लॉकर में ही रखी रहें।

- किसी भी पीठ, कमर और गर्दन की दर्द से बच्चे बचे रहें, इसके लिए उनमें बचपन से ही एक्‍सरसाइज और योग की आदत डालें।

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