बच्चों की परवरिश में हर माँ को होता है इन 5 बातों का डर

पहले की तुलना में आज के जमाने में हर माँ को बच्चे की परवरिश पर ज्यादा सीरियसली ध्यान देना पड़ता है!

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:01 PM IST

हर माँ अपने बच्चे की परवरिश को लेकर बहुत ज्यादा सीरियस रहती है और आज के समय में माहौल इतना ख़राब हो गया है कि किसी भी माँ को अपने बच्चे की परवरिश में बहुत ज्यादा ध्यान देना पड़ता है। अगर आप उनके जमाने की बात करें तो उनके जमाने में ऐसी कई दिक्कतें मौजूद ही नहीं थीं जो आज कल के बच्चों को झेलनी पड़ती है। हम यहाँ आपको ऐसे ही कुछ समस्याओं के बारे में बता रहे हैं जिनसे आजकल के बच्चों को खतरा है।

1 - अकेले बाहर भेजना : कानपुर की रहने वाली शाजिया नज़ीर बताती हैं किवे बचपन में बड़े आराम से शाम को पार्क में खेलने चली जाती थी और वहां पूरे मोहल्ले के और भी दोस्त हुआ करते थे। सब साथ में खेलते और एन्जॉय करते थे। लेकिन आज के समय में वे अपने बच्चे को ऐसे अकेले पार्क में खेलने के लिए नहीं छोड़ सकती हैं, क्योंकि आज कल एक तो रोड पर इतनी ज्यादा भीड़भाड़ रहती है और पार्क भी बहुत कम बचे हैं। इसके अलावा आज के दौर में आप हर किसी पर विश्वास नहीं कर सकते हैं। इसलिए भी बच्चों को अकेले पार्क में भेजना सही नहीं है।

2– पड़ोसी के घर पर बच्चों को अकेले छोड़ना : शुयशी अग्रवाल बताती हैं कि पहले का जमाना अलग था जब उनकी माँ उन्हें पड़ोसी के घर में छोड़ कर बहन को लेने स्कूल चली जाती थी, और मैं अकेले अंकल के घर में खेलती कूदती रहती थी। लेकिन आज मैं अपने बच्चों के साथ ऐसा नहीं कर सकती हूँ क्योंकि आज आप बड़े शहरों में किसी पर आँख मूँद कर भरोसा नहीं कर सकते हैं। हो सकता है पड़ोसी मेरे बच्चे को कुछ भी अनहेल्दी चीज खिला दे या फिर वे इस बात का ध्यान न रखें कि बच्चा टीवी पर क्या देख रहा है। इसलिए आज के समय में ऐसा करना मुमकिन नहीं है।

3- बच्चे का अकेले सफ़र करना : आज के जमाने की कई माँ अपना अनुभव बताते हुए कहती हैं कि जब वे बचपन में 7 साल की थी तो वे अकेले ही सफ़र कर लेती थी या पापा जब हॉस्पिटल में एडमिट थे तो वे घर से अकेले ही टैक्सी पकड़ कर हॉस्पिटल चली जाती थी। लेकिन अब वे अपने बच्चों को ऐसी छूट देने में डरती हैं क्योंकि आज कल रोजाना न्यूज़ में ऐसी खबरे आती हैं कि किसी छोटे बच्चे को किसी ने किडनैप कर लिया या शारीरिक रूप से नुकसान पहुँचाया। तो ऐसे माहौल में बच्चों को अकेले कहीं भेजना बहुत मुश्किल हो जाता है।

4- बच्चे का जंक फ़ूड खाना : शालिनी व्यास बताती हैं कि बचपन में उन्हें बाहर जाकर खाना बहुत पसंद था और वे महीने में 2-3 बार बाहर जाकर खाना खाती थी। लेकिन आज के समय में वे अपने बच्चे की डाइट को लेकर बहुत ज्यादा जागरूक हैं और उन्हें जंक फ़ूड खाने या बाहर का खाना खाने की बिलकुल भी इजाजत नहीं देती हैं। जंक फ़ूड या बाहर का खाना खाने से बच्चों के मोटापे का शिकार होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

5- घर के पास वाले स्कूल का चुनाव : पांच साल के बच्चे की माँ पार्वि जैन बताती हैं कि उनके जमाने में स्कूल चुनने का सिर्फ एक ही पैरामीटर होता था और वो था स्कूल का घर से पास होना। लेकिन आज समय काफी बदल गया है और सिर्फ घर से पास वाले स्कूल में बच्चे का दाखिला कराना बिलकुल ही गलत निर्णय है। आज के समय में स्कूल का चुनाव करते समय उस स्कूल में पढ़ाई का स्तर, बच्चों के देखभाल की सुविधाएं, खेलने कूदने की सुविधाएं, उनकी सुरक्षा इत्यादि को ध्यान में रखकर ही स्कूल चुनना पड़ता है।

हालांकि हर पीढ़ी में परवरिश को लेकर अलग अलग चुनौतियाँ होती हैं और आपके पेरेंट्स के लिए भी उस समय में आपको पालना उतना ही मुश्किल भरा रहा होगा जितना आज आप के लिए है।

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अनुवादक: Anoop Singh

चित्र स्रोत: Shutterstock


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