Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
अक्सर नवजात शिशुओं को पीलिया हो जाता है। 70 प्रतिशत शिशुओं में पीलिया होने के लक्षण पाए जाते हैं। जन्म के बाद एक सप्ताह तक शिशुओं में यह समस्या नजर आती है। यह बहुत आम बात है। सामान्य रूप से पीलिया हो, तो वह खुद ब खुद दो दिन में खत्म हो जाता है, लेकिन चार-पांच दिन तक इसकी समस्या बनी रहे, तो इलाज कराना भी जरूरी है। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान सावधानीपूर्वक कदम उठाकर आप अपने नवजात बच्चे को पीलिया से बचा सकती हैं।
शरीर में बिलीरुबिन के बढ़ने से शिशुओं में पीलिया होता है। ट्रीटमेंट की जरूरत तब होती है, जब बच्चे के खून में बिलीरुबिन का स्तर बहुत ज्यादा हो। खून के जरिए बिलीरुबिन शरीर की स्किन में जमा हो जाता है। इसके बाद शिशु की त्वचा और आंख पीली नजर आने लगती है। इसके लिए कुछ टेस्ट करवाने की सलाह डॉक्टर देते हैं। किसी-किसी केस में इलाज की जरूरत नहीं होती, क्योंकि उनके खून में बिलीरुबिन का लेवल कम होता है। ऐसे में 10-15 दिनों के अदंर बच्चे की स्थिति में सुधार होने लगती है परेशान होनी की जरूरत नहीं है।
इससे पहले की बच्चे की आंखें और शरीर हल्का पीला नजर आए, आप इन टिप्स को अपना कर उसे गंभीर रूप से पीलिया होने से बचा सकते हैं-
सुबह हल्की धूप में लिटाएं
हल्का पीलिया होने पर किसी तरह के ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती। बच्चे को सुबह की हल्की धूप में लिटाना चाहिए। आधे घंटे लगातार तीन-चार दिन ऐसा करने से पीलिया की समस्या कम होने लगती है। इससे त्वचा में मौजूद बिलीरुबिन अपने आप कम होने लगते हैं और यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
बार-बार ब्रेस्टफीड कराएं
इस स्थिति में शिशु का शरीर हाइड्रेट रखें। इसके लिए स्तनपान कराना जरूरी है। शरीर से बिलीरुबिन को बाहर निकालने के लिए हाइड्रेशन जरूरी है। ऐसे में बच्चे को लगातार दूध पिलाना बेहद आवश्यक है। ऐसे खाद्य पदार्थ का सेवन करें, जिससे दूध अधिक बनें। दिन भर में पांच-छह बार बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती रहें।
फोटोथेरेपी से इलाज
फोटोथेरेपी रोशनी के जरिए किया जाने वाला ट्रीटमेंट है। फोटो-ऑक्सीडेशन नामक प्रक्रिया को पीलिया से पीड़ित नवजात शिशुओं के खून में बिलीरुबिन के स्तर को कम करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इससे बिलीरुबिन में ऑक्सीजन मिला दी जाती है ताकि यह पानी में आसानी से खत्म हो जाए। इससे खून से बिलीरुबिन निकलने में भी मदद मिलती है।
चित्रस्रोत:Shutterstock.