हर माता-पिता अपने नन्हें मुन्ने को सेहतमंद देखना चाहता है, जिस कारण वो उसके खानपान का खास ख्याल रखता है। अगर आप भी अपने शिशु को सेहतमंद रखना चाहते हैं तो कम से कम एक साल तक उसे नमक और चीनी न दें। चीनी की जगह प्राकृतिक रूप से मीठे फल उसे दिये जा सकते हैं। यहां तक कि बाज़ार में मिलने वाले बेबी फूड में भी हाई शुगर होता है, इसलिए हमेशा लेबल देखकर ही उसे खरीदें।
सफेद चीनी रिफाइंड होती है, इसलिए उसमें केमिकल होते हैं। ये केमिकल बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
रिसर्चमें ये बात सामने आई है कि रिफाइंड शुगर इम्यूनिटी को प्रभावित कर सकती है। शिशु की इम्यूनिटी कम होने से उसे इंफेक्शन और कई बीमारियां होने का खतरा पैदा हो जाता है।
You may like to read
कुछ क्लिनिकल स्टडीज में ये बात सामने आई हैं कि छोटे बच्चों को ज्यादा शुगर देने से भविष्य में उनका दिल की बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है।
अगर शिशु ज्यादा मीठा खाता है तो उसका असर उसके पहले दांत से ही दिखना शुरु हो जाता है। शुगर से मुंह में बैक्टीरिया बढ़ सकता है, जिसका बुरा असर दांतों पर पड़ता है।
अध्ययन में ये बात भी सामने आई है कि शैशवास्था में चीनी के ज्यादा सेवन से बच्चे को बाद में ध्यान केंद्रित करने में समस्या होती है।
शिशु को मीठे से कैसे रखें दूर
बेबी फूड का लेबल ठीक से पढ़कर ही खरीदें।
कैन वाले फल शिशु को न दें, उसमें काफी शुगर होता है।
पैक्ड जूस में भी काफी शुगर होती है, शिशु को इसकी जगह ताज़ा जूस दें।
खीर, दलिया, मिल्कशेक में नैचुरल शुगर जैसे फलों की प्यूरी मिलाएं।
जैम, जैली, सॉस, मैपल सिरप, सॉफ्ट ड्रिंकज जैसे प्रोसेस्ड फूड में काफी शुगर होता है, उसे बच्चों को न दें।
आपके बच्चे को मीठा टेस्ट पसंद आ सकता है, लेकिन ये उसकी सेहत के लिए अच्छा नहीं है। इसलिए कोशिश करें कि शुरुआती 12 महीने में शिशु को मीठा कम से कम दें। चीनी की जगह उसे नैचुरल मीठा यानी फल दें।
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.