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क्या माता-पिता की लड़ाई का असर बच्चों के दिमाग पर पड़ता है?

क्या आप अपने बच्चों के सामने अपने पार्टनर के साथ लड़ाइयां करते हैं? अगर हां, तो यह आपके बच्चे के मेंटल हेल्थ पर असर डाल सकती है। आइए जानते हैं डॉक्टर से इस विषय को अच्छे से -

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Written By: Kishori Mishra | Published : June 19, 2026 9:53 AM IST

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Medically Verified By: Dr Shorouq Motwani

Parents fighting effect on children : घर बच्चों के लिए सिर्फ चार दीवारें नहीं होता, बल्कि उनके लिए यह वह जगह होती है जहां वे खुद को सुरक्षित, प्यार और अपनापन महसूस करते हैं। लेकिन जब घर में माता-पिता के बीच लगातार झगड़े, बहस या तनाव का माहौल बना रहता है, तो इसका असर सिर्फ रिश्तों तक सीमित नहीं रहता। कई एक्सपर्ट का कहना है कि यह बच्चों के मेंटल हेल्थ और उनके विकसित हो रहे ब्रेन पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।

मुंबई स्थित नारायणा हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के कंसल्टेंट चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री डॉ. शोरूक मोटवानी का कहना है कि माता-पिता के बीच कभी-कभार मतभेद होना नॉर्मल है। लेकिन जब बच्चे बार-बार ऊंची आवाज, गुस्सा, अपमानजनक शब्द या लंबे समय तक चलने वाले विवाद देखते हैं, तो उनके अंदर असुरक्षा और तनाव की भावना पैदा हो सकती है।

बच्चे सब महसूस करते हैं, भले ही सब समझ न पाएं

डॉक्टर कहते हैं कि अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि छोटे बच्चे झगड़ों का मतलब नहीं समझते, इसलिए उन पर इसका असर नहीं होगा। लेकिन सच्चाई यह है कि बच्चे माहौल में मौजूद तनाव, डर और गुस्से को महसूस कर लेते हैं।

यहां तक कि शिशु भी चेहरे के भाव, आवाज के उतार-चढ़ाव और व्यवहार में बदलाव को पहचान सकते हैं। जब घर में बार-बार लड़ाइयां होती हैं, तो बच्चे यह सोचने लगते हैं कि कहीं परिवार टूट न जाए या कहीं वे खुद इस झगड़े की वजह तो नहीं हैं।

बच्चे के दिमाग को तनाव कैसे प्रभावित करता है?

बचपन में ब्रेन तेजी से विकसित हो रहा होता है। यह समय सीखने, भावनाओं को समझने और सोशल स्किल डेवलेप करने के लिए बहुत ही जरूरी माना जाता है। लगातार तनाव की स्थिति में शरीर कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन अधिक मात्रा में बनाने लगता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो इसका असर ब्रेन के उन हिस्सों पर पड़ सकता है जो मेमोरी, भावनाओं और ध्यान को कंट्रोल करते हैं। डॉक्टर कहते हैं ऐसी स्थिति में बच्चों की कई तरह की दिक्कतों हो सकती हैं, जैसे-

  • ध्यान लगाने में कठिनाई
  • पढ़ाई में कमजोर प्रदर्शन
  • याददाश्त से जुड़ी समस्याएं
  • भावनात्मक अस्थिरता
  • नींद की परेशानी
  • एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षण, इत्यादि।

वहीं, हार्वर्ड सेंटर ऑन द डेवलपिंग चाइल्ड में भी यही  कहा गया है कि बचपन में लंबे समय तक रहने वाला टॉक्सिक स्ट्रेस मस्तिष्क के विकास पर असर डाल सकता है।

बच्चे अपने व्यवहार से जताते हैं मन की बात

हर बच्चा अपनी भावनाएं शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाता। इसलिए कई बार उनका तनाव व्यवहार में दिखाई देता है। छोटे बच्चे ऐसी स्थिति में ज्यादा चिड़चिड़े, गुस्सा दिखाना, बार-बार रोना, खाने या सोने में परेशानी करना जैसे व्यवहार दिखाने लगते हैं। वहीं, टीनएजर्स की बात करें, तो वो इस स्थिति में परिवार से दूरी बनाने लगते हैं। धीरे-धीरे दोस्तों से भी कट सकते हैं और रिस्क भरे व्यवहार अपना सकते हैं। इसलिए बच्चों के सामने लड़ाईयां कम करने की कोशिश करें।

बच्चों को कैसा महसूस कराएं?

बच्चों को यह महसूस कराएं कि वे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। पेरेंट्स उनसे काफी प्यार करते हैं और माता-पिता के झगड़े उनकी गलती नहीं हैं।

पेरेंट्स के लिए कुछ जरूरी टिप्स

डॉक्टर कहते हैं कि आपको अपने बच्चों के सामने लड़ाई करने से पहले कुछ बातों पर ध्यान देने की और सोचने की जरूरत है, जैसे-

  • बच्चों के सामने तीखी बहस से बचें
  • लड़ाईयों को सम्मानजनक तरीके से सुलझाएं
  • बच्चों को भरोसा दिलाएं कि वे सुरक्षित हैं
  • झगड़े के बाद सामान्य और पॉजिटिव व्यवहार दिखाएं

जरूरत पड़ने पर पारिवारिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें, इत्यादि।

Disclaimer : मतभेद हर रिश्ते का हिस्सा हैं, लेकिन जिस तरह से माता-पिता उन्हें संभालते हैं, वह बच्चों के भावनात्मक और मानसिक विकास पर गहरा असर डाल सकता है। एक ऐसा घर जहां सम्मान, संवाद और प्यार हो, बच्चों को आत्मविश्वासी, भावनात्मक रूप से मजबूत और मानसिक रूप से स्वस्थ बनने में मदद करता है।