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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST
मैं 30 वर्षीय महिला हूं। मैंने हाल ही में एक स्टोरी पढ़ी है जिसमें बताया गया है कि लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग कराने से बच्चों में कैंसर का खतरा कम हो सकता है। क्या यह सच है? एक नवजात को कब तक स्तनपान कराना चाहिए?
इस सवाल का जवाब लमेज चाइल्ड बर्थ एजुकेटर और मेडेला लैक्टेशन कंसल्टेंट्स क्लब की मेम्बर डॉक्टर रुचिका नागराथ दे रही हैं।
हां, यह सच है कि बोटल फीडिंग या फार्मूला मिल्क की तुलना में ब्रेस्टफीडिंग के ज्यादा फायदे होते हैं। कई अध्ययनों में इस बात का दावा किया गया है कि ब्रेस्टफीडिंग से ना केवल बच्चे स्मार्ट और हेल्दी बनते हैं बल्कि इम्युनिटी सिस्टम भी मजबूत होता है जिस वजह से उन्हें विभिन्न स्वास्थ्य समस्यायों का खतरा कम होता है। और कैंसर भी उन्ही स्वास्थ्य जटिलताओं में से एक है।
जहां तक कैंसर का खतरा कम होने की बात है, जो बच्चे कम से कम छह महीनों तक ब्रेस्टफीडिंग करते हैं उन्हें ब्रेस्टफीडिंग नहीं करने वाले बच्चों की तुलना में ल्यूकेमिया और लिम्फोमा का जोखिम कम होता है। ऐसा इसलिए होया है क्योंकि ब्रेस्ट मिल्क में इम्युनिटी को बढ़ावा देने वाले और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जिनसे कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व ना केवल फ्री रैडिकल के खिलाफ लड़ते हैं बल्कि इन्फेक्शन के खतरे को भी कम करते हैं।
इसके अलावा वैज्ञानिक अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि स्तनपान करने वाले बच्चों में नैचुरल किलर सेल्स भी ज्यादा होती हैं। ये एक प्रकार की इम्यून सेल्स हैं, जो कैंसर सेल्स पर हमला करती हैं और उन्हें नष्ट करती हैं। फार्मूला मिल्क पीने वाले बच्चे इस लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा ब्रेस्ट मिल्क में स्टेम सेल्स होती हैं। जिनमें बॉडी में हेल्दी सेल्स में ट्रांसफॉर्म होने की क्षमता होती है जिस वजह से बच्चे के समग्र विकास में मदद मिलती है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock