
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 22, 2022 10:49 PM IST
Things parents should teach their son: सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों को अच्छी परवरिश मिले और वे अच्छी चीजें सीखें। भारतीय पेरेंट्स के लिए भी यह बात बहुत मायने रखती है कि उनके बच्चे समय से अपनी जिम्मेदारी समझ लें और अपने पैरों पर खड़ा हो सकें। हालांकि, लड़कियों और लड़कों को पढ़ने-लिखने, करियर बनाने और फाइनेंशियली इंडिपेडेंट बनने में मदद करने के लिए मां-बाप अपने अनुभव के आधार पर बहुत-सी टिप्स देते हैं। लेकिन, वहीं लड़कों को कुछ ऐसी बातें सिखाना भी जरूरी हैं जो उन्हें जिंदगी के हर दौर में कॉन्फिडेंट रहने में मदद करती हैं। वैसे इनमें से ज्यादातर बातें ऐसी हैं जो आमतौर पर लड़कियों को तो सिखायी जाती हैं लेकिन, इन्हें लड़कों को सिखाने का ख्याल मां-बाप को नहीं आते। यहां इस लेख में पढ़ें आप कुछ ऐसी ही लाइफ वैल्यूज़ और आदतों के बारे में जो लड़के और लड़कियों, दोनों को सिखानी चाहिए। (things parents must teach their son)

लड़कों को मजबूत या यूं कहें कि सख्त दिल बनने की सलाह तो अक्सर दी जाती है लेकिन उन्हें संवेदनशील बनने की सलाह कभी नहीं दी जाती। लेकिन, भावनाओं को समझना और लोगों को उनके कमजोर और मुश्किल समय में इमोशनली सपोर्ट करने के लिहाज से लड़कों को भी उतना ही सवंदेनशील बनना सिखाएं जैसा लड़कियों से उम्मीद की जाती है। लड़कों को जेंटलमेन बनना सिखाएं, उन्हें सिखाएं कि वह दूसरों को सम्मान दें और दूसरों की खूबियों को पहचानने और अपने आस-पास के लोगों के लिए भावनात्मक स्तर पर सपोर्टिव बने रहें।
अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में लड़कों को काफी दिक्कत होती है क्योंकि,उन्हें बचपन में यह नहीं सिखाया गया कि, अपने मन के डर, असुरक्षा और उदासी जैसी भावनाओं को दूसरों के सामने व्यक्त करने में कोई बुराई नहीं। इसी तरह कभी-कभार रो लेने (crying) में भी कुछ बुरा नहीं। उन्हें समझाएं कि लड़के भी रो सकते हैं क्योंकि, रोने के बाद उनके मन का दुख कम हो जाएगा और हो सकता है कि रो लेने के बाद उन्हें मानसिक स्तर पर बेहतर महसूस हो, आत्म-विश्वास बढ़े और अपनी समस्या का हल ढ़ूढने में मदद हो सकती है।
खाना खाने का शौक सभी को होता है लेकिन, लड़कियां जहां बचपन से ही किचन के कामों में इंट्रेस्ट लेने लगती हैं वहीं लड़के इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देते। लेकिन, जब लड़के पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में घर से दूर जाते हैं तो उन्हें अक्सर घर के खाने की याद सताती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि लड़के ना तो कुछ पकाना जानते हैं और ना ही उन्हें पता होता है कि किचन में किस तरह काम किया जाता है। ऐसे में कैंटीन और रेस्टोरेंट्स से खाना मंगाकर खाना ही उनके लिए इकलौता ऑप्शन बचता है जो मोटापा बढ़ने (Obesity), हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल (Hight Cholesterol Levels) और बेली फैट बढ़ने (Belly Fat) जैसी कॉमन लाइफस्टाइल डिज़िज़ेज़ (Lifestyle diseases) का खतरा बढ़ जाता है।
अपनी हेल्थ को संभालने और दूसरों पर निर्भर रहने की बजाय लड़कों को बचपन से ही किचन के छोटे-छोटे काम सिखाएं। सब्जियों की खरीददारी, सब्जियों और फलों को काटने, सैंडविच (sandwich) बनाना, चाय बनाना, दूध उबालना और नूडल्स (noodles) जैसी चीजें पकाना सिखाएं। बेसिक खिचड़ी, ऑमलेट और दाल-चावल पका लेना जब आसान हो जाता है तो लोग इसके बाद की कूकिंग भी सीखने में रूचि दिखा सकते हैं और इतनी कूकिंग स्किल्स नयी जगह पर अपनी पसंद का और साफ-सुथरा घर का बना खाना खा पाने में उनकी मदद कर सकता है।
बच्चे को समझाएं कि मां और बाप दोनों की अहमियत उसकी जिंदगी और किसी भी परिवार में कितनी महत्वपूर्ण होती है। उन्हें माता-पिता की भूमिका और योगदान को पहचानने के साथ-साथ उन्हें दोनों को बराबर स्तर पर सम्मान देना सिखाएं। (Honor and esteem your mother and father)
किसी भी व्यक्ति के लिए सच बोलना और झूठ से बचना महत्वपूर्ण है। बच्चों को यह सीख बचपन से दें और उन्हें बिना डरे सच बोलने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चे जब झूठ बोलते हैं तो इससे उन्हें आगे चलकर भी झूठ बोलना (kids telling lies), बहाने बनाना और मुश्किल स्थितियों को सामना करने से बचना बेहतर लगने लगेगा और वे सच नहीं बोलेंगे। इससे उनके व्यवहार में झूठ बोलने की आदत हमेशा से शामिल हो सकती है जिससे उनके लिए लोगों से सम्मान पाना मुश्किल हो सकता है और वह इज्जत नहीं कमा पाते।

मां का दर्जा सबसे ऊंचा है और इसीलिए वह सम्मान के काबिल है लेकिन मां के अलावा बाकी सभी महिलाओं का भी सम्मान करना जरूरी है और यह बात बेटों को छोटी उम्र से सिखाना चाहिए। बेटों को समझाएं कि लड़कियां और महिलाएं भावनात्मक स्तर पर अधिक मजबूत होती हैं और उनके सोचने का एक विशिष्ट पैटर्न भी है। आपकी सिखायी बातों के आधार पर ही घर में मौजूद दादी, चाची, कजिन्स के अलावा अपनी आया, टीचर, पास-पड़ोस की महिलाएं, रिश्तेदार और साथ पढ़नेवाली लड़कियों का सम्मान करने वाले लड़के ही खुद भी सम्मान पा सकेंगे। तभी वह बड़े होने के बाद प्रोफेशनल स्पेस और पर्सनल लाइफ में महिलाओं के साथ सम्मानपूर्ण रवैये और हेल्दी कॉम्पिटिशन जैसे शब्दों का अर्थ समझ पाएंगे और अपने साथ-साथ उन महिलाओं को भी आगे बढ़ने की दिशा में मदद कर सकेगा।
लड़कों को जिम्मेदारी उठाना सिखाएं। उन्हें सिखाएं कि वह जो कहते हैं उन्हें वैसा ही करना भी चाहिए। इसीलिए, वह जब किसी काम को करने का वादा करते हैं या कुछ करने की ठानते हैं तो उस काम की जिम्मेदारी ईमानदारी से उठाएं। काम को पूरा करना और उस काम को सही तरीके से पूरा भी करें। काम को पूरा करने में अगर किसी तरह की मुश्किल आती है तो उससे घबराएं नहीं और तब तक कोशिश करें जब तक कि वे सफल ना हों। शॉर्टकट अपनाने, बहाने बनाने और अपना काम दूसरों पर थोपने से बचने जैसी आदतें लड़कों को जरूर सिखाएं और हां उनका व्यक्तित्व ऐसा जरूर बनाएं कि उन्हें जरूरत हो तो अपनी भूल स्वीकारने और माफी मांगने में शर्मिंदगी ना महसूस हो।