
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 1, 2022 10:09 PM IST
Tips for parenting of teenage kids: बचपन से लाड़-प्यार में पलने वाले बच्चे एक उम्र के बाद अचानक से बदल जाते हैं और उनकी प्यारी शरारतें गुस्से और बहस में बदल जाती है। बच्चों को अचानक मां-बाप के साथ रहना पसंद नहीं आता, मां-बाप द्वारा सवाल पूछने या कुछ राय-सलाह देने पर भी ये बच्चे गुस्सा करने लगते हैं। 12-13 साल की यहउम्र के बाद यानि टीनएज में बच्चों के व्यवहार में यह बदलाव देखने को मिलते हैं। दरअसल, इस उम्र में बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास तेजी से होता है। साथ ही बच्चे खुद को थोड़ा अधिक समझदार मानने लगते हैं जिसकी वजह से उन्हें अपने मां-बाप की बातें कम अच्छी लगने लगती हैं। कई बार बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता उन्हें बिल्कुल नहीं समझते और इसी वजह से उनका अपने माता-पिता से बार-बार झगड़ा हो जाता है।
बच्चों के व्यवहार में बदलाव और बार-बार होनेवाली बहस के कारण मां-बाप कई बार समझ नहीं पाते कि बच्चे को आखिर समझाएं कैसे। सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि घर और बाहर बच्चा बहुत-सी चीजों को देख रहा है और उनसे बहुत कुछ सीख रहा है। इसके साथ ही उसका मानसिक विकास भी बहुत तेजी से हो रहा है। ऐसे में उसे समझें और उसके उम्र को भी। इसके अलावा इन कुछ टिप्स को भी फॉलो कर सकते हैं। जिसकी मदद से आपको टीनएज बच्चों की पेरेंटिंग में मदद होगी। (Tips for parenting of teenage kids in Hindi)

बच्चा अब बच्चा नहीं एक पर्सनैलिटी है
मां-बाप बच्चों को हमेशा छोटा समझकर उन्हें राय-सलाह देने की कोशिश करते हैं। लेकिन, जब बच्चे बड़े हो रहे हों तो उनके व्यवहार को समझने के साथ-साथ यह भी स्वीकार करें कि उसका एक अलग व्यक्तित्व या पर्सनैलिटी बन रही है, जिसके अपने कुछ पहलू और विशेषताएं हैं। बच्चे की यही पर्सनैलिटी उसके साथ हमेशा रहने वाली है इसीलिए, आप चाहते हुए भी उसके व्यवहार को कंट्रोल नहीं कर सकते। पर हां, उसके व्यवहार और पर्सनैलिटी को निखारने का काम जरूर कर सकते हैं। (how to positively raise a teenage kid )
अक्सर, टीनएज बच्चों के मां-बाप को जो समस्या सबसे अधिक आती है वह है बच्चों की फीलिंग्स को समझना। बच्चे कुछ और कहते हैं पर मां-बाप उसका कुछ और अर्थ निकाल लेते हैं। ऐसे में मां-बाप को बच्चे की फीलिंग्स को समझने के लिए थोड़ी अधिक मेहनत करने की जरूरत पड़ सकती है। बच्चे के व्यवहार को समझें कि वह जो कह रहा है उसके माध्यम से वह आपको क्या समझाना चाहते हैं। बच्चे की फीलिंग्स को समझें और उसे स्वीकार करें।
कई बार मां-बाप बच्चे के मुंह से कोई बात सुनकर अपना आपा खो देते हैं या जब बच्चा उनकी बात नहीं मानता तो समझ नहीं पाते कि बच्चे को कैसे मनाएं। अगर ऐसी स्थिति आती है तो बातचीत को थोड़ी देर के लिए टाल दें, ना कि बच्चे को डांटने, धिक्कारने या उससे जबरन अपनी बात मनवाने की कोशिश करें। चर्चा को बहस में बदलने से रोकें और थोड़ी देर बार उससे बात करें। बेहतर यह भी हो सकता है कि इस बात की प्लानिंग पहले ही बना लें कि जब बच्चा आपकी बात पर सहमत होगा तो आप क्या कहेंगे और जब असमहत होगा तब क्या कहेंगे। इससे आपके लिए भी स्थिति क संभाल पाना काफी आसान हो जाएगा। (how to handle children in teenage)