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Written By: Pallavi | Published : November 5, 2022 1:57 PM IST
अभिनेता आर माधवन (R Madhavan) और उनकी पत्नी सरिता अपने बेटे वेदांत (Vedaant Madhavan) को एक स्विमिंग चैंपियन बनाना चाहते हैं। डेनिस ओपन में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीत चुके हैं और वेदांत की नजर अब 2026 में होने वाले ओलंपिक पर है। बता दें कि वेदांत एक बेहतरीन तैराक हैं और बचपन से ही वे इसके लिए तैयार रहे हैं। बता दें कि अभिनेता आर माधवन और उनकी पत्नी सरिता अपने बेटे वेदांत की वजह से दुबई भी शिफ्ट हो गए थे। इस समय देश में सुविधाओं की कमी के कारण, अभिनेता ने अपने बेटे को ट्रेन में मदद करने के लिए दुबई जाने का फैसला किया था। इस कदम ने उनके प्रशंसकों को हैरत में डाल दिया था और वे उनकी सराहना कर रहे हैं। ये बात सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा था। अभिनेता आर माधवन (R Madhavan) हर माता को यह बात सीख लेनी चाहिए कि बच्चे खेलों में भी आगे जा सकते हैं। साथ ही माता-पिता को उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए सपोर्ट करना चाहिए। कैसे, जानते हैं।
माता-पिता को कोशिश करनी चाहिए कि बच्चे बचपन से खेलने में इंट्रेस्टेड रहें। इसके लिए बच्चों को सीख दें कि वे बचपन से ही अलग-अलग खेलों को खेलें। अपने खुद के खेल बनाएं, दूसरे बच्चों के साथ खेलें, दोस्तों के साथ खेलें और यहां तक कि माता-पिता के साथ भी बच्चे खेलें। इस तरह आप बच्चों में बचपन से खेल का भाव पैदा कर सकते हैं।
बच्चों को अलग-अलग प्रकार के खेल खेलने दें। सिर्फ खो-खो और कबड्डी जैसे ही देसी खेल नहीं बल्कि गोल्फ, क्रिकेट,वॉलीबॉल और फुटबॉल जैसे खेलों को भी बढ़ावा दें। इस तरह बच्चों को अलग-अलग प्रकार के खेलों को खेल के लिए प्रेरित करें। साथ ही आप उनसे इस बारे में बात भी करें।
भारत में जिस तरह से क्रिकेट मैच के दौरान सब साथ में बैठ कर खेलों का मजा लेते हैं। अगर ऐसा ही माता-पिता बच्चों के साथ बचपन से करें तो, बच्चों का रूझान भी खेलों की ओर जाएगा। बच्चे अलग-अलग खेलों के नियम को समझ पाएंगे, खेल देख कर और खिलाड़ियों के प्रति चाहत रख कर खुद को मोटिवेट कर पाएंगे।
आज कल हर स्कूल में स्पोर्ट्स टीम होती है। आप अपने बच्चों को इन टीम का हिस्सा बनने को प्रेरित करें और उन्हें खेलों में भाग लेने के लिए कहें। साथ ही अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा किसी खेल में बहुत ज्यादा अच्छा है तो बच्चे को उस खेल की अलग से ट्रेनिंग करवाएं।
पढ़ाई के बीच माता-पिता अपने बच्चों को अक्सर State level और National level पर जा कर खेलने से रोकते हैं। जब कि ये उन्हें खेलों में बहुत आगे ले जा सकता है। क्योंकि, स्कूल लेवल पर, स्टेट लेवल और नेशनल लेवल पर खेलना बच्चों को अलग से प्रेरित करता है और उन्हें इससे अपने भविष्य के लिए एक राह मिल सकती है।