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Picky eating in kids hindi : कई माता-पिता इस बात से परेशान रहते हैं कि उनका बच्चा ठीक से खाना नहीं खाता या सिर्फ अपनी पसंद की कुछ ही चीजें खाना चाहता है। बच्चों की खाने की इस आदत को पिकी ईटर कहा जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बच्चों का पिकी ईटिंग (picky eating) व्यवहार काफी आम होता है। यह उनके विकास का एक सामान्य हिस्सा हो सकता है, न कि उनकी कोई गंभीर समस्या। मुंबई स्थित नारायणा हेल्थ SRCC चिल्ड्रन हॉस्पिटल की क्लिनिकल न्यूट्रिशन और डाइटीटिक्स, एमएस दिव्या आचरेकर के अनुसार, बच्चों में खाने को लेकर नखरे कई कारणों की वजह से हो सकते हैं। छोटे बच्चों में सेंसरी सेंसिटिविटी अधिक होती है, यानी वे खाने के टेक्सचर, स्वाद और गंध के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसी वजह से वे नई चीजें खाने से बचते हैं और सिर्फ परिचित फूड्स को ही पसंद करते हैं। इसके अलावा, जैसे-जैसे बच्चों की ग्रोथ धीमी होती है, उनकी भूख भी कम हो सकती है। इससे वे कम खाना चाहते हैं या बार-बार खाने से मना करते हैं। यह स्थिति माता-पिता के लिए चिंता का कारण बन जाती है, लेकिन यह एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है। अपने बच्चों को पिकी ईटर बनने से रोकने के लिए आप कुछ टिप्स को आजमा सकते हैं, जैसे-
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा खाना खाए, तो सबसे पहले उन्हें सबके साथ खिलाने की आदत डालें। बता दें कि घर का माहौल और खाने से जुड़ी आदतें भी इस व्यवहार को प्रभावित करती हैं। जब आप बच्चे को अकेले खाने के लिए जबरदस्ती करते हैं या फिर आप खुद सही से डाइट नहीं ले रहे हैं, तो ऐसे में बच्चा भी खाने से दूर भागता है।
अक्सर आपने माता-पिता को देखा होगा कि वे अपने बच्चों को मोबाइल/टीवी देखते हुए खिलाते हैं। इस तरह का व्यवहार आगे चलकर उन्हें पिकी ईटर बना सकता है। वे आगे सिर्फ फोन देखकर ही खाते हैं। इसलिए शुरू से ही उन्हें बिना फोन के खाने की आदत डालें, ताकि वे खाने के टेस्ट और टेक्चर को समझें और उनका टेस्ट डेबलेप हो सके।
बार-बार स्नैकिंग (snacking) भी बच्चों के नैचुरल हंगर सिग्नल को बिगाड़ देती है, जिससे वे मेन फूड के समय नहीं खाते हैं। क्योंकि बार-बार स्नैकिंग के कारण उन्हें खाने के समय भूख नहीं लगती है। कोशिश करें कि बच्चों के खाने का एक समय तय करें, ताकि उन्हें भूख लगे और जब आप उन्हें मेन फूड दे तो वे रुचि लेकर खाएं।
पिकी ईटर बच्चों के माता-पिता को धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। सबसे जरूरी है कि बच्चे को बिना दबाव के खाना खाने के लिए प्रेरित किया जाए। नए खाने को बार-बार छोटे-छोटे हिस्सों में पेश करें, लेकिन उसे खाने के लिए मजबूर न करें। समय के साथ बच्चा धीरे-धीरे उसे स्वीकार करने लगेगा।
आप नए खाने को बच्चे के पसंदीदा खाने के साथ मिलाकर भी दे सकते हैं, जिससे उसे अपनाने में आसानी होती है। इसके अलावा, परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की आदत डालें। जब बच्चा दूसरों को वही खाना खाते देखता है, तो उसकी रुचि भी बढ़ती है।
बच्चों को खाना बनाने की प्रक्रिया में शामिल करना भी एक अच्छा तरीका है। जब वे खुद खाना बनाने या तैयार करने में हिस्सा लेते हैं, तो उनके अंदर उसे खाने की इच्छा बढ़ती है। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और वे नई चीजें ट्राय करने के लिए तैयार होते हैं।
आखिरी में डॉक्टर कहते हैं कि अगर बच्चा बहुत कम खाता है, उसका वजन नहीं बढ़ रहा है, या उसके खाने की वैरायटी बहुत सीमित है, तो ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। यह किसी पोषण की कमी का संकेत भी हो सकता है। अंत में, यह समझना जरूरी है कि पिकी ईटिंग एक अस्थायी चरण होता है। सही माहौल, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आप अपने बच्चे की खाने की आदतों में सुधार ला सकते हैं और उसे हेल्दी फूड की ओर प्रेरित कर सकते हैं।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।