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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST
मैं जब प्रेगनेंट थी तो जिस बात के लिए सबसे ज़्यादा फिक्रमंद थी वह यही थी कि क्या मुझे अपने बच्चे को साथ सुलाना चाहिए या नहीं? मेरी चिंता का सबसे बड़ा कारण यही था कि कहीं ऐसा न हो कि मैं नींद में अपने बच्चे को दबा दूं या उसे चोट लग जाए। कहीं उसके नन्हे हाथ या पैर मेरे शरीर के नीचे न आ जाएं।
लेकिन जब बच्चे का जन्म हुआ तो मैं समझ गयी कि उसे अपने पास सुलाना ही एकमात्र पर्याय है, और दो सालों के बाद भी उसके सभी अंग सुरक्षित हैं। खैर 2-3 साल के बच्चे सोते वक़्त हाथ पैर चलाते हैं और उनके पास सो रहे बेचारे मां-बाप को उनका यह एक्शन हीरो वाला रूप सहना पड़ता है। वैसे आजकल इस बात पर काफी चर्चा क़ी जाती है कि बच्चे को अपने पास सुलाया जाए या नहीं? हालांकि बच्चे को पास सुलाना मेरे लिए तो फायदेमंद रहा पर सबके लिए नहीं हो सकता। मैं यहां बता रही हूं बच्चे को पास सुलाने के फायदे और नुकसान।
बच्चे को साथ सुलाने के नुकसान
• बच्चे को चोट लगने का डर- जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि बच्चे को पास सुलाने से उसे चोट लगने का डर बना रहता है। इसी तरह अगर आप और बच्चा एक ही चद्दर या कम्बल ओढ़ता है तो हो सकता है कि बच्चे का दम घुट जाए या वह उसमें उलझ जाए। यही नहीं अगर आपके साथ कोई और बच्चा भी सो रहा है तो इस बात को सम्भावना भी काफी अधिक है कि बड़ा वाला बच्चा छोटे को नुकसान पहुंचाए।
• नींद में खलल- शुरुआत के दिनों में (बच्चे के जन्म के कुछ समय तक) आप बच्चे की भी छोटी-मोटी हरकत पर भी जाग उठेंगी। नवजात बच्चे सोते वक़्त काफी आवाज़ भी करते हैं जो कि एक आम बात है। लेकिन ऐसे में आपको बार-बार उठना पड़ सकता है।
• बच्चे को सोने में परेशानी- बार-बार होनेवाली झल्लाहट के कारण आप बच्चे की भी नींद ख़राब कर सकती हैं, जो ठीक नहीं। इसी तरह अगर आप दोनों एक ही बिस्तर पर सोते हैं तो हो सकता है कि आपको बार-बार बच्चे को सरकाना पड़े।
• सेक्स लाइफ पर असर- अगर बच्चा भी आपके साथ सोता है, तो ऐसे में आपको सेक्स करना असहज लग सकता है। हो सकता है कि आपको सेक्स के लिए किसी दूसरे कमरे में जाना पड़े लेकिन इसका मतलब होगा बच्चे को बिस्तर पर अकेला छोड़ना।
बच्चे को साथ सुलाने के फायदे
• ब्रेस्टफीडिंग में आसानी- नवजात बच्चों को हर 2-3 घंटे बाद दूध पिलाना पड़ता है। हर बार दूध पिलाने में 20-40 मिनट लगता है। कल्पना कीजिए रातभर में 4-5 बार उठना, बच्चे को दूध पिलाने के लिए उसके पास जाना और वापस आकर अपने बिस्तर पर सोना कितना मुश्किल हो सकता है। इसीलिए माएं बच्चों को अपने पास सुलाना पसंद करती हैं। बच्चा अगर पास होगा तो आप लेटे-लेटे भी बच्चे को दूध पिला सकती हैं और आपको भी आराम होगा।
• बच्चे को बेहतर नींद आएगी- नवजात बच्चे रात में बार-बार उठते हैं। कई बार उन्हें केवल आपकी थपकी और स्पर्श की ज़रूरत होती है। अगर आप दोनों साथ सोते हैं तो बच्चे को थपकी देना आसान होता है और वह आराम से सो भी जाता है। एक रिसर्च मे तो यह भी पाया गया कि जो बच्चे मां के पास सोते हैं वह रात में मां से दूर सोनेवाले बच्चों से कम बार उठते हैं।
• SIDS का कम ख़तरा- पिछले दशकभर में सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम (Sudden Infant Death Syndrome-SIDS) की घटनाएं बढ़ गयी हैं और इसके सही कारणों का पता भी नहीं लग पाया है। एक रिसर्च में ऐसा पाया गया है कि बच्चे को पास सुलाने से एसआईडीएस के खतरे को कम किया जा सकता है।
• बच्चे ज़्यादा देर तक सोते हैं- मेरे व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर मैं कह सकती हूं कि जब मैंने बच्चे को अपने पास सुलाया तो वह अधिक देर तक सोता था। यही नहीं जब तक वह मेरे पास रहती थी उसे आरामदायक नींद आती थी। मैंने उसे दूसरे कमरे में सुलाने की कोशिश भी की लेकिन वहां वह जल्दी-जल्दी उठ जाती थी। यह अनुभव शायद मुझे ही हुआ हो लेकिन मुझे यह तरीका कारगर लगा क्योंकि बच्चे अपनी मां के पास सोते वक़्त सुरक्षित और गर्म महसूस करते हैं।
• मां के साथ बच्चे सुरक्षित रहते हैं- मां के साथ सोते वक़्त बच्चे की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा सकता है। कल्पना कीजिए बच्चा कहीं अकेले सो रहा है और वह कम्बल में इतना नीचे चला जाता है कि उसे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, या उसका पैर पालने की रॉड्स के बीच फंस जाता है? पास होने पर मां बार-बार बच्चे को देखती और टटोलती रहती है और इसीलिए जब बच्चा मां के पास होता है तो सुरक्षित रहता है।
बच्चे को साथ सुलाने का सही माहौल
जहां बहुत सी माएं बच्चों को अपने पास सुलाने को लेकर ज़्यादा सहज नहीं महसूस करतीं। ऐसी स्थिति में आप बच्चे के लिए थोड़ी ऊंची जगह पर सोने का इंतज़ाम कर सकती हैं। बच्चों के लिए स्लीपिंग मैट्स बाज़ार में आसानी से मिल जाते हैं और आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से कुछ खरीद सकती हैं। आप बच्चे के लिए एक पालना खरीद सकती हैं जिसे बिस्तर के पास लगाया जा सकता है। इस तरह आप बच्चे को खुद से दूर लेकिन अपने ही कमरे में सुला सकती हैं।
संदर्भ- 1. Mao, A., Burnham, M. M., Goodlin-Jones, B. L., Gaylor, E. E., & Anders, T. F. (2004). A Comparison of the Sleep–Wake Patterns of Cosleeping and Solitary-Sleeping Infants. Child Psychiatry and Human Development, 35(2), 95–105. https://doi.org/10.1007/s10578-004-1879-0
2. Task Force on Sudden Infant Death Syndrome., Moon RY. SIDS and other sleep-related infant deaths: expansion of recommendations for a safe infant sleeping environment. Pediatrics. 2011 Nov;128(5):e1341-67. doi: 10.1542/peds.2011-2285. Review. PubMed PMID: 22007003.
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Shutterstock