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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:58 PM IST
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अनुवादक – Usman Khan
कई लोग ऐसा मानते हैं कि बच्चों को (नवजात हो या थोड़ा बड़ा) दोनों को ऑन-डिमांड यानि मांग पर या किसी निश्चित समय पर ही फीडिंग करानी चाहिए। हालांकि फीडिंग कराना मां के कम्फर्ट लेवल, लैक्टेशन, बच्चे का सोने का समय और अन्य कारकों पर निर्भर हो सकता है। खैर, कई अध्ययनों में ये बात सामने आई है कि बच्चे के लिए किसी एक निश्चित समय पर फीडिंग कराने की तुलना में ऑन-डिमांड फीडिंग कराना बच्चे के लिए बेहतर है। पढ़ें: क्या ब्रेस्ट इम्प्लांट के बाद स्तनपान कराया जा सकता है?
वैसे विशेषज्ञ और डॉक्टरों का मानना है कि रूटीन फीडिंग कराने से बच्चे को अच्छी तरह से खाने, पोषण और वजन हासिल करने में मदद मिलती है। हालांकि रूटीन फीडिंग की एक कमी यह है कि इससे बच्चे को ज्ञान संबंधी समस्या हो सकती है। यूरोपीय जर्नल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जिन माताओं ने एक रूटीन के तहत बच्चों को फीडिंग कराया था, उन्हें आरामदायक अवस्था, कम अवसाद, अच्छी और लम्बी नींद लेते देखा गया था। लेकिन पांच, सात, आठ और ग्यारह साल की उम्र में ऐसे बच्चों को डिमांड फीड वाले बच्चों की तुलना में शिक्षा के मामले में थोड़ा कमजोर पाया गया।
डिमांड फीड से बच्चा अच्छी तरह दूध खींच पाता है, इससे फीडिंग स्पीड बढ़ती है और फीड की अवधि छोटी होने में मदद मिलती है। इतना ही नहीं इससे बेहतर वजन बढ़ने और शिशु को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।
अगर आप अपने सोते हुए बच्चे को उठाकर फीडिंग कराती हैं, तो यकीनन आप रूटीन फीडिंग कराने वाली मां हैं। लेकिन ऐसा करने से पहले एक ज़रूर सोचें। खैर अगर आप किसी वजह से ऑन डिमांड फीडिंग नहीं करा पाती हैं, तो आपके लिए बेहतर उपाय यह कि आप अपना दूध इकठ्ठा करके फ्रिज में रख सकती हैं और ज़रुरत पड़ने पर बच्चे को पिला सकती हैं। दूसरी बात, अगर आप कामकाजी महिला हैं, तो इससे आपको काफी फायदा होगा। लेकिन ध्यान रखें कि काम से वापस आकर ऑन डिमांड फीडिंग की प्रैक्टिस ज़रूर करें।
चित्र स्रोत - Shutterstock