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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 5:53 PM IST
आज कल हर तरफ कम्पटीशन की धूम है हर कोई सबसे आगे निकलना चाहता है और फेमस होना चाहता है। बड़े तो बड़े अब बच्चे भी ना चाहते हुए तेजी से इस दौड़ में शामिल हो रहे हैं। टेलीविजन के इस दौर में जब हर तरफ रियलिटी शो की धूम है तो आपने भी देखा होगा कि कई चैनलों पर ऐसे कई शो आते हैं जिसमें सिर्फ बच्चे ही भाग लेते हैं। हालांकि इस तरह के प्रोग्राम में भाग लेने से आपका बच्चा रातों रात स्टार तो बन जाता है लेकिन शायद आप उसकी मानसिक स्थिति को ठीक से समझ नहीं पाते हैं। बच्चे में टैलेंट होना अलग बात है और उस टैलेंट को लेकर उस पर किसी तरह का दवाब बनाना अलग बात है। अगर आप भी अपने बच्चे से ऐसी उम्मीदें लगाकर बैठी हैं कि वो ऐसे किसी शो में भाग ले और अपना और परिवार का नाम रोशन करें तो उससे पहले एक बार मनोरोग विशेषज्ञ की राय ज़रूर ले लें।
चाइल्ड सायकोलोजिस्ट डॉ शुची दलवी किसी भी पेरेंट्स को इस बात को लेकर मना करती हैं कि वे अपने बच्चों को ऐसे किसी भी रियलिटी शो में भाग लेने के लिए दवाब न बनाएं। 90 के दशक में टेलीविजन पर बूगी वूगी नाम का शो बहुत ज्यादा चर्चित था और एक तरह से कह सकते हैं कि इसी शो ने इस प्रथा को जन्म दिया कि आप टेलीविज़न पर आकर रातोंरात फेमस हो सकते हैं। उसके बाद कई माता पिता अपने बच्चों को ऐसे टैलेंट हंट में भेजने लगे। जबकि डॉ. दलवी कहती हैं कि इन शो में जब बच्चा प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाता है या फिर कोई जज उस पर गलत कमेंट कर देता है तो बच्चे की मानसिक स्थिति पर बहुत बुरा असर पड़ता है। आपने जितने भी ऐसे शो देखें होंगे आपने एक बात गौर की होगी कि हर एक बच्चा यह ज़रूर कहता है कि इस कम्पटीशन को जीतना उसके माता पिता का सपना है और वो उसे ज़रूर पूरा करेगा। जबकि आप यह नहीं समझ पा रहे कि बच्चे पर यह अतिरिक्त दवाब उसे सही राह से भटका रहा है और ऐसे में बच्चा आगे चलकर किसी मानसिक रोग का शिकार भी हो सकता है।
इसलिए सही तरीका यही है कि बच्चे के साथ जबरदस्ती न करें बल्कि अगर सच में आपका बच्चा अच्छा डांस करता है या उसे सिंगिंग पसंद है और उसका मन है कि वे ऐसे किसी शो में भाग लेना चाहता है तो फिर आप इसकी पहल करें। बेवजह बच्चों को अपनी हॉबी बदलने के लिए फ़ोर्स न करें।
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अनुवादक: Anoop Singh
चित्र स्रोत: Shutterstock