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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST
आजकल पढ़ाई लिखाई अलग और व्यापक हो गयी है लेकिन साथ ही यह उलझानेवाली भी बनती जा रही है। ढेर सारे एज्युकेशन बोर्ड्स और स्कूलों की भीड़ के बीच अपने बच्चे के लिए एक स्कूल या बोर्ड का चयन माता-पिता के लिए काफी मशक्कतभरा काम हो जाता है। अगर आपने किसी एक बोर्ड का चयन कर लिया और आपके बच्चे का एडमिशन भी करा लिया तो क्या उसके बाद आप अपने बच्चे को किसी दूसरे बोर्ड में भेजने की सोचेंगे? शायद नहीं, क्योंकि यह बहुत मुश्किल भरा काम हो जाएगा। क्योंकि ऐसा करने से आपके बच्चे को नये पाठ्यक्रम या करिक्यलम (curriculum) के हिसाब से और एक नये तरीके से पढ़ाई-लिखाई करनी होगी। लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ करने की बज़ाय आपको अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए नये बोर्ड में दाखिला करा ही देना चाहिए।
शिक्षकों की योग्यता- चूंकि हर बोर्ड की यही कोशिश होती है कि वो बच्चों को अलग तरीके से पढ़ना-लिखना सिखाए और शिक्षकों की तैयारी और ट्रेनिंग भी उसी हिसाब से करायी जाती है। ध्यान रहे कि शिक्षकों के दृष्टिकोण और पद्धति पर उस बोर्ड के तरीकों का प्रभाव होता है जिसमें वह पढ़ा रही है। अपने बच्चे के व्यक्तित्व के विकास और आप उसे किस प्रकार की शिक्षा देना चाहती हैं इन बातों के आधार पर अगर आप टीचर्स से प्रभावित हो रहे हैं तो आप उस बोर्ड में अपने बच्चे को दाखिला दिला सकते हैं।
पढ़ाने का तरीका- बोर्ड, स्कूल और टीचरों के पढ़ाने के तरीके के बारे में आपने चाहे जितनी भी खोजबीन की हो लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि वे इसका कितना पालन करते हैं। जी हां, इस बात पर ध्यान दें कि क्या टीचरों के पढ़ाने का तरीका भी उतना ही अच्छा है जितना कि स्कूल प्रचारित करता है?
स्थानांतरण- अगर आप किसी नये शहर, राज़्य या विदेश जा रहे हैं तो आपको काफी निचले स्तर से शुरुआत करनी पड़ सकती है। आपका बच्चा जिस बोर्ड और स्कूल में पढ़ रहा था उससे मिलते-जुलते स्कूल और बोर्ड के चयन के लिए आपको काफी काम करना पड़ सकता है।
अपने बच्चे की पसंद/ज़रूरत का ख्याल- वेबसाइट्स और प्रेजेंटेशन में हर स्कूल अच्छा ही बताया जाता है। हो सकता है कि सबके पढ़ाने का तरीका अलग हो लेकिन ज़्यादातर बोर्ड बच्चों के चहुमुखी विकास की कोशिश करते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई भी एज्युकेशन बोर्ड आपके बच्चे के लिए सही होगा। किसी भी बोर्ड का चयन करने से पहले अपने बच्चे की सीखने की क्षमता, समझ और उसके व्यक्तित्व को ध्यान में रखें। इसके बावजूद हो सकता है कि आपको कुछ समय बाद अपना फैसला बदलना पड़े।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Shutterstock