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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST
2016 साल रहा सोशल मीडिया के नाम और सोशल मीडिया पर छाए रहे इंडियन सेलिब्रिटिज़। इन मशहूर हस्तियों ने इंस्ट्राग्राम पर अकाउंट बनाने से लेकर कठोर और सनसनीखेज़ ट्वीट लिखने और अपनी तस्वीरें शेयर करने, लोगों को उत्तेज़ित करने, उन्हें संदेश देने और अपना जलवा दिखाने का काम किया।
इसके अलावा जो काम हमारी इन मशहूर हस्तियों ने किया वह रहा ओपेन लेटर लिखने का। जी हां, कई प्रसिद्ध लोगों नें अपनी बेटियों या नातिन-पोतियों के नाम 2016 में लिखे ओपेन लेटर। सेलिब्रिटीज़ की इन सार्वजनिक चिट्टियों में से कुछ को सराहा गया तो कुछ ने मन के तारों को छूने का काम किया तो कुछ ऐसे पत्र भी थे जिनमें लिखी बातों में हम भारतीयों ने कोई रुचि नहीं ली।
चिट्ठियों को संवाद का एक सशक्त ज़रिया माना गया है और इनमें बीते ज़माने की सुहानी और सरल स्नेह की खूशबू आती है। अपनों के प्रति प्रेम, लगाव और फिक्र को दर्शाने के लिए लोग एक-दूसरे को ख़त लिखते हैं। लोगों को चिठ्ठियां पढ़ना पसंद आता है और इसीलिए कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने ही नाम ख़त लिखने और पढ़ने का काम करते हैं।
हालांकि इन ओपन लेटर्स को लिखने का मकसद यही रहा कि लिखनेवाला अपनी बात आम लोगों तक पहुंचा सके और अपने विचारों के ज़रिए कुछ लोगों को प्रेरित कर सके। लेकिन, 2016 में लिखे गए सभी ओपन लेटर्स इतने प्रभावशाली नहीं रहे। एक और बात जो मुझे अच्छी नहीं लगी वो यह थी कि इनमें से किसी भी हस्ती ने अपने बेटे या किसी लड़के को चिठ्ठी नहीं लिखी। आखिर क्यों बदलाव लाने और मज़बूत बनकर ज़िन्दगी जीने की ज़िम्मेदारी केवल लड़कियों के कंधों पर रखी गयी? चलिए डालते हैं नज़र 2016 में लिखे गए ओपन लेटर्स पर।
पहला खत आया बैंकर चंदा कोचर का जिन्होंने अपनी बेटी को अप्रैल महीने में एक चिट्ठी लिखी। इस खत में चंदा ने लिखा कि किस तरह उन्होंने एक साथ अपने घर और काम को संभालने के लिए संघर्ष किया और किस तरह वह इस संघर्ष में सफल हुयीं। लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आया कि वह इस चिठ्ठी के ज़रिये क्या कहना चाहती थीं और इस खत से उनकी तरह कामकाजी मांओं को क्या सीख मिलेगी? क्योंकि इस चिठ्ठी में बार-बार इस बात का ज़िक्र करती रहीं कि किस तरह उन्हें एक वर्किंग मां होने का पछतावा होता रहा। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जताया कि किस तरह एक कामकाजी मां से क्या उम्मीदें की जा सकती हैं। इस चिठ्ठी के साथ जो समस्या थी वह यही है कि उन्होंने अपने बेटे से पता नहीं क्यों लेकिन कुछ भी नहीं कहा।
इसके बाद जो ख़त आया वह रहा आईटी जगत की मशहूर हस्ती नारायण मूर्ति का जिन्होंने अपनी बेटी के नाम एक लेटर लिखा। इस ख़त में उन्होंने लिखा कि किस तरह उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपने बच्चों की बेहतर परवरिश के लिए जवानी के दिनों में अपनी इच्छाओं का त्याग किया।
लेकिन मूर्ति दम्पत्ति की तरह सभी मां-बाप ऐसा ही करते हैं। हमारे देश में (और दुनिया के बाकी हिस्सों में भी) शायद ही ऐसे कोई माता-पिता हों जो रोज़ाना अपने बच्चों से मिलने के बाद हवाई जहाज़ पकड़कर ऑफिस जाते हों। खैर नारायण मूर्ति जैसी हस्ती के एक पिता के तौर पर लिखे गए इस पत्र में व्यावहारिकता की कमी नज़र आयीं।
सुष्मिता सेन ने अपनी बेटी रिनी के लिए जो ख़त लिखा वह थोड़ी राहत भरा रहा। यह एक ओपन लेटर नहीं था, बल्कि एक चिट्टी जो उन्होंने रिनी के बोर्डिंग स्कूल जाने पर लिखी थी उसकी तस्वीर थी और सुष्मिता ने इसे इंस्ट्राग्राम पर शेयर किया था। यह ख़त बिल्कुल वैसा था जिसकी उम्मीद मैं बाक़ी सेलेब्रिटीज़ से करती हूं। सुष्मिता सेन ने अपने इस ख़त में अपनी बेटी को लिखा कि वह पढ़े-लिखे और हिम्मत के साथ स्थितियों का सामना करे। अब आप समझे मेरे हिसाब से एक प्रैक्टिकल लेटर क्या होता है?
इसे तरह अमिताभ बच्चन ने भी अपनी नातिन नव्या नवेली और पोति आराध्या बच्चन के नाम लिखा। इस ख़त में केवल यही अंतर था कि यह एक दादा या नाना के हाथों लिखा गया था। इस पत्र में बताया गया कि इस युग में लड़कियां कितनी ‘स्वंत्रत’ हैं। लेकिन क्या यह पत्र इस बात को इंगित नहीं करता कि किस तरह गुज़रे ज़माने में महिलाओं को दबाकर रखा गया। अपने लंबे से ख़त में अमिताभ ने लिखा कि किस तरह बुज़ुर्गों से मिले नाम को सहेजना उनकी पोती और नातिन की ज़िम्मेदारी है। पर अगर वह दादा या नाना के तौर पर प्रगतिशील हैं तो उन्हें लिखना चाहिए कि अगर ग़लतियां करो तो उन गलतियों से कुछ सीखो और उनकी ज़िम्मेदारी लो और अपने फैसलों के दम पर खुद की पहचान बनाओ।
उम्मीद है कि आनेवाले साल में सोशल मीडिया पर हमारे लिए बेहतर सामग्री उपलब्ध होगी और मशहूर हस्तियां और सेलिब्रिटीज़ सोशल मीडिया का इस्तेमाल और अधिक ज़िम्मेदारी के साथ करेंगे।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Twitter/ Amitabh Bachchan