... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST
मेरी बच्ची उम्र के एक ऐसे पड़ाव पर है जहां वह अपने आसपास की सभी चीज़ों को कौतूहल भरी नज़रों से देखती है। वह जो भी सुनती या देखती है उसके बारे में सवाल पूछती है। वह अब अपने और मेरे शरीर में जो अंतर है उसकी ओर ध्यान देने लगी है, और जैसा कि सभी छोटे बच्चे करते हैं तो वह भी मुझसे बहुत से ऐसे सवाल करती है जो शर्मिंदा या झिझकने पर मज़बूर कर दें।
जहां मैं उसके मन की बातें जानने की कोशिश करती हूं वहीं मुझे यह भी स्वीकार करना होगा कि जब वह सबके सामने या पार्क वगैरह में अपने शरीर के प्रायवेट पार्टस को छूने लगती है तो मुझे बहुत शर्मिंदगी होती है। मैं समझ सकती हूं कि 2-3 साल की उम्र के ज़्यादातर बच्चे ऐसा करते हैं। लेकिन मैं चाहती हूं कि वह अपने शरीर को अच्छी तरह समझ ले और ऐसी कोई हरकत न करे जिसकी वजह से उसे शर्मिंदगी हो।
मैंने चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट शुची दलवी से बात की जिनसे मैंने जानने की कोशिश की कि बच्चों की उनके शरीर के प्रति उत्सुकता को कैसे शांत किया जाए। शुची कहती हैं, “यह माता-पिता की ज़िम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों को उनके शरीर के बारे में सिखाएं। फिर चाहे प्रायवेट पार्टस की बात हो या आंखों की, उसे हर अंग के बारे में बताएं और बच्चे के सवालों का जवाब ईमानदारी और आश्वस्त करनेवाले तरीके से दें। इसी से जुड़ी कुछ टिप्स दीं डॉ. शुची ने जिनकी मदद से माता-पिता को अपने बच्चों से बातचीत में आसानी होगी।
• अपने बच्चे को झिड़के नहीं- सवाल पूछने में कोई ग़लती नहीं। बच्चे हर बात को लेकर जिज्ञासु होते हैं। विशेषकर बच्चा अपने और अपने माता-पिता के शरीर में अंतर को लेकर और उत्सुक होता है। वो इस बात की ओर भी बहुत जल्दी ध्यान देते हैं कि लड़के और लड़की के शरीर में काफी अंतर होता है। इसलिए जब आपका बच्चा आपसे अपने प्रायवेट अंगों के बारे में कोई सवाल पूछे तो उसे झिड़कने या डांटने की बजाय उसे समझाएं कि लड़की और लड़के में अंतर उनके प्रजनन अंगों की वजह से ही है। इसी तरह जिस अंग का जो नाम है वही बताएं। वैजाइना या पीनिस कहने से शर्माएं नहीं। शरीर के किसी अंग को शर्मिदगी का विषय बताना उसके दिमाग पर नकारात्मक असर डालेगा।
• अपने बच्चे का ध्यान बंटाना- अगर आप बाहर हैं, लोगों से घिरे हुए हैं और अगर आपका बच्चा उस समय कोई असहज होनेवाला सवाल पूछे तो उसका ध्यान बांटने की कोशिश करें। इसी तरह उसे यह भी समझाइए कि वह सवाल तभी पूछे जब कोई आसपास न हों या घर लौटने के बाद वह आपसे सवाल पूछ सकता है। उसका ध्यान हटाने की कोशिश में उसे शर्मिंदा न करें।
• बच्चे को सिखाएं- 2-3 साल की उम्र बच्चे को अच्छे और बुरे तरीके से लोगों द्वारा स्पर्श किए जाने के बारे में बताने का सबसे अच्छा समय है। जब वह अपने वैजाइना और ब्रेस्ट्स (लड़कों को पीनिस और निप्पल) को लेकर उत्सुक होने लगे तो उसे बताएं कि ये सेंसटिव एरिया हैं जिन्हें केवल मां-बाप या आया जैसे लोग ही छू सकते हैं। साथ ही यह भी बताएं कि अगर कोई अनजाना व्यक्ति उन जगहों पर हाथ लगाए तो क्या करना चाहिए।
• बाथरूम जाने के लिए कैसे पूछना है- अगर आप अपने बच्चे पॉटी ट्रेनिंग दे रही हैं और वह अभी बोल नहीं पाती। तो इस तरफ ध्यान दें कि वह कब अपने प्रायवेट पार्टस को हाथ लगाते हैं। ऐसा करने पर उनसे पूछे कि क्या वे बाथरूम जाने, शौच या पेशाब करना चाहते हैं। उसे यह बताएं कि जब उसे बाथरुम जाना हो तो किन शब्दों का प्रयोग कर आपको संकेत दे।
• अपने बच्चे से बात करना और उसे सिखाना काफी मुश्किलभरा काम हो सकता है। हमारे शरीर की बनावट औऱ प्रायवेट पार्टस के बारे में जानकारी बच्चों के लिए समझना काफी कठिन है इसलिए उन्हें समझ आनेवाले तरीके से बात करें।
Read this in English.
अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Shutterstock