बेबी का डायपर बदलने का सही टाइम है ये

न करें बच्चे के डायपर का लीक होने का इंतज़ार, जानें उसे बदलने का ठीक टाइम।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:58 PM IST

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अनुवादक – Shabnam Khan

बेबी डायपर सिर्फ छोटे बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि पेरेंट्स के लिए बहुत काम की चीज़ है। इसी की वजह से वो आराम से अपने नन्हे मुन्ने को बाहर ले जा पाते हैं। वरना बार-बार गीला कर देने पर तो बाहर जाना मुमकिन ही नहीं हो पाता। लेकिन डायपर यूज़ करते कुछ पेरेंट्स को थोड़ी बहुत जानकारी होना ज़रूरी है। और सबसे बेसिक जानकारी ये है कि डायपर बदलने का सही वक्त क्या है? मुंबई के जसलोक, सेफी और भाटिया हॉस्पिटल के सिनियर कंसल्टेंट और पीडियाट्रीशन डॉक्टर के.पी.संघवी ने इस बारे में अपनी सलाह दी है। (इसे भी पढ़ें - शिशु को रैशिज़ से बचाने के लिए 5 टिप्स)

संघवी के अनुसार, ‘अगर डायपर गीला ही नहीं हो रहा तो हर तीन चार घंटे में उसे बदलने का कोई मतलब नहीं है, इसलिए तीन-चार घंटे में डायपर बदलने का नियम हर जगह लागू नहीं किया जा सकता। लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं है कि आप डायपर बदलने के लिए उस वक्त का इंतज़ार करें, जब तक वो लीक न होने लगे। क्योंकि ऐसा करने से बच्चे को रैशिज़ हो सकते हैं। गीलापन अधिक वक्त तक रहने से स्किन पर बैक्टीरियल इंफेक्शन का जोखिम भी बढ़ जाता है।’

हालांकि, इसे रोकने के लिए आप गीलेपन के संकेतों पर नज़र रख सकते हैं और उस हिसाब से डायपर बदल सकते हैं। यहां नीचे बताए जा रहे कुछ टिप्स का ध्यान रखें-

  • अगर एक या दो घंटों से ज्यादा  डायपर गीला रहे तो उसमें से बदबू आने लगती है। यूरीन से निकले अमोनिया से ऐसा होता है। ये एक संकेत है डायपर बदलने का।

  • अगर नींद के बीच में उठकर या फिर दूध पीते-पीते आपका बच्चा अचानक रोने लगे तो हो सकता है उसे गीले डायपर से परेशानी हो रही हो।

  • अगर आपको बच्चे के सोने या लेटने पर बदबू सी आ रही हो तो हो सकता है कि उसका डायपर बदलने का वक्त हो गया हो।

  • औसतन हर बच्चे को तीन-चार घंटे में स्तनपान करवाना चाहिए। इसलिए जब आपको लगे कि डायपर गीला है, तो स्तनपान करवाने के लिए उठाने पर उसे बदल दें।

  • डायपर के लीक होने का इंतज़ार न करें क्योंकि इसका मतलब होता है आपके काफी देरी कर दी है। इससे बच्चे को रैशिज़ हो जाते हैं।

आख़िर में, डॉक्टर संघवी सलाह देते हैं कि जब मौसम गर्म हो तो दिन में बच्चे का डायपर बदलना चाहिए, क्योंकि ऐसे में ह्यूमिडिटी से बच्चे को इंफेक्शन होने के चांस बढ़ जाते हैं।

चित्र स्रोत - Shutterstock

 


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