ज्‍यादातर महिलाएं नहीं चाहतीं दूसरा बच्‍चा, जानें क्‍या हो सकता है नुकसान

सिंगल चाइल्‍ड फैमिली न्‍यूक्लियर फैमिली से भी होती हैं ज्‍यादा खतरनाक ।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 29, 2018 12:17 PM IST

यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री के नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे द्वारा इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत में सिर्फ 24 प्रतिशत शादीशुदा महिलाएं दूसरा बच्चा चाहती है। सरकारी डाटा के अनुसार इसमें 10 साल में 68 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। 15 से 49 साल के बीच की शादीशुदा महिलाओं पर सर्वे किया गया जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि सिर्फ 24 प्रतिशत महिलाएं दूसरा बच्चा चाहती थी। वहीं पुरुषों में यह संख्या 27 प्रतिशत थी।

क्‍या है कारण 

एक्सपर्ट ने बताया कि इसका कारण अच्छा करियर, उच्च स्तर का जीवन जीना और देरी से मां बनना है। वहीं शहर में रहने वाले पढ़े-लिखे जोड़े अपनी उम्र के तीसरे और चौथे दशक में पहला बच्‍चा प्‍लान कर रहे हैं। कॅरियर की दौड़ में शादियां देर से हो रहीं हैं। वहीं शादी के बाद भी लोग बच्‍चा प्‍लान करने के लिए अच्‍छा-खासा समय ले रहे हैं। इसके पीछे भी वजह कॅरियर और लाइफ स्‍टाइल ही है। ऐसे में वे  एक ही बच्चे से ही खुश हैं।

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2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 54 प्रतिशत महिलाओं के दो बच्चे थे। वहीं 25 से 29 साल के बीच की 16 प्रतिशत महिलाओं के एक भी बच्चे नहीं थे। पापुलेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अनुसार रोज बदलती जीवनशैली को देखते हुए लोगों में बच्चों को अच्छी पढ़ाई, अच्छे कपड़े, गैजेट्स और सभी तरह की लक्जरी देने के लिए वे दूसरा बच्चा करने के बारे में नहीं सोचते हैं।

क्‍या है नुकसान

जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि सिंगल चाइल्‍ड फैमिली न्‍यूक्लियर फैमिली से भी ज्‍यादा खतरनाक होती हैं। यहां बच्‍चों में अकेलेपन और अवसाद को जोखिम ज्‍यादा रहता है। जबकि अकेले पल रहे बच्‍चे बहुत ज्‍यादा डिमांडिंग और समझौता न पसंद करने वाले होते हैं।

इसके विपरीत सिबलिंग के साथ बच्‍चों में शेयरिंग की आदत डेवलप होती है। वे अकेले पल रहे बच्‍चों से ज्‍यादा कॉन्‍फीडेंट और समझौतावादी प्रवृत्ति के होते हैं।

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