
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : February 12, 2023 7:31 AM IST
Parents teacher meeting tips: बच्चे का बिहेवियर कैसा रहेगा यह कुछ हद तक पेरेंट्स की परवरिश पर निर्भर करता है। बच्च दिल के सच्चे होते हैं और वे जो देखते हैं वहीं चीज सीखते हैं। एक छोटा बच्चा सबसे ज्यादा समय अपने माता-पिता के साथ बिताता है और इसलिए उसे सबसे ज्यादा प्यार और इज्जर अपने माता-पिता के लिए ही होती है। लेकिन कई बार माता-पिता ही ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिसके कारण बच्चे के अंदर अपने पेरेंट्स के लिए नेगेटिविटी भर जाती है। अक्सर पेरेंट्स टीचर मीटिंग के दौरान पेरेंट्स टीचर के आगे कुछ ऐसी ही गलत चीजें बोल देते हैं, जिसका सीधा असर बच्चे के बिहेवियर पर पड़ता है। अगर आपका बच्चा भी स्कूल में पढ़ रहा है और आप अक्सर आप पेरेंट्स टीचर मीटिंग में जाते रहते हैं, तो आपको इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।
पेरेंट्स के अलावा एक टीचर ही होता है, जो बच्चे के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानता है। अगर ऐसे में अगर बच्चे में किसी प्रकार की कमी है, तो टीचर हमेशा उसे दूर करने की कोशिश करता है। लेकिन अगर माता-पिता बच्चे में फालतू की कमियां निकाल रहे हैं, तो ऐसे में टीचर के मन में बच्चे के प्रति गलत छवि बनने लगती है। बच्चे के मन पर भी इससे गहरा प्रभाव पड़ सकता है और कई बार पेरेंट्स के प्रति बच्चे में नेगेटिविटी भर जाती है।
टीचर को बच्चे की कमजोरियों का पता होना जरूरी है, ताकि वह उन्हें दूर करने में पेरेंट्स की मदद कर सके। लेकिन बच्चे की कुछ कमजोरियां ऐसी भी होती हैं, जिन्हें बच्चा सिर्फ अपने पेरेंट्स को ही शेयर करता है। अगर आप ऐसी ही पर्सनल कमजोरियां बच्चे के टीचर को बताते हैं, तो बच्चे को इससे काफी शर्मिंदगी महसूस हो सकती है। ऐसे में बच्चे के मन से विश्वास उठ सकता है।
कई माता-पिता अच्छा और सच्चा बनने के लिए बच्चे की गलियों को मजाक में लेकर टीचर को बताने लगते हैं। लेकिन वे कई बार यह महसूस नहीं कर पाते हैं कि बच्चा इन बातों से शर्मिंदगी महसूस कर रहा है। आपका ऐसा करना आपको अपने बच्चे के काफी दूर ले जा सकता है। इसलिए कभी भी बच्चे की बातों का मजाक बनाकर टीचर को नहीं बताना चाहिए।
पेरेंट्स टीचर मीटिंग के दौरान कई माता-पिता यह गलती करते हैं। वे बच्चे के बारे में सारी बातें सच बताने की बजाय बढ़ा-चढ़ा कर बताने लगते हैं। जरूरत से ज्यादा तारीफ होने पर बच्चे के अंदर ओवरकॉन्फिडेंस आ जाता है और उसे सच्चाई का सामना करना अच्छा नहीं लगता है। इसलिए बच्चे की तारीफ सिर्फ उतनी ही करें जितने के वह लायक है।
टीचर के सामने अपने बच्चे को अपने आस-पड़ोस में रहने वाले दूसरे बच्चों से कंपेयर करना बच्चे और पेरेंट्स के रिश्तों को कमजोर बना सकता है। बच्चे को लगने लगेगा कि उसके पेरेंट्स उस से प्यार नहीं करते हैं। ऐसा करने से बच्चे का पढ़ाई से मन भी उतर जाता है और वह टीचर के सामने शर्मिंदा हो जाता है।