hamburger icon
A
Read in English

शिशु के साथ सोने से हो सकता है नुकसान! जानें क्या कहती है रिसर्च

अगर माता-पिता अपने शिशु के साथ एक ही बेड पर सोते हैं, तो इससे उनमें कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे-घुटन, गंभीर चोट लगना, सांस लेने में परेशानी आदि हो सकती है। क्या वाकई इन बातों में सच्चाई है, जानें क्या कहती है स्टडी...

WrittenBy

Written By: Kishori Mishra | Updated : May 12, 2020 6:59 PM IST

Newborn Care: नवजात शिशु के साथ बहुत से माता-पिता एक ही बिस्तर पर सोते हैं। वहीं, कुछ ऐसे माता-पिता भी होते हैं, जो उनके लिए दूसरे बिस्तर या स्थान का इंतजाम करते हैं, लेकिन क्या आपने सोचा है कि आपके शिशु के लिए कौन सा सोने का तरीका सबसे सही और सुरक्षित होता है? हाल ही में नवजात शिशु को लेकर (Newborn Care) एक रिसर्च सामने आया है।

इस रिसर्च में खुलासा हुआ है कि माता-पिता को अपने नवजात शिशु को बगल में नहीं सुलाना चाहिए। शिशु को सुलाने के लिए एक अलग स्थान या फिर बेड की व्यवस्था होनी चाहिए। यही तरीका सबसे सुरक्षित होता है। अगर माता-पिता अपने शिशु के साथ एक ही बेड पर सोते हैं, तो इससे शिशु में कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जैसे घुटन, गंभीर चोट लगना, गिर जाना, दम घुटना, सांस लेने में परेशानी इत्यादि।

ब्रेस्टफीडिंग के लिए ही बिस्तर करें शेयर

हालांकि, रिसर्च में ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मां को शिशु के साथ सोना सही माना गया है। इस रिसर्च में कहा गया है कि मां को स्तनपान कराने के दौरान ही शिशु के साथ बिस्तर शेयर करना चाहिए। अगर मां बच्चे के साथ सोकर उन्हें ब्रेस्टफीडिंग कराती है, तो इससे शिशु लंबे समय तक फीडिंग करते हैं। इसके साथ ही उन्हे नींद भी काफी अच्छी आती है।

स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा है बिस्तर शेयर करना

शिशु के साथ बिस्तर साझा करने से उन्हें कुछ स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। उनके साथ बिस्तर शेयर करने से सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम (एसआईडीएस) का जोखिम बढ़ सकता है। इसके साथ ही शिशुओं के साथ बेड शेयर करने से आगे चलकर उन्हें अकेले सोने में परेशानी हो सकती है। इससे बच्चे अपने माता-पिता पर अधिक निर्भर हो सकते हैं।

क्या कहती है दूसरी रिपोर्ट

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, शिशु के साथ बिस्तर शेयर करना फायदेमंद हो सकता है। इससे माता-पिता और बच्चे का संबंध मजबूत होता है। वहीं, डॉक्टर्स भी मानते हैं कि नवजात शिशुओं को अधिक छूने की जरूरत होती है। शिशु हमेशा शारीरिक निकटता पसंद करते हैं, क्योंकि बिस्तर शेयर करने से उन्हें गर्माहट मिलती है, जिसकी उन्हें अधिक जरूरत होती है।

क्या कहते हैं रिसर्च के परिणाम

शिशु के साथ बिस्तर शेयर करने को लेकर अभी भी शोधकर्ताओं के बीच बहस चल रही है कि क्या करना सही है और क्या करना गलत? वहीं, कुछ डॉक्टर्स ये भी सोचते हैं कि बेड शेयर करना माता-पिता पर निर्भर करता है। अगर वे अपने शिशु के साथ सोना आवश्यक मानते हैं, तो वे अपने बच्चे के साथ सो सकते हैं। हालांकि, इस दौरान उन्हें बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ उपाय अपनाने चाहिए, ताकि बच्चे को किसी भी तरह की कोई तकलीफ या चोट ना लगे।

दिन में सोने से बच्चों की मेमोरी पावर होती है स्ट्रॉन्ग, एक झपकी लेने से भी होगा फायदा

लॉकडाउन में बच्चों के टीवी और मोबाइल देखने से हो गए हैं परेशान, तो फॉलो करें ये टिप्स

लॉकडाउन में बच्चे हो रहे हैं चिड़चिड़े, तो इन तरीकों से रखें उनका ख्याल

बच्चों को भी होता है थायराइड, समय से पहले कराएं जांच और इलाज

Parenting Tips: बच्चों के मन से भगाएं कोरोना वायरस का डर, अपनाएं ये टिप्स