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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST
बच्चे के जन्म के बाद से ही माँ को हमेशा इस बात की चिंता रहती है कि उसके बच्चे को पूरा पोषण मिल रहा है या नहीं। चाहे वो ब्रेस्टफीडिंग का दौर हो या फिर सप्लीमेंट का हर पेरेंट्स यही चाहते हैं कि बच्चे के शरीर में पोषक तत्वों की कमी न आये और वह पूरी तरह स्वस्थ रहे। अगर आप भी इसी चिंता में परेशान हैं कि बच्चे को कौन-सा सप्लीमेंट कितनी मात्रा में और किस उम्र तक खिलाना है तो अब परेशान न हों। हमने इस बारे में नवी मुंबई स्थित अनमोल क्लिनिक के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण गायकवाड से विस्तार से बातचीत की। आइये जानते हैं उन्होंने क्या कहा :
विटामिन डी: सभी डॉक्टर जन्म के समय से लेकर दो साल तक की उम्र तक बच्चों को विटामिन डी की ड्राप पिलाने की सलाह ज़रूर देते हैं। मां के दूध में विटामिन डी की मात्रा बहुत कम होती है वहीँ फार्मूला मिल्क में तो विटामिन डी की मात्रा बिल्कुल भी नहीं होती है और नवजात शिशु को आप उतना देर धूप में भी नहीं रख सकते कि वो पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी हासिल कर सके। इसलिए दो साल की उम्र तक सप्लीमेंट के रूप में विटामिन डी का सेवन कराना बहुत फायदेमंद होता है।
आयरन: हालाँकि मां के दूध में और फार्मूला मिल्क दोनों में ही आयरन की मात्रा पर्याप्त होती है लेकिन जब बच्चा कुछ बड़ा हो जाता है और खाना खाने लगता है तो उस समय आयरन की ज़रूरत काफी बढ़ जाती है, जो सिर्फ मां के दूध से पूरी नहीं हो सकती है। ऐसे में बच्चों को आयरन से भरपूर सब्जियों और हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा कराएं। इसके बावजूद भी अगर डॉक्टर कहते हैं कि आपके बच्चे में आयरन की कमी है तो उसे आयरन सप्लीमेंट देना शुरू कर दें। खासतौर पर प्री-मैच्योर बेबी को आयरन की ज़रूरत सामान्य शिशु की तुलना में काफी ज्यादा होती है।
विटामिन बी-12: मछली, अंडे, मीट और डेरी प्रोडक्ट में विटामिन बी-12 की अधिक मात्रा पायी जाती है खासतौर पर फार्मूला मिल्क में भी विटामिन बी काम्प्लेक्स की मात्रा अधिक होती है। अगर आप ब्रेस्टफीड करा रही हैं और आप इन चीजों का सेवन नहीं कर रही हैं तो आपके बच्चे में विटामिन बी 12 की कमी हो सकती है। जिसकी भरपाई के लिए बच्चे को विटामिन बी-12 सप्लीमेंट के रूप में देना ज़रूरी हो जाता है।
डीएचए (DHA): यह ओमेगा-3 फैटी एसिड का ही एक रूप है जो कि दिमाग और आंखों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी है। मां के दूध में डीएचए की मात्रा पर्याप्त होती है, इसके अलावा मीट और मछली में भी यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। हालाँकि आमतौर पर शाकाहारी लोगों को डीएचए सप्लीमेंट नहीं दिया जाता है, इसलिए इसकी मात्रा को हासिल करने के लिए डायट में मां के दूध के अलावा हरी सब्जियां जैसे कि पालक, केले और पत्तेदार सब्जियों की मात्रा बढ़ा दें।
इन सबके बावजूद भी अगर आपको लगे कि आपके शिशु को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं तो नजदीकी बाल रोग विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें।
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अनुवादक: Anoop Singh
चित्र स्रोत: Shutterstock