अपने बच्चे को घर के छोटे-छोटे काम सिखाकर कैसे बनायेंगे जिम्मेदार!

बच्चे को ऐसी चीज़ें सिखाएं जो बड़े होने के बाद उसके काम आए सकें।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST

जब मेरी बेटी पैदा हुई थी तो मेरे पास ढेर सारा वक़्त होता था और उस खाली समय में मैं पैरेंटिंग पर आधारित ढेर सारी किताबें पढ़ती थी। इन किताबों से मुझे जो एक बात समझ में आयी वह यह है कि अपने बच्चे की राह आसान बनाने के बज़ाय आप उसे इतना मज़बूत बनायें कि वह हर मुश्किल राह पर चल सके। कितनी काम की है ना यह बात?

एक मां के तौर पर मैं अपने बच्चे को खुश रखने की पूरी कोशिश करती हूं। उसे एक बेफ़िक्र और खुश बचपन जीने में मदद कर रही हूं। तो साथ ही मैं यह भी समझती हूं कि घर से बाहर उसे लोगों के साथ किस तरह का व्यवहार करना चाहिए और किस तरह वहां उसे घरवालों से मिलनेवाली सेवा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। एक मां के तौर पर मेरी ज़िम्मेदारी बनती है कि मैं अपने बच्चे को ऐसी चीज़ें सिखाऊं जो बड़े होने के बाद उसके काम आए। ठीक उसी तरह जैसे आप अपने बच्चे को विनम्र रहना सिखाती हैं। वैसे ही आपको उसे चीज़ों को उनकी सही जगह पर रखने और फ्लश करने जैसे काम भी सिखाने चाहिए। यहां हम बता रहे हैं ऐसी ही आदतों के बारे में जो आपको अपने 2-5 साल के बच्चे को सिखानी चाहिए।

• खिलौनों के खेलने के बाद उसकी जगह पर रखना- अपने घर को साफ़ सुथरा और व्यवस्थित रखने के लिए आपको जो मंत्र अपनाने और अपने बच्चे को सिखाने की ज़रूरत है, वह है चीज़ों को उनके निश्चित स्थान पर रखना। जी हां, आप अपने बच्चे को उसकी किताबें और खिलौनों को सही जगह पर रखने में मदद करें। याद रखिए अगर वह खिलौने पसंद कर उनके साथ खेलने की समझ रखती है तो वह चीज़ों को उनकी जगह पर भी रख सकते है।

• गंदे कपड़े और जूते लॉन्ड्री बैग में रखना - आपका बच्चा खुद कपड़े पहनने के लिहाज से तो अभी छोटा होगा लेकिन वह गंदे कपड़ों और जूतों को अलग तो रख ही सकता है। मेरी दो साल की बेटी के पास अपनी एक छोटी-सी आलमारी है जहां से वह खुद के कपड़े और डायपर निकालकर लाती है। इस तरह से वह अपने लिए फैसले (कम से कम क्या पहनना है) लेने में सक्षम होगी। साथ ही चीज़ों को सही जगह पर रखने की अहमियत समझ पाएगी।

• बिस्तर लगाने में मदद- मुझे पता है कि कुछ लोग कहेंगे कि कैसे एक 3-4 साल का बच्चा कंबल और रज़ाइयां मोड़ने का काम कर सकता है! लेकिन वह चादर बिछाते समय उसका कोई एक कोना तो पकड़ ही सकता है, या फिर तकिए के गिलाफ या कवर आलमारी से लाने का काम तो कर ही सकता है, है ना? खुद मैंने अपनी बच्ची को हर बार चादर बदलते समय साथ रहने को कहा। वह चादर को किनारे से खींचने, उसे सीधा करने और तकियों को यहां से वहां रखने का काम खुश होकर करती है। मैं अक्सर इन कामों से पहले उससे पूछती हूं कि, ‘मम्मा की मदद कौन करेगा’? और वह झट से कहती है ‘मैं’।

• कचरे को डस्टबिन में डालना- अपने बच्चे को अच्छी आदतें सिखाएं और उसे फॉलो करने के लिए भी प्रोत्साहित करें। मेरी बच्ची जब 14 महीने की थी तभी से उसने चॉकलेट के रैपर, कागज़ के टुकड़े और फलों के छिलके जैसी चीज़ों को उठाकर कूड़ेदान की तरफ जाना सीख लिया। यह आदत सिखाना भी काफी आसान है जिसे आप खुद काम करते-करते उसे सीखा सकती हैं। इसके साथ ही आप अपने बच्चे को यह भी सिखाएं कि जब भी वह सड़क पर किसी को गंदगी करते देखे तो उसे ज़रूर टोके।

• पौधों को पानी देना-आपके नन्हें-मुन्ने बच्चे को प्रकृति से जोड़ने का यह एक बेहतर तरीका हो सकता है। आप उसे पौधों को पानी देना सिखाएं। यह काम आसान तो है ही साथ ही बच्चे को इस काम में मज़ा भी आएगा।

• धूल झाड़ना- भला धूल झाड़ना किस बच्चे को पसंद नहीं आता? आप अपने बच्चे को मस्ती करने से रोकने के लिए यह काम दीजिए और देखिए किस तरह खुश होकर वह सफाई में आपकी थोड़ी-सी मदद कर देगा।

• गीले कपड़े से चीज़ों की सफाई- मेरी बच्ची को प्लास्टिक स्प्रे बॉटल में पानी भरकर चीज़ों पर पानी छिड़कना बहुत पसंद है। वह स्प्रे बॉटल के साथ खेलती भी है और स्प्रे के बाद कपड़े से पानी को पोंछती है। तो अब आप समझी कि मैं क्या कहना चाहती हूं? कांच के टेबलटॉप पर लगे वो चॉकलेट के दाग आपका बच्चा स्प्रे बॉटल या गीले कपड़े के साथ खुद साफ कर सकता है।

अपने बच्चे की हरकतों पर ध्यान दें। उसे क्या पसंद है, वह आपके किस काम में रुचि लेता है उससे खुद पूछिए। दूसरी बात, बच्चे को काम सिखाने का मतलब यह कतई नहीं कि आप अपनी कामवाली को अब आने से मना कर दें। बच्चे से काम लेने की बजाय उसे आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और ज़िम्मेदार बनाना है। वैसे भी हमारे देश में बाल-मज़दूरी क़ानूनन जुर्म है यह तो आप भी जानती हैं ना?

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock

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