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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:57 PM IST
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आप अपने शिशु के जन्म की खुशियां ठीक से भी नहीं मना पाए हों और अभी तक उसे संभालने का सही तरीका सीख रहे हों, ऐसे में आपका ध्यान उसकी पीली पड़ती त्वचा पर जाए तो निस्संदेह आप परेशान हो जाएंगे। पीली होती त्वचा पीलिया यानी जॉइंडिस रोग का लक्षण होता है। पैदाइश के बाद के शुरूआती दिनों में आपके नन्हें मुन्ने को पीलिया हो जाने की काफी आशंका रहती है। लेकिन इस तरह से जो पीलियो होता है उसका मतलब ये नहीं होता कि आपके बच्चे का लीवर फेल हो चुका है।
छोटे बच्चों को पीलिया तब बोता है जब उनका लीवर खून में जमा हुए सारे बिलिरुबिन (bilirubin) से छुटकारा नहीं पा पाता। बिलिरुबिन एक पीले रंग का पदार्थ होता है जो हीमोग्लोबिन के टूटने से उत्पन्न होता है। जब पुराने ब्लड सेल नए में परिवर्तित होते हैं तो ये फिज़ियोलॉजिकल प्रॉसेस होता है।
जिन नवजात शिशुओं को पीलिया हो जाए उनके लिए सबसे अच्छा उपचार है कि उन्हें सूरज की रोशनी यानी धूप दिखाएं। (इसे भी पढ़ें, क्या शिशु के लिए भी ज़रूरी है सनस्क्रीन?) धूप में रहने से सूरज की रोशनी बच्चे के शरीर में बिलिरूबिन को तोड़ देती है, और वो यूरीन के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है। अपने बच्चे को गोद में या प्रैम में लिटाकर एक घंटे दूध में रहें। लगभग 10 दिनों में जब आपके बच्चे का लीवर विकसित हो जाएगा तो ये कार्य नैचुरली होने लगेगा। लेकिन तब तक बच्चे को ये सनलाइट थैरेपी देते रहें। इससे न सिर्फ पीलिया की शिकायत दूर होगी बल्कि उसे विटामिन डी भी मिलेगा।
मूल स्रोत - Baby care tip #9 – Treat neonatal jaundice with sunlight therapy
अनुवादक – Shabnam Khan
चित्र स्रोत – Getty Images
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