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Written By: Yogita Yadav | Published : February 26, 2019 6:57 PM IST
अनजाने ही वे ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिससे बच्चे कॉन्फीडेंट होने की बजाए डिपेंडेंट और दब्बू बनते जाते हैं। ©Shutterstock.
सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे स्मार्ट और कॉन्फीडेंट हों। पर अनजाने ही वे ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिससे बच्चे कॉन्फीडेंट होने की बजाए डिपेंडेंट और दब्बू बनते जाते हैं। अगर आप भी ऐसा ही कुछ महसूस कर रहे हैं तो अपने व्यवहार और घर के माहौल में ये जरूरी बदलाव करें।
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सकारात्मक सोचें – बच्चों को कॉन्फीडेंट बनाने के लिए जरूरी है कि पहले आप खुद को सकारात्मक बनाएं। इस पॉजिटिव सेंस को बच्चे में बचपन से ही डालना पड़ता है। बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए अक्सर उनकी छोटी उपलब्धियों के लिए भी उन्हें चीयर करते हैं जिससे की बच्चें में खुद के लिए सम्मान बढ़े।
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बच्चों के लिए सबकुछ न करें - यह समझना बेहद जरूरी है कि आप उनको आपना काम खुद करने दें। इससे वे इंडिपेंडेंट बनेंगे साथ ही साथ बच्चे में नई स्किल भी डिवेलप होगी। आप बच्चे को मील के लिए डाइनिंग टेबल को सेट करना सिखा सकते हैं और उन्हें खुद से कपड़े पहनने के लिए भी कह सकते हैं। यह ध्यान रखें कि बच्चे को पैंपर करना और उनके लिए हर काम कर देने में काफी फर्क है।
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घर के काम में मदद लें – घर का काम सिर्फ नौकरों का ही नहीं, घर में रहने वाले हर व्यक्ति का दायित्व है। यह दायित्व बोध बच्चों में भी पैदा करें। इससे बच्चे की घर के प्रति जिम्मेदारियां बढ़ेंगी और बच्चा खुद को रिस्पॉन्सिबल महसूस करेगा। पैरंट्स के तौर पर आप अपने बच्चे से घर को साफ करना, खुद का बिस्तर सही करना और अपना ब्रेकफस्ट खुद से लेना सिखा सकते हैं।
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तुलना न करें - अगर आपका बच्चा आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है तो रिऐक्ट करने से पहले एक बार अच्छी तरह से सोच लें। अपने बच्चे को उनके क्लासमेट और फेलो फ्रेंड्स से तुलना करने से बच्चे हतोत्साहित या डीमोटिवेट होते हैं। इसलिए बच्चे की किसी से भी तुलना करने से बचें।
असफलताओं से उबरने में मदद करें - अक्सर बच्चे जब किसी चीज में हार जाते हैं या असफल हो जाते हैं तो पैरंट्स उनसे सख्ती से पेश आते हैं और उन्हें डांटते हैं, लेकिन बच्चे के दिमाग पर इसका गलत असर पड़ता है। एक्सपर्ट्स पैरंट्स को यह सुझाव देते हैं कि जब भी आपका बच्चा असफल हो तो उसे प्रोत्साहित करें और समझाएं कि कोई भी दुनिया में परफेक्ट नहीं है। इससे बच्चे में आत्म सम्मान की भावना बढ़ेगी।