
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Mishra Kishori | Published : February 14, 2025 3:35 PM IST
बच्चे को जन्म देना और उसे पालना माता-पिता दोनों के लिए ही बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। बच्चा कब भूखा है या उसके पेट में गैस है, ये सब समझना उसके रोने से जानना बहुत मुश्किल होता है और एक मुश्किल तब आती है जब शिशु के स्लीपिंग पैटर्न को समझना कठिन हो जाता है। शुरुआती महीनों में बच्चा दिनभर सोता है और रात को जागता है, लेकिन जो कपल पहली बार माता- पिता बनने का अनुभव महसूस करते हैं तो उनके लिए ये सब संभालना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रात-रातभर बच्चे के उठने और रोने से पेरेंट्स परेशान हो जाते हैं और घबराने लगते हैं कि आखिर शिशु ऐसा क्यों कर रहा है।
आपकी इस समस्या पर गुरुग्राम के क्लाउडनाइन हॉस्पिटल के पीडियाट्रिशन और नियोनेटोलॉजिस्ट डॉक्टर गोपाल अग्रवाल कहते हैं "न्यू बोर्न बेबी की स्लीप पैटर्न की वजह से पेरेंट्स परेशान और थक जाते हैं। ये समझना कि क्या नॉर्मल है और क्या रेड फ्लैग है, इसकी पहचान करना माता-पिता की अपेक्षाओं को मैनेज करने में, जरूरत होने पर मदद लेने में और ये समझने में मदद कर सकता है कि उनका बच्चा स्वस्थ है।" इसलिए आज हम आपको नवजात शिशु की नींद के पैटर्न बारे के बारे में जरूरी बातों को बताएंगे ताकि आप बेवजह चिंतित न हों और अगर कोई सीरियस समस्या हो तो आप उसे अनदेखा न करें।
गर्भ के समय से ही बच्चों का स्लीप पैटर्न हम लोगों से अलग होता है, जो उनके विकासशील दिमाग और शारीरिक जरूरतों से प्रेरित होता है। नेचर एंड साइंस ऑफ स्लीप जर्नल द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में लिखा गया है कि 'बच्चे जब जन्म लेते हैं तो उनका कोई स्लीप पैटर्न नहीं होता है। वो दिन और रात में बहुत कम समय के लिए सोते हैं, क्योंकि उनका बॉडी क्लॉक डेवेलप यानी कि विकसित नहीं हुआ होता है। साथ ही उनका थोड़े-थोड़े समय के लिए सोने की आदर उनकी भूख से भी प्रभावित होते हैं।'
इसलिए डॉ अग्रवाल ने बच्चे के स्लीप पैटर्न को समझने के लिए कुछ जरूरी बातें बताई हैं।
1. समय-समय पर दूध पिलाना- आमतौर पर नवजात शिशु एक दिन में 14-17 घंटे सोते हैं, लेकिन डॉ अग्रवाल का कहना है कि उन्हें बार-बार दूध पिलाने की वजह से ये टाइम पीरियड 2-4 घंटे में बट जरा है।
2. कम समय के लिए सोना- बड़ों से उलट जिनकी स्लीप साईकल 90 मिनट की होती है, नवजात शिशुओं के लिए ये 50-60 मिनट की होती है, जो एक्टिव नींद और शांत नींद के बीच होता हैंम
3. कभी भी नींद से उठ जाना- जन्म लेने के कुछ हफ्तों तक बच्चे नार्मल पैटर्न को फॉलो नहीं करते हैं। डॉ अग्रवाल का कहना है कि "उनकी नींद काफी हद तक भूख और दूसरी बायोलॉजिकल नीड से प्रभावित होती है।"
4. नींद में हरकत करना- आर.ई.एम यानी कि रैपिड ऑय मूवमेंट, जिसके दौरान बच्चे नींद में हिल सकते हैं, मुंह बना सकते हैं, मुस्कुरा सकते हैं या कुछ आवाजें निकाल सकते हैं। ये अमान्य है और बच्चे की ब्रेन डेवलपमेंट को दिखाता है।
1. बच्चे का बार-बार जागना- डॉ अग्रवाल ने बताया कि "न्यू बोर्न बेबी का नींद से बार-बार उठना सामान्य है, खासतौर पर दूध पीने के लिए उठना। जिसके लिए बच्चे हर 2-3 घंटे में जागते हैं।"
2. अनियमित नींद लेना- बच्चों के सोने का कोई तय समय नहीं होता है, इसलिए वे अक्सर दिन में नींद लेने के बाद रात को जागते हैं। डॉक्टर ने बताया कि "3-4 महीने की उम्र तक वो अपनी रात की नींद को मजबूत कर लेते हैं।"
3. नींद में अजीब आवाजें निकलना- आपने देखा होगा कि सोता हुआ बच्चा के तरह की आवाजें करता है जिसके बारे में डॉक्टर का कहना है कि "घुरघुराहट, खर्राटे और दूसरी आवाजें नुकसान रहित होती हैं और उनके इममैच्योर ब्रीथिंग सिस्टम के कारण होती हैं।"
वैसे तो ज्यादातर बच्चों सोने की आदतें एक सी होती हैं लेकिन फिर भी कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो गंभीर समस्याओं को दर्शाती हैं, जिन्हें डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है। जैसे-
1. बच्चे को नींद से जगाने में परेशानी- नवजात शिशु की नींद गहरी होती है लेकिन अगर आपको अपने बच्चे को जगाने में परेशानी हो रही है या सुस्त लग रहा है तो किसी पीडियाट्रिशन की सलाह लें।
2. बच्चे का ज्यादा सोना- डॉक्टर कहते हैं कि नवजात शिशु बहुत ज्यादा सोते हैं, लेकिन 18-20 घंटे से ज्यादा सोना , खासकर ठीक से खाना न मिलने और चिड़चिड़ेपन के साथ होना, इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।
3. बच्चे का कम सोना- अगर आपका बच्चा 14-17 घंटे हो रहा है और फिर थल हुआ सा लग रहा है तो इस विषय पर डॉक्टर अग्रवाल का कहना है कि ये बेचैनी, भूख या हेल्थ प्रॉब्लम से हो सकता है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि न्यू बोर्न बेबी की नींद अनियमित होती है लेकिन समय के साथ उनकी सोने की आदत को ठीक किया जा सकता है। आप डॉक्टर अग्रवाल के बताए इन सुझावों को अपना सकते हैं जैसे-
1. 4-6 हफ्ते की उम्र के आसपास बच्चे की अच्छी और समय पर नींद आने के लिए खाने, नहाने और सोने का रूटीन बनाएं।
2. बच्चे को हमेशा पीठ के बन सुलाएं और नीचे एक तगोड़ गद्दा रखें आ की कोई ढीला बिस्तर या तकिया।
3. बच्चे की सोने की जरूरत को पहचानें जैसे आंख मलना, जमाई लेना या चिड़चिड़ा होना। ये सभी नींद आने के संकेत हैं।
4. दिन-रात का समय बनाएं। बच्चे की आदत और स्लीप पैटर्न सुधारने के लिए दिन में घर में उजाला रखें और जब वो रात को सोए तो मध्यम लाइट का इस्तेमाल करें। इससे बच्चे के मन में रात और दिन को पहचानने में मदद मिलेगी।
5. इन सब के अलावा अगर फिर भी आपको बच्चे में कुछ असामान्य संकेत दिखते हैं तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।