बनाना हो अगर बच्चे को क्रिएटिव तो होने दें उसे थोड़ा बोर!

कभी-कभी बच्चों को बोर होने देना उनके दिमागी विकास के लिहाज से मददगार है।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST

मैं हमेशा इसी चिंता में डूबी रहती हूं कि क्या मैं अपनी बच्ची के विकास के लिए पर्याप्त कोशिशें कर रही हूं। सोशल वेबसाइट्स पर ऑनलाइन रहनेवाली मम्मियों के ग्रुप में जब भी मैं किसी मां को उसके बच्चों को बिज़ी रखने और क्रिएटिव बनाने के सुझाव वगैरह पढ़ती हूं तो मेरी यह चिंता और भी बढ़ जाती है। क्या मैं उसे क्रिएटिव बना पा रही हूं? क्या मैं उसके टैलेंट को पहचानने या निखारने का काम कर पा रही हूं? कहीं उसका वक़्त तो खराब नहीं हो रहा! कहीं वो घर पर बोर तो नहीं हो रही है! ये 9 अच्छी आदतें बच्चों को ज़रूर सिखाएं।

आप अगर चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. शुचि दलवी की माने तो बच्चों को बोर होने देना उनके दिमागी विकास के लिहाज से मददगार है। जी हां, डॉ. शुचि कहती हैं कि, 'जहां गतिविधियां बच्चे के हुनर को निखारने और उसके दिमाग को कार्य करने के लिहाज से मददगार हैं। वहीं यह भी अच्छा होगा कि आप कभी-कभी अपने बच्चे को बोर भी होने दे। दरअसल अकेलेपन में बच्चा अपनी क्रिएटिवी का इस्तेमाल करता है।' एक वयस्क के तौर पर हम तकनीकी बातों की तरफ अधिक ध्यान देते हैं, यहां तक कि हम जब बच्चों के खेलने के लिए तकिए जोड़कर मकान बनाएंगे तो वह भी बहुत अच्छा होता है। लेकिन जो बात हम नज़रअंदाज़ कर जाते हैं वह है बच्चे की अपनी समझ और उसका इस कार्य में हिस्सा, और इसी की वजह से वह तकिए से बने मकान को भी बहुत अनोखी चीज़ मान बैठता है।

बच्चे आजकल बहुत ज़्यादा व्यस्त रहते हैं या यूं कहें कि व्यस्त रखे जाते हैं- कभी टीवी, लैपटॉप या मोबाइल, कभी वीडियो गेम या ऐसे खिलौने जिनमें बहुत-से निर्देश दिए जाते हैं या फिर माता-पिता उन्हें दिनभर सलाह देते रहते हैं कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इसलिए बच्चों को अपनी कल्पना या रचनात्मकता इस्तेमाल करने का अवसर ही नहीं मिलता। इसलिए ज़रूरी हो जाता है कि मां-बाप को आज बच्चों को व्यस्त रखने के लिए अपनी तरफ से कई एक्टिविटिज़ तय करनी होगी। लुकाछिपी जैसे पुराने खेल या किसी मशहूर सुपरहीरो या कहानियों के पात्रों का किरदार निभाने वाले खेल भी खेले जा सकते हैं। जहां किसी विशेष स्थिति में सबको क्या करना है इसके बारे में बच्चा बता सकता है। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा अकेला नहीं रह पाएगा, उसे खेल में किसी का साथ चाहिए तो इसका मतलब यही है कि आपने उसे कभी अकेले रहने नहीं दिया या उसे सिखाया नहीं कि वह अकेले रहकर अपनी कल्पनाओं करें। आपको ऐसी स्थितियों से बचने के लिए अपने बच्चे को हमेशा निर्देश देते रहने या उसे आपके हिसाब से काम नहीं कराना चाहिए। कभी-कभी बच्चे की मदद न करना या उसे अकेला छोड़ना भी सही होता है। इस तरह बच्चा अपने मनोरंजन के लिए अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल करेगा। बच्चे को कई बार ऐसे खेल खेलने देने चाहिए जहां वह किसी और की भूमिका में हों। जैसे आपकी बच्ची मम्मी की तरह अपनी गुड़िया को कहानी सुनाने या उसे खाना खिला सकती है। इसी तरह तकियों का हवाई जहाज या ट्रेन बनाकर वह पायलट या लोकोड्रायवर भी बन सकती है।

बच्चा जब बच्चे को आप अकेला छोड़ेंगे तो वह अपने खिलौनों के साथ या उनके बिना भी खुशी-खुशी खेलेगा। कई बार बच्चे ज़मीन पर लेटे-लेटे कविताएं या गाना गाने लगते हैं। मैंने भी यह चीज महसूस की है कि बच्चे को स्मार्ट बनाने के लिए मैं जो खेल उसे खेलने के लिए कहती हूं उनकी बजाय वह ज़्यादा एक्टिव और खुश तब होती है जब मैं उसे अकेले खेलने देती हूं।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock

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