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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST
अगर ब्रेस्टफीडिंग करानेवाली किसी महिला को ब्रेस्ट कैंसर है तो क्या बच्चे को दूध पिलाने से उसे भी कैंसर हो सकता है? बच्चे को कितना ख़तरा है? ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए? क्या मां को ब्रेस्टफीडिंग बंद कर देनी चाहिए?
लेमेज चाइल्ड बर्थ एज्यूकेटर और मेडेला लैक्टेशन कंसल्टेंट क्लब की सदस्य डॉ. रुचिका नागराथ दे रही हैं इस सवाल का जवाब।
नहीं, ब्रेस्टफीड करानेवाली मां को अगर ब्रेस्ट कैंसर है तो दूध के ज़रिए बच्चे तक कैंसर नहीं पहुंचेगा। ब्रेस्ट कैंसर किसी भी महिला को हो सकता है और हालिया आंकड़ों पर नज़र डालें तो बहुत कम उम्र की महिलाओं को भी ब्रेस्ट कैंसर होने का ख़तरा होता है। ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने का एकमात्र तरीका है मैमोग्राफी और कुछ टेस्ट। जो इस बीमारी की गंभीरता समझने में सहायता करते हैं। यही नहीं ब्रेस्ट में गांठ या ब्रेस्ट के आकार में बदलाव जैसे कारण भी ब्रेस्ट कैंसर का संकेत हो सकते हैं। इसीलिए अगर आपको ज़रा-सा भी शक है तो डॉक्टर से बात करें और ब्रेस्ट कैंसर की जांच कराएं।
अगर आपको पता चलता है कि आपको ब्रेस्ट कैंसर है तो हो सकता है कि उसके इलाज की वजह से आपको बच्चे की देखरेख करने में परेशानियां हों। हालांकि रेडिएशन थेरेपी करानेवाली महिलाएं बच्चे की देखरेख कर सकती हैं। लेकिन रेडिएशन ब्रेस्ट और उसके आसपास के ग्लैंड्स को नष्ट कर सकता है। जिसकी वजह से प्रभावित ब्रेस्ट में बननेवाले दूध की मात्रा में बदलाव आ सकते हैं। ऐसी स्थितियों में आप दूसरे ब्रेस्ट (ब्रेस्ट कैंसर से जो प्रभावित न हो) से बच्चे को दूध पिला सकती हैं।
अगर आप किमोथेरेपी ( chemotherapy or radioactive isotope therapy) कराती हैं तो बेहतर होगा कि आप बच्चे को दूध न पिलाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि दवा में मौजूद सक्रिय तत्व या रेडियोएक्टिव आइसोटोप्स (radioactive isotopes) दूध के साथ आपके बच्चे तक पहुंच सकते हैं। इसलिए जब तक डॉक्टर न कहे कि आपके शरीर से दवाइयां और रेडियोएक्टिव तत्व (radioactive elements) पूरी तरह निष्कासित हो चुके हैं। तब तक बच्चे को दूध न पिलाएं। लेकिन हां, इलाज के दौरान आप ब्रेस्ट पम्प की मदद से दूध निकालकर उसे फेंकती रहें ताकि दूध बनता रहे और जब आपको डॉक्टर की तरफ से ब्रेस्टफीडिंग की अनुमति मिल जाए, तो आपके बच्चे के लिए दूध कम न हो।
अगर आपकी मैस्टेक्टमी (mastectomy or lumpectomy) हुई है। जिसमें ब्रेस्ट टिश्यूज़ को ऑपरेशन के ज़रिए निकाला जाता है। तो लाज़मी है कि इससे आपके ब्रेस्ट में बननेवाले दूध की मात्रा पर असर पड़ेगा। इसलिए बच्चे को दूध पिलाने से पहले बेहतर यही होगा कि आप जल्द से जल्द किसी डॉक्टर से सम्पर्क करें। ताकि आपकी समस्या का सही कारण और इलाज पता किया जा सके। आप जांच में जितनी देर करेंगे उतनी अधिक मुश्किलें आएंगी। बच्चे को दूध पिलाने या उसकी देखरेख के लालच में, सर्जरी या ट्रीटमेंट शुरु करने में देर न करें। क्योंकि इससे स्थिति गंभीर बन सकती है।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Shutterstock