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प्रीमैच्योर बेबी (Premature Baby) वो होते हैं जो डिलीवरी टाइम से पहले पैदा हो जाते हैं। ऐसे बच्चों की खास देखभाल करने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि ये बच्चे प्रीमैच्योर हैं इसलिए यह शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर भी हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर ऐसे बच्चों के पेरेंट्स को बच्चे की देखभाल और स्पेशल केयर करने की सलाह देते हैं। जैसे कि ऐसे बच्चों को जन्म के तुरंत बाद मां का दूध पिलाना चाहिए या नहीं, गोद में लेना चाहिए या नहीं और इन्हें छूने संबंधी जैसी कई सलाह दी जाती है। बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर (Bollywood Director Karan Johar) के दोनों बच्चे भी प्रीमैच्योर (Premature Baby) हैं। ऐसे बच्चों को अक्सर पैरेंट्स को सौंपने से पहले एनआईसीयू में रखा जाता है ताकि इनका स्वास्थ्य बेहतर हो सके।
प्रीमैच्योर बच्चे किसी के भी हो सकते हैं। बॉलीवुड डायरेक्टर करण जौहर के जुड़वा बच्चे रूही और यश का जन्म डिलीवरी टाइम से दो महीने पहले हो गए था। एक वेबसाइट के अनुसार करण जौहर अपने बच्चों की प्रीमैच्योर डिलीवरी देखकर काफी डरे हुए थे। क्योंकि उनका जन्म के समय उनका वजन काफी कम था और उन्हें एनआईसीयू में रखा गया था। हालांकि सही देखभाल और निगरानी के चलते आज उनके दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और नॉर्मल हैं।
आमतौर पर प्रीमैच्योर बच्चों के सभी अंग विकसित नहीं होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम भी काफी कमजोर होता है। समय से पहले जन्में नवजात शिशुओं की देखभाल में जरा सी भी लापरवाही बरतना, उनकी जान के लिए खतरनाक हो सकता है। वो इतने नाजुक, कमजोर होते हैं, यहां तक कि उनके अंग भी ठीक तरह से डेवलप नहीं होते हैं। ऐसे में उन्हें समय समय पर डॉक्टर की देखभाल में रखना जरूरी होता है। प्रीटर्म बेबी कई दिनों तक हॉस्पिटल में डॉक्टर की निरीक्षण में रहते हैं। घर आने के बाद भी ऐसे बच्चे की देखभाल काफी सावधानी और साफ-सफाई का ध्यान में रखते हुए ही करना चाहिए।
1. पेडीट्रीशियन की बातों को न करें इग्नोर- प्रीमैच्योर बच्चों को लेकर पेरेंट्स को बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। सभी पेरेंट्स को अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों की बातों को न सुनकर सिर्फ वही करना चाहिए जो उनके डॉक्टर ने उनसे कहा है। यह ध्यान में रखना ज़रूरी है की डॉक्टर हमें और लोगों की तुलना में सही सलाह देते हैं।
2. पोषण की न होने दें कमी- छोटे बच्चों के लिए माँ का दूध ही सबसे ज़रूरी पोषक तत्व होते हैं चाहे वे प्री मैच्योर बेबी ही क्यों न हो। अगर आपका शिशु आपके स्तन से दूध नही पी रहा है तो अपना दूध निकालकर किसी और तरीके से उसे पिलाने की कोशिश करें । अगर आप कामकाजी महिला हैं और आप लम्बे समय तक अपने बच्चे से दूर रहना पड़ रहा है तो आप अपने दूध को अच्छे से स्टोर करके रख लें जिससे उसे समय पर दूध मिलता रहे।अपने दूध के अलावा उसे किसी भी अन्य प्रकार का (गाय या भैंस का दूध) दूध न दें।
3. संक्रमण से बचाएं- प्री मैच्योर बेबी को इन्फेक्शन से बचाना ही सबसे ज्यादा ज़रूरी होता है। शरीर की इम्युनिटी, प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनों में ही बनती है और जब ये बच्चे ठीक से अपना वो चक्र पूरा नही कर पाते है तो इनकी इम्युनिटी बहुत कमजोर हो जाती है। प्रीमैच्योर बेबी को घर लाने के बाद आप ज्यादा बाहरी लोगों को घर में न आने दें इससे संक्रमण का खतरा रहता है।
4. नियमित चेकअप कराते रहें- प्रीमैच्योर बेबी को आँखों और श्वसन संबंधी कई तरह की बीमारियाँ जल्दी हो जाती हैं। इसलिए इन बच्चों का नियमित चेकअप करवाती रहें। डॉ नानावटी बताती हैं कि ये बच्चे बिना पूर्ण विकसित हुए ही समय से पहले पैदा हो गये हैं इसलिए इनके पूर्ण विकास के लिए उतना समय चाहिये। नियमित चेकअप से डॉ. ये पता करते रहते हैं कि बच्चे का विकास सही तरीके से हो रहा है की नही।
5. हर एक्टिविटी पर रखें नजर- चूंकि ये बच्चे पूरी तरह से गर्भ में विकसित नहीं हुए होते हैं इसलिए इनमे कुछ बीमारियों के होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। इसलिए जैसे ही आपको कोई लक्षण दिखाई दें तुरंत डॉक्टर के पास जायें।