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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:57 PM IST
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जिन बच्चों का जन्म गर्भ में बिना 36 हफ़्तों के पूरा किये ही हो जाता है या जो समय से पहले ही जन्म ले लेते हैं ऐसे बच्चों को प्रीमैच्योर बेबी कहा जाता है। उनके सारे अंग पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुए होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम भी काफी कमजोर होता है जिससे उनके जल्दी संक्रमित होने का खतरा रहता है इसीलिए इन बच्चों का दुसरे सामान्य बच्चों की तुलना में ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। हॉस्पिटल में रहते समय ये अविकसित बच्चे पूरी तरह से डॉक्टर्स के देखरेख में रहते हैं लेकिन जब आप बच्चे को हॉस्पिटल से घर लेकर आते हैं जब आपकी जिम्मेदारियां काफी बढ़ जाती हैं। आइये जानते हैं कि, प्रीमैच्योर बेबी को घर में रखते समय क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
सिर्फ अपने पेडीट्रीशियन की ही सुने : कंसलटेंट नेनाटोलोजिस्ट और पेडीट्रीशियन डॉ किशोर सांघवी कहती है कि, सभी पेरेंट्स को अपने पड़ोसियों और रिश्तेदारों की बातों को न सुनकर सिर्फ वही करना चाहिए जो उनके डॉक्टर ने उनसे कहा है। यह ध्यान में रखना ज़रूरी है की डॉक्टर हमें और लोगों की तुलना में सही सलाह देते हैं।
बेबी को पर्याप्त मात्रा में नुट्रीशन दें : छोटे बच्चों के लिए माँ का दूध ही सबसे ज़रूरी पोषक तत्व होते हैं चाहे वे प्री मैच्योर बेबी ही क्यों न हो। अगर आपका शिशु आपके स्तन से दूध नही पी रहा है तो अपना दूध निकालकर किसी और तरीके से उसे पिलाने की कोशिश करें । अगर आप कामकाजी महिला हैं और आप लम्बे समय तक अपने बच्चे से दूर रहना पड़ रहा है तो आप अपने दूध को अच्छे से स्टोर करके रख लें जिससे उसे समय पर दूध मिलता रहे।अपने दूध के अलावा उसे किसी भी अन्य प्रकार का (गाय या भैंस का दूध ) दूध न दें।
इन्फेक्शन से बचाएँ : प्री मैच्योर बेबी को इन्फेक्शन से बचाना ही सबसे ज्यादा ज़रूरी होता है। शरीर की इम्युनिटी,प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनों में ही बनती है और जब ये बच्चे ठीक से अपना वो चक्र पूरा नही कर पाते है तो इनकी इम्युनिटी बहुत कमजोर हो जाती है। नेयोनेटिव इंटेंसिव केयर यूनिट की प्रोफेसर एंड हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट ऑफ़ नेनोटोलोजी डॉ रूचि नानावटी कहती हैं कि, बेबी को घर लाने के बाद आप ज्यादा बाहरी लोगों को घर में न आने दें इससे संक्रमण का खतरा रहता है।
शिशु को गर्म रखें : डॉ नानावटी बताती हैं कि छोटे बच्चे अपनी माँ के पास सबसे सही और सुरक्षित महसूस करते हैं। माँ को कंगारू केयर का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे बच्चा हमेशा माँ के स्तनों के बीच में रहता है। इससे बच्चा हमेशा अपनी माँ की धड़कनों को सुन सकता है और यह बच्चे को हमेशा गर्म भी रखता है जिससे वह खुद को सुरक्षित महसूस करता है और यह उसके विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।
आयुष (AYUSH)दवाओं का इस्तेमाल न करें : ए वाई यू एस एच (आयुर्वेद ,योग एंड नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध और होमियोपैथी ) डॉ सांघवी ऐसी किसी भी पद्धति की दवाइयों के इस्तेमाल को मना करते हैं । वह बताते हैं की अभी तक इसका कोई प्रमाण तो नही है की ये दवाइयां हानिकारक है लेकिन इस बात के भी कोई सबूत नहीं है की ये दवाइयाँ फायदेमंद साबित होती हैं।
नियमित चेकअप कराते रहें : प्रीमैच्योर बेबी को आँखों और श्वसन संबंधी कई तरह की बीमारियाँ जल्दी हो जाती हैं। इसलिए इन बच्चों का नियमित चेकअप करवाती रहें। डॉ नानावटी बताती हैं कि ये बच्चे बिना पूर्ण विकसित हुए ही समय से पहले पैदा हो गये हैं इसलिए इनके पूर्ण विकास के लिए उतना समय चाहिये। नियमित चेकअप से डॉ. ये पता करते रहते हैं कि बच्चे का विकास सही तरीके से हो रहा है की नही।
खतरे के लक्षणों को देखते रहें : चूंकि ये बच्चे पूरी तरह से गर्भ में विकसित नहीं हुए होते हैं इसलिए इनमे कुछ बीमारियों के होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। इसलिए जैसे ही आपको कोई लक्षण दिखाई दें तुरंत डॉक्टर के पास जायें। इस सीक्वेंस ए बी सी डी डी एच (ABCDDH)को याद रखें । ए – एपनिया, बी – ब्रीथिंग, सी - कोल्ड हाथ और पैर, डी- डिक्रीज्ड़ फीड, डी – डिक्रीज्ड़ एक्टिविटी, एच- हाइपरथरमिया/हाइोपथरमिया। अगर आपके बच्चे में से इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखायें।
बच्चे के साथ समय बितायें : माँ को अपने प्रीमैच्योर बेबी के साथ अधिक से अधिक समय बिताना बहुत ज़रूरी होता है। इससे बच्चा न सिर्फ गर्म और सुरक्षित रहता है बल्कि माँ बेटे के बीच के संबंध भी अच्छे हो जाते हैं।
मूल स्रोत - How to take care of your premature baby at home
अनुवादक – Anoop Singh
चित्र स्रोत - Shutterstock
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