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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:57 PM IST
जब आपका बच्चा परीक्षाफल में आए परिणाम को लेकर तनाव में होता है तब न चाहते हुए भी आपका दिल बेचैन हो जाता है। रिज़ल्ट निकलने के पहले आप सब लोग मिलकर बड़े-बड़े प्लान बनाते हैं, नए कॉलेज का, जिंदगी के नए फैसलों का, कहीं बाहर जाने का, लेकिन सब परिक्षाफल निकलने के बाद बेकार हो जाता है।
जो सपने माता-पिता अपने बच्चे के दिखाते हैं उसके टूटने का आभास बच्चे के दिल को तोड़ने लगता है। यहाँ तक कि परिवेश और रिश्तेदारों की बातें भी उनको इतनी शर्मिंदगी का एहसास कराने लगते हैं कि वे खुद को असहाय जैसा महसूस करने लगते हैं। सबसे दुख की बात यह है कि आप उनके इस बात का एहसास सही तरह से कर नहीं पाते हैं।
आपको कब चिंता करने की ज़रूरत होती है?
अगर आपका बच्चा किशोरावस्था में है तो वह सही तरह से अपनी बात को आप तक पहुँचा नहीं पाते हैं। इसलिए आपको उनके आदतों पर ध्यान देना होगा और उनकी परेशानी को समझना होगा। कभी-कभी उन्हें खुद को सँभलने का मौका देना चाहिए। इसके अलावा भी आपकी मदद की ज़रूरत है, अगर वे इन परिस्थियों में हैं तो-
• आपका खुशमिजाज बच्चा उदास है
• वह अपने दोस्तों से कम मिलता है और उनसे बचने की कोशिश करता है
• पुराने किताब फाड़ना, सर पीटना आदि हरकते कर रहा है
• परिवार के बड़े और छोटों पर बार-बार गुस्सा निकाल रहा है
• टी.वी. देखना, आई पैड पर खेलना आदि पसंदीदा आदतों को वह नापसंद कर रहा है
• कम भूख और अनिद्राकी समस्या हो रही है
जब आपका बच्चा तनाव में होता है तब क्या होता है?
तनाव के कारण कोरटीसॉल (cortisol) नाम का हार्मोन शरीर से निकलता है जिसके कारण वे अत्यधिक मात्रा में खाने लगते हैं, बेकार बैठे रहते हैं, और बार-बार उनका मूड बदलता रहता है। इसका आपके बच्चे के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। अगर आपको यह लक्षण एक हफ़्ते से ज़्यादा दिनों तक दिख रहे हैं तो तुरन्त सचेत होने की ज़रूरत है।
आपको क्या करना चाहिए?
तनाव से बाहर निकालने के लिए अपने बच्चे का साथ देना चाहिए और उन्हें पहले के अवस्था में लौटाने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन सबसे पहले आपको इस परिस्थति को दिल से मान लेना पड़ेगा तभी आप उसकी मदद कर पायेंगे। याद रहें जीवन के इस मोड़ पर मनोवैज्ञानिक तनाव उसके जीवनभर का संगी बन सकता है। इसलिए समय रहते संभलने की ज़रूरत है।
बात करने की कोशिश करें
पहले अपने बच्चे से बात करने की कोशिश करें कि कौन-सी बात उसको परेशान कर रहा है। अगर बात करके भी समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है तो प्रोफेशनल की सलाह लें।
आगे क्या करना है सोचें
आपको अपने बच्चे को पिछले साल पढ़ाई के दौरान कौन-कौन सी गलतियाँ की हैं उनको समझाना चाहिए। उसे अच्छे कोचिंग सेंटर में डालें या शिक्षक की व्यवस्था करें जो उसे पढाई में आई कमियों को दूर करने में मदद कर सकें।बार-बार परीक्षा में लो ग्रेड आने से उन पर सामाजिक दबाव पड़ता है उससे बाहर निकलने में उनकी मदद करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्हें इन सब भावनाओं के साथ अकेले छोड़ने की गलती न करें।
अच्छी नींद लाने में मदद करनी चाहिए
परीक्षा में खराब रिजल्ट आने के कारण आम तौर पर बच्चों की नींद उड़ जाती हैं। जिसके कारण उनका तनाव और अवसाद और बढ़ जाता है। इसलिए सोने से पहले उनके पास से लैपटॉप, आईपैड, आईफोन हटा दें।
तनाव को दूर करने वाला खाद्द पदार्थ
तनाव के दौरान अपने बच्चे को पिज़्ज़ा या आईसक्रीम खाने न दें क्योंकि ये तनाव को बढ़ाते हैं। हेल्दी खाना खाने से तनाव कम होता है, इसलिए घर पर टेस्टी खाना पकायें,जैसे- मैंगो एण्ड योगर्ट स्मूदी या तीन डोसा ट्राइ कर सकते हैं।
अपने घर को सजाकर रखें
आपके बच्चे के चारो तरफ सजा-सँवारकर रखें ताकि वे चिड़चिड़े न हो जाये। साफ-सुथरा परिवेश मन को शांत रखता है।
योग और ध्यान से तनाव कम होता है
योग द्वारा श्वास-प्रश्वास के सही तकनीक से तनाव कम होता है। शरीर में ऑक्सिजन के ज़्यादा आवागमन से मन रिफ्रेश महसूस करता है।
भविष्य के लिए तैयार हो
बच्चे को इस परिस्थिति से लड़ने के लिए तैयार करें। क्योंकि उन्हें अपने जुनियर के साथ फिर से पढ़ना पड़ेगा, पुराने दोस्तों को वह मिस करेगा, इस परिस्थिति से हफ़्तों उसे लड़ना पड़ेगा। इस परिस्थिति से निकलने में हर मोड़ पर उनका साथ देना होगा, जिंदगी के असलियत की पहचान करवानी पड़ेगी।
मूल स्रोत- Worried about your kid’s exam results? Here’s what to do
अनुवादक- Mousumi Dutta
चित्र स्रोत: Getty images
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