... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:58 PM IST
Read this in English
अनुवादक – Shabnam Khan
कई भारतीय महिलाओं को लगता है कि अगर वो नियमित रूप से शिशु की तेल से मसाज करेंगी तो उसके रंग में निखार आएगा और वो गोरा हो जाएगा। हालांकि ये सही नहीं है। वृद्धि हौम्योपैथी एंड वेलनेस सेंटर, मुंबई की डॉक्टर भवी मोदी बताती हैं, ‘आपके शिशु की त्वचा का रंग बाहर से कुछ लगाने से नहीं बदल सकता। शिशु की त्वचा का रंग गोरा हो या सांवला, वो आनुवांशिक कारणों से होता है। शिशु की मसाज तेल से करने या उसे क्रीम लगाने से उसे गोरा नहीं किया जा सकता।’
जन्म के बाद शिशु की त्वचा का रंग और टेक्चर बदलता है, और उसे एक नैचुरल स्किन टोन में आने में कुछ वक्त लगता है। उदाहरण के लिए, जब शिशु समय से पहले पैदा हो जाता है तो उसकी त्वचा पारदर्शी ज्यादा होती है। त्वचा पर बालों की एक बारीक परत होती है। ये परत उसे ऐम्निऑटिक फ्लूड से बचाती है। लेकिन जो शिशु सही समय पर पैदा होते हैं उनकी त्वचा पर ये परत कम ही होती है।
इसके अलावा, जन्म के समय शिशु की त्वचा गुलाबी दिखती है। लेकिन ये उनका असली रंग नहीं होता। बल्कि शिशु की पतली बारीक त्वचा में से उसके रेड ब्लड वेसेल यानी लाल रक्त वाहिकाएं दिखती हैं, जिससे कि रंग गुलाबी लगता है। तकरीबन एक महीने बाद शिशु की त्वचा का रंग नियत होता है और ये प्रक्रिया उसके पहले साल तक चलती रहती है।अगर शिशु का बहुत अधिक वज़न कम होता है या बुखार होता है तो उसके रंग में फर्क आ सकता है।
अगर आपके नवजात शिशु की त्वचा पर लाल या नीले रंग के चकत्ते पड़ते हैं तो मुमकिन है उसे कोई स्किन इंफेक्शन या सांस लेने में समस्या हो। ऑयल मसाज से शिशु का रंग तो नहीं बदलता लेकिन इसके कई अन्य लाभ हैं। डॉक्टर मोदी कहती हैं, ‘ऑयल मसाज ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाती है, शिशु की मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूती प्रदान करती है, उन्हें गर्म रखती है और अच्छी नींद में मदद करती है। लेकिन इसे शिशु को गोरा बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।’
चित्र स्रोत - Shutterstock