Night Terror in Kids: क्या आपका बच्चा नींद में अचानक रोने और कांपने लगता है? नाइट टेरर हो सकती है इसकी वजह, जानें क्या है यह बीमारी

अगर आपका बच्चा नाइट टेरर (Night Terror in Kids)  की समस्या से परेशान है, तो उसकी हार्ट बीट बढ़ सकती है, उनकी सांसें तेज़ हो सकती हैं, बहुत अधिक पसीना बह सकता है और  उनकी पुतलियां उलट-पलट सकती हैं। हालांकि, यह सारी समस्याएं केवल कुछ मिनटों के लिए रह सकती हैं, लेकिन नाइट टेरर की वजह से उठने के बाद बच्चे को कम से आधा घंटे तक सोने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि नाइट टेरर की समस्या बच्चे के लिए खतरनाक नहीं होती। क्योंकि, उठने के बाद बच्चे को कुछ भी याद नहीं रहता। हालांकि,  बार-बार होने वाली इस परेशानी से बच्चे और उसके मां-बाप की नींद (Lack of Sleep) पूरी नहीं होने देती है।  

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : June 10, 2020 9:51 PM IST

Night Terror in Kids: आप दुनियाभर की मुश्किलों से अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन, जब बात डरावने सपनों (Nightmare) की आती है तो वहां आपका बस नहीं चलता। किसी भी माता या पिता के लिए अपने बच्चे को तकलीफ में देखना पसंद नहीं आता। इसीलिए, जब बच्चे बुरे सपने (Scary Dreams) देखकर अचानक चीख उठते हैं और नींद से उठकर बैठ जाते हैं। तब, उनके माता-पिता भी परेशान हो जाते हैं।  नाइट टेरर (Night Terror in Kids)  ऐसी ही एक समस्या है। जो, बुरे सपनों तक ही सीमित नहीं होती है। आमतौर पर जब बुरे सपने देखने के बाद रोते हुए जाग पड़ते हैं। तब, उन्हें थोड़ी देर में शांत करके सुला सकते हैं। लेकिन, नाइट टेरर, नाइट मेयर यानि बुरे सपनों से ज़्यादा डरावना होता है।  (Night Terror )

आपका बच्चा है नाइट टेरर से परेशान, इन संकेतों से समझें (Signs That Your Child Is Having Night Terror)

नाइट टेरर को स्लीप टेरर भी कहते हैं। आमतौर पर सोने के बाद 2 से 3 घंटों में बच्चे इसका अनुभव करते हैं। जब, बच्चे सबसे गहरी नींद में रहते हैं। 3-12 वर्ष के बच्चों को यह समस्या अधिक होती है। जो, अक्सर नाइट टेरर की वजह से रोते हुए, कांपते हुए और चीखते-चिल्लाते हुए उठते हैं।

अगर आपका बच्चा नाइट टेरर (Night Terror in Kids)  की समस्या से परेशान है, तो उसकी हार्ट बीट बढ़ सकती है, उनकी सांसें तेज़ हो सकती हैं, बहुत अधिक पसीना बह सकता है और  उनकी पुतलियां उलट-पलट सकती हैं। हालांकि, यह सारी समस्याएं केवल कुछ मिनटों के लिए रह सकती हैं, लेकिन नाइट टेरर की वजह से उठने के बाद बच्चे को कम से आधा घंटे तक सोने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि नाइट टेरर की समस्या बच्चे के लिए खतरनाक नहीं होती। क्योंकि, उठने के बाद बच्चे को कुछ भी याद नहीं रहता। हालांकि,  बार-बार होने वाली इस परेशानी से बच्चे और उसके मां-बाप की नींद (Lack of Sleep) पूरी नहीं होने देती है।

अब आप जानने के लिए उत्सुक होंगे कि नाइट टेरर (Night Terror Causes) के पीछे की वजहें क्या हैं। आमतौर पर अनुवांशिक कारण नाइट टेरर की एक प्रमुख वजह बन सकते हैं। इसीलिए, हो सकता है कि यह समस्या आपके बच्चे को परिवार के किसी सदस्य से ही मिली हो। इसके अलावा, तनाव (Stress), बेचैनी या एंग्जायटी (Anxiety), बुखार, दिनचर्या में बदलाव, कैफीन का बहुत अधिक सेवन (Caffeine Side Eeffcts), नींद की कमी और कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट्स के कारण ऐसा हो सकता है।

नाइट टेरर से परेशान बच्चे की ऐसे करें मदद (How To Treat Your Child’s Night Terrors):

इस समस्या का कोई इलाज नहीं है। लेकिन, बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या कम हो सकती है। आपके लिए नाइट टेरर के अनुभव को रोकना संभव नहीं है। इसीलिए, यह आपके लिए एक दुखभरी बात हो सकती है। जब आपका बच्चा नाइट टेरर की परेशानी महसूस करे तो, उसे नींद से ना उठाएं। क्योंकि, जागने के बाद हो सकता है कि वे उलझन में पड़ जाएं और उन्हें दोबारा सोने में परेशानी हो। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे में बच्चे के पास लेट जाएं और उन्हें सोने में मदद करें।

अगर बच्चा बार-बार नाइट टेरर की परेशानी महसूस करता है तो पैरेंट्स करें ये काम (Parenting Tips)-

  • जब, आपको अंदाज़ा हो जाए कि सोने के कितने समय बाद वह नाइट टेरर के बाउट को महसूस करता है। तो, बच्चे को उस समय से ठीक पहले उठा दें।  कम से कम बच्चे को 5 मिनट के लिए जगाकर रखें और उसे बिस्तर से बाहर ले जाएं।
  • नींद में डिस्टर्बेंस की वह बनने वाली सभी चीज़ों को बच्चे के कमरे से हटा दें। जैसे- टीवी, कम्प्यूटर या शोर करने वाले खिलौने।
  • बच्चे को देर तक जागने से रोकें। इस बात भी ध्यान रखें कि बच्चा सोने से पहले ज़्यादा थका हुआ (Overtired) ना हो।
  • तनाव ना होने दें।
  • बच्चे को एक ही समय पर सोने-जागने की आदत डालें।
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