नवजात शिशु की पॉटी को लेकर 5 बड़े मिथक, डॉक्टर ने बताई असली हकीकत

myths and facts about baby potty: बच्चों की पॉटी की जब बात आती है, तो ज्यादातर पेरेंट्स बिना कुछ सोचे-समझें बातों पर भरोसा कर लेते हैं। आज हम आपको बेबी पॉटी से जुड़ी 5 ऐसी ही बातों की जानकारी देने वाले हैं।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : December 17, 2025 6:14 PM IST

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Myths and Facts about Baby Potty: अगर आप भी न्यू पेरेंट्स बने हैं और बच्चों की सेहत को लेकर हर बार गूगल और एआई की मदद लेते हैं तो रुक जाइए। क्योंकि बच्चों की सेहत से जुड़ी इंटरनेट पर मौजूद हर जानकारी सही नहीं है। खासकर बच्चों की पॉटी को लेकर कई ऐसी बाते हैं जो बिल्कुल गलत है और अगर आप इन्हें सही मानकर कोई घरेलू उपाय अपनाते हैं तो इससे बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। आज इस लेख में लखनऊ के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण आनंद से जानेंगे बच्चों की पॉटी से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई के बारे (Baccho Ki Potty se Jude Myths and Facts) में।

Myth 1: बच्चों का रोज पॉटी करना जरूरी है

Facts : डॉ. तरुण आनंद के अनुसार, न्यू पेरेंट्स को अक्सर ऐसा लगता है कि नवजात शिशु का रोजाना पॉटी करना जरूरी होता है। लेकिन सच्चाई ये है कि बच्चे का रोजाना पॉटी करना जरूरी नहीं है। जो बच्चे स्तनपान करते हैं, वो दिन में 1 बार या फिर 5- 7 दिन में 1 बार भी पॉटी कर सकते हैं। ये बिल्कुल सामान्य बात है। अब पेरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना जरूरी है अगर बच्चा 5 से 7 दिन में पॉटी कर रहा है, तो वो मुलायम है या फिर हार्ड।

Myths 2: बच्चे की हरी पॉटी का मतलब बीमारी है

Fact: बच्चों की हरी पॉटी अक्सर फोरमिल्क-हिंडमिल्क में असंतुलन, आयरन ड्रॉप्स या हल्के डाइजेशन में बदलाव के कारण होती है। बच्चे को हरी पॉटी होने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि वो बीमार है। अगर कोई बच्चा फॉर्मूला मिल्क पी रहा है तो उसे हरी पॉटी होना बहुत ही सामान्य बात है।

Myths 3: सख्त पॉटी का मतलब हर बार डिहाइड्रेशन होता है

Facts : ये बात बिल्कुल गलत है कि बच्चे को सख्त पॉटी होने का मतलब ये है कि उसे डिहाइड्रेशन यानी की उसके शरीर में पानी की कमी हो रही है। जब बच्चा शुरुआत में सॉलिड खाना शुरू करते हैं या शिशु के फॉर्मूला मिल्क में बदलाव आता है, तो उसकी पॉटी सख्त हो सकती है। अगर आपका बच्चा लगातार सख्त पॉटी कर रहा है, तो कोई घरेलू उपाय अपनाने की बजाय इस विषय पर डॉक्टर से बात करें।

Myths 4: पीली पॉटी का मतलब हमेशा इन्फेक्शन होता है।

Facts: अक्सर पेरेंट्स को ऐसा लगता है कि बच्चे की पॉटी का रंग पीला है, तो उसे किसी प्रकार का इंफेक्शन हुआ है। लेकिन असल में जो बच्चे ब्रेस्टफीडिंग करते हैं, उनकी पॉटी पीली और दानेदार हो जाती है। ये बहुत ही सामान्य सी बात है।

Myths 5 : बार-बार पॉटी = डायरिया

अगर पॉटी पानी जैसी नहीं है और बच्चा एक्टिव है और ठीक से दूध पी रहा है, तो नवजात शिशुओं में बार-बार पॉटी होना नॉर्मल है। बच्चे को बार-बार पॉटी आने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसे डायरिया हुआ है। डॉ. तरुण आनंद का कहना है कि नवजात शिशु सामान्य रूप से दिन में 5 से 7 बार पॉटी करते हैं।

Highlights

  • छोटे बच्चों की पॉटी सख्त होना आम बात है।
  • फॉर्मूला मिल्क की वजह से पॉटी सख्त हो सकती है।
  • बच्चे की पॉटी का रंग बदलना सामान्य है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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