बच्‍चे को दस्‍त होने पर इन बातों का रखें विशेष ख्‍़याल

क्‍या आपका बच्‍चा पतली पॉटी करता है? अगर हां, तो ये ज़रूरी नहीं कि उसे दस्‍त ही हो!

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:58 PM IST

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बच्‍चे द्वारा नियमित रूप से सही तरह पॉटी करना मां के लिए किसी राहत से कम नहीं। अगर बच्‍चा बार-बार और पतली पॉटी कर रहा है तो, निश्‍चित रूप से मां के लिए चिंता का विषय हो सकता है। बच्‍चे के लगातार पतली पॉटी करने पर आपके मन में जो पहला ख्‍याल आता है, वो यह है कि कहीं बच्‍चे को दस्‍त (diarrhoea) तो नहीं हो गया। इससे पहले कि आप बच्चे को इलाज के लिए डॉक्‍टर के पास ले जाएं, आपको कुछ ज़रूरी बातों का जानना बेहद ज़रूरी है। पढ़ें- इन 9 घरेलू उपचारों से दस्त के दौरान बच्चों को मिलता है आराम

स्तनपान करने वाले बच्चों की पॉटी करने की प्रक्रिया

मुंबई स्थित जसलोक अस्‍पताल में कंसलटेंट पीडीअट्रिशन डॉक्‍टर राजू खूबचंदानी के अनुसार, बच्‍चे द्वारा पतली पॉटी करने का मतलब हमेशा ये संकेत नहीं है कि उसे दस्‍त लगे हों। स्‍तनपान करने वाले नवजात शिशु एक, तीन या चार दिन में 15 बार पॉटी कर सकते हैं। अगर बच्‍चा सही तरह से फीडिंग ले रहा है, हेल्‍दी दिख रहा है और उसका वजन भी सही बढ़ रहा है, तो पतली पॉटी आने पर आपको परेशान नहीं होना चाहिए। कई माताएं बच्‍चे की पतली पॉटी के लिए स्‍तनपान को जिम्‍मेदार मानकर उसे फीडिंग कराना बंद कर देती हैं, जो कि एक गलतफहमी है।

'फॉर्मूला फेड बेबीज' बच्चों की पॉटी करने की प्रक्रिया

डॉक्‍टर के अनुसार, ये प्रकिया फॉर्मूला फेड बेबीज (Formula fed babies) यानि दूध के अलावा ऊपरी खाना खाने वाले बच्‍चों के मामले में अलग हो सकती है। ऐसे बच्‍चे थोड़ी मोटी और हार्ड पॉटी करते हैं। अगर ऐसे बच्‍चे पतली पॉटी कर रहे हैं, तो गंभीर विषय हो सकता है। इसके अलावा ऐसे बच्‍चों के स्‍तनपान करने वाले बच्‍चों की तुलना में पेट खराब होने के चांस भी दस गुणा ज्‍यादा होते हैं। ऐसे बच्‍चों को पतली पॉटी से उनके शरीर में तरल पदार्थ की कमी हो सकती है।

दस्‍त बच्‍चे के शरीर से कुछ खराब पदार्थों को नष्‍ट करने में सहायक है। चूंकि अभी आपके बच्‍चे के सिस्‍टम का विकास हाे रहा है। इसलिए बच्‍चे का सिस्‍टम बड़ों की तुलना में अलग तरह से काम करता है। पतली पॉटी होने का मतलब दस्‍त होना बिल्‍कुल गलत धारणा है।

इन बातों का रखें ख्‍याल 

  • अगर पतली पॉटी के साथ बच्‍चे को हल्‍का बुखार है और बच्‍चा एक साल से छोटा है, तो इस समस्‍या को गंभीरता से लेना चाहिए।

  • दस्‍त के साथ उल्‍टी पेट में संक्रमण का संकेत हो सकते हैं। इसलिए सावधान रहें।

  • ज्‍यादा प्‍यास लगना, जीभ सूख जाना, आंखे धंसना और बच्‍चे का लगातार रोना डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकते हैं।

  • दस्‍त में खून आना भी एक गंभीर समस्‍या हो सकती है। ऐसे में विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है।

कुछ घरेलू उपाय

  • राइस कंजी दस्‍त के लिए एक बेहतरीन घरेलू और कारगर उपाय है। एक मुट्ठी राइस पाउडर पानी में मिलाकर कम से कम 10 मिनट पकाएं। इसमें हल्‍का नमक और बाद में कम से कम एक लीटर पानी मिलाकर पतला कर लें। इस पतले तरल पदार्थ को बच्‍चे को पिलाएं।

  • दूसरा उपाय एक गिलास पानी में थोड़ी चीनी और एक चुटकी नमक मिलाकर बच्‍चे को पिलाएं।

  • स्‍तनपान वाले बच्‍चे को केवल स्‍तनपान ही कराएं। इससे उसे बैक्‍टीरियल, वायरल और डायरिया से लड़ने में शक्ति मिलती है।

  • बच्‍चे को जबरदस्‍ती फीडिंग ना कराएं। उसे जब भूख लगे, तब ही फीडिंग कराएं।

  • फीडिंग छुड़ाने के लिए दाल की खिचड़ी को एक बेहतर चीज माना जाता है। इसके लिए अनावश्यक आहार परिवर्तन की जरूरत नहीं हैं।

  • अगर आप घर कुछ ऐसा नहीं बना सकते, तो बाजार में मिलने वाले रिहाड्रेटेशन का इस्‍तेमाल करें।

  • अपने बच्‍चे को कोई भी एंटीबायोटिक दवा देने से बचें। डॉक्‍टर द्वारा दी गई दवाओं के बारे में सही से जानकारी लेनी चाहिए। अगर बच्‍चे को उल्‍टी की दवा दे रहे हैं तो ध्‍यान रहे कि इसके तुरंत बाद उसे फीडिंग ना कराएं। दवा देने के बाद कम से कम एक घंटे बाद फीडिंग कराएं।

मूल स्रोत -Loose motions in babies might not always suggest diarrhoea

अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock


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