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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:58 PM IST
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अनुवादक – Shabnam Khan
मैं ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाने की प्लानिंग कर रही हूं। साथ ही, अलगे साल हम फैमिली भी प्लान करेंगे। मैं सोच रही हूं कि क्या इम्प्लांट के बाद मैं बिना किसी समस्या के अपने शिशु को ब्रेस्टफीड करवा पाऊंगी? कृपया अपनी सलाह दें।
मुंबई के एल्यूर मेडस्पा के ब्रेस्ट ऑगमेन्टेशन के लिए सीनियर काउंसलर ने इस सवाल का जवाब दिया।
बहुत जरूरी है कि आप सबसे पहले ब्रेस्ट ऑगमेंटेशन (breast augmentation) के सभी उपलब्ध विकल्पों को जानती हों। किसी भी ट्रीटमेंट को लेने से पहले उसके फायदे और नुकसान के बारे में आपने पढ़ा हो। सभी प्रकार के ब्रेस्ट इम्प्लांट से स्तनपान यानी ब्रेस्टफीडिंग में समस्या उत्पन्न नहीं होती।
आमतौर पर तीन प्रकार के ब्रेस्ट इम्प्लांट किये जाते हैं। इम्प्लांट की एक्ज़ीलरी तकनीक (axillary technique) में बगल (armpit) के नीचे चीरा लगाकर इम्प्लांट किया जाता है। आर्मपिट के आसपास की मांसपेशियां ब्रेस्ट और मिल्क से नहीं मिली होती, इसलिए इस प्रकार के इम्प्लांट से ब्रेस्टफीडिंग पर असर नहीं पड़ता।
दूसरा तरीका इंफ्रा-ममरी तकनीक (infra-mammary technique) है जिसमें ब्रेस्ट के नीचे चीरा लगाया जाता है। एक्ज़ीलरी तकनीक की ही तरह ये भी सुरक्षित है, और ब्रेस्टफीडिंग में रुकावट नहीं डालता। दूध भी आसानी से निकलता है। भारत में इम्प्लांट के लिए आमतौर पर ये दो तरीके अपनाए जाते हैं, इसलिए नहीं क्योंकि इससे ब्रेस्टफीडिंग में समस्या नहीं होती, बल्कि इसलिए क्योंकि इसके परिणाम अच्छे निकलते हैं। ब्रेस्ट नैचुरल दिखते हैं, निशान भी नहीं पड़ते।
अगर आपको इम्प्लांट के बाद ब्रेस्टफीडिंग करनी है तो आपको पेरिआरिओलर (periareolar method) तरीके का चुनाव नहीं करना चाहिए। इस तरीके में निप्पल के पास चीरा लगाया जाता है। ऐसे में उन टिशु को नुकसान पहुंचता है जो ब्रेस्टफीडिंग के लिए जरूरी हैं। इससे दूध निकलने का रास्ता बाधित हो जाता है। इसलिए ब्रेस्ट में दूध तैयार तो होगा, निकल नहीं पाएगा। दूध जमने से अलग समस्याएं हो जाएंगी।
कोई भी तरीका चुनने से पहले आप अपने डॉक्टर से बात करें और अच्छी तरीके से इम्प्लांट की तकनीक समझें।
चित्र स्रोत - Shutterstock