World Breastfeeding Week : Premature बच्चों को ऐसे करें breastfeed

अपने premature बच्चे को लेकर परेशान है आप? आपके काम आ सकती हैं ये बातें

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:01 PM IST

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

 

ब्रेस्टफीडिंग बच्चों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि, अपने समय से पहले जन्म लेनेवाले बच्चे ( प्रीमैच्योर बेबी) का थोड़ा अधिक ख्याल रखना पड़ता है लेकिन उसके विकास और पोषण का सबसे अच्छा तरीका ब्रेस्टफीडिंग ही है।

मां का दूध बोतल के दूध की अपेक्षा पचने में आसान होता है, और इसीलिए अविकसित बच्चे के नाज़ुक पेट को तकलीफ नहीं होती। अपोलो क्रेडल, बेंगलूरु के कंसलटेंट गाइनकालॉजिस्ट डॉ. सुनिल ईश्वर कहते हैं, प्रिमैच्योर बेबी बच्चों को इंफेक्शन का काफी ख़तरा होता है। ब्रेस्टफीडिंग से उसकी रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जो उसे इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है। मां के दूध में मौजूद एंटीबॉडीज़, मिनरल, विटामिन ऐसे कमज़ोर बच्चों को मज़बूत बनाते हैं। डॉ. ईश्वर के मुताबिक कई बार दूध न बन पाने के कारण माता के लिए बच्चे को दूध पिलाना संभव नहीं हो पाता। लेकिन ऐसे वक्त में ब्रेस्टफीडिंग पूरी तरह बंद न करें, थोड़ी-थोड़ी देर बाद कोशिश करते रहें। इस तरह दूध बनने में आसानी होगी।

समय से पहले जन्में बच्चे के लिए जन्म के तुरंत बाद स्तन को चूसना संभव नहीं होता और उसे ट्यूब से दूध पिलाना पड़ सकता है। लेकिन फॉर्मूला दूध देते रहने की बजाय जल्द से जल्द बच्चे को अपना दूध पिलाना शुरु करें। डॉ. ईश्वर के अनुसार बच्चे को सही ढंग से दूध पिलाने के लिए यह तरीके अपना सकते हैं-

प्रसव के 24 घंटों के भीतर दूध पिलाने की कोशिश करें

इस तरह माता के लिए पोषक दूध पिलाना आसान होगा। याद रखिए शुरुआत करेंगी तो एक गाढ़ा और पीले रंग का पदार्थ निकलेगा, जिसे कॉलस्ट्रम(colostrum) कहा जाता है। यह पोषण से भरा हुआ होता है और बच्चे के विकास में मदद करता है।

ब्रेस्ट पम्प का इस्तेमाल करें

ब्रेस्ट मिल्क फ्लो की शुरुआत करने के लिए ब्रेस्ट पम्प का इस्तेमाल करने के तुरंत बाद ब्रेस्ट को दबाएं। आप चाहें तो मालिश भी कर सकते हैं। ब्रेस्ट पम्प इस्तेमाल में काफी आसान होते हैं और ब्रेस्ट मिल्क सप्लाई बढ़ाने में मदद करते हैं। किसी लैक्टेशन एक्सपर्ट से बात करके आप मसाज का सही तरीका पता कर सकती हैं।

नियमित रुप से दूध पिलाएं

प्रीमैच्योर बच्चे को ब्रेस्टफीड कराते हुए इस बात का ध्यान रखें कि दिनभर में आप उसे 6-8 बार दूध पिलाएं। दो बार दूध पिलाने के बीच 6 घंटे से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।

बच्चे को अपना स्पर्श महसूस कराएं

बच्चे को मां जब अपने सीने से चिपकाती है तो उसका ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है, बच्चे को उष्मा प्राप्त होती है और प्राकृतिक रुप से बच्चे को ब्रेस्टफीड कराना आसान होता है। इसे तरीके को कंगारू केयर भी कहा जाता है।

ब्रेस्टफीडिंग के साथ दूध निकालते भी रहें

बच्चे को पर्याप्त दूध मिलता रहे इसलिए आप बच्चे को दूध पिलाने के समय के अलावा भी बीच-बीच में दूध निकालते रहिए। इस तरह आपके दिमाग को दूध बनाते रहने का सिग्नल मिलेगा।

धीरज रखें

शुरुआत के दिनों में आपके बच्चे को टयूब से दूध पिलाया जाएगा। बच्चे को दूध पीना सिखाएं। इस तरह से बाद में बच्चे को और दोनों को आसानी होगी। हालांकि प्रीमैच्योर बेबी जल्दी थक जाता है इसलिए दूध पीना सीखने के बाद हो सकता है कि वह कुछ समय तक केवल कुछ घूंट दूध ही पी सके। दिल छोटा ना करें और बच्चे को जब भी ज़रूरत हो दूध पिलाते रहें। मां की मदद और लगातार ब्रेस्टफीडिंग से बच्चे का विकास तेज़ी से होगा।

चित्र स्रोत: Shutterstock


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