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मानसून में नवजात और छोटे बच्चों का रखें खास ख्याल, इंफेक्शन से बचाने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

Newborn baby care During monsoon : मानसून के दौरान नवजात की केयर बहुत ही जरूरी होती है। सही केयर से आप उन्हें इस सीजन में सुरक्षित रख सकते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से-

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Written By: Kishori Mishra | Published : July 14, 2026 10:02 AM IST

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Medically Verified By: Dr. Urvashi Rana

Monsoon Care tip for Newborn  : बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन साथ ही इंफेक्शन और कई मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। मुख्य रूप से नवजात और छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए वे इस मौसम में जल्दी बीमार पड़ सकते हैं। मानसून के दौरान वायरल इंफेक्शन, पेट से जुड़ी समस्याएं, डेंगू, मलेरिया और स्किन संबंधी संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर बच्चों को स्वस्थ रखा जा सकता है। इस विषय की अधिक जानकारी के लिए हमने अहमदाबाद स्थित नारायणा हॉस्पिटल की कंसल्टंट पीडियाट्रिक्स डॉ. उर्वशी राणा से बातचीत की है। आइए क्या कहती हैं डॉक्टर

साफ-सफाई का रखें पूरा ध्यान

नवजात और छोटे बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए साफ-सफाई सबसे जरूरी है। बच्चे को गोद में लेने, दूध पिलाने या उसका खाना बनाने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। बच्चे की दूध की बोतल, खिलौने, चम्मच और अन्य इस्तेमाल की चीजों को नियमित रूप से साफ और स्टेरिलाइज करें। अगर घर में किसी को सर्दी, खांसी या बुखार है, तो उसे नवजात से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी हाथों की स्वच्छता को संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानता है।

Newborn Baby Care

6 महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाएं

छह महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए मां का दूध सबसे उत्तम आहार है। इसमें मौजूद एंटीबॉडी और पोषक तत्व बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं और कई तरह के संक्रमण से बचाव करते हैं। मां को भी पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना चाहिए ताकि बच्चे को पर्याप्त पोषण मिल सके। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस बात पर जोर देता है कि जन्म के पहले छह महीनों तक सिर्फ स्तनपान कराने की सलाह देता है।

मच्छरों से सुरक्षित रहना है जरूरी

भारत सरकार का राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NCVBDC) का कहना है कि बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा रहता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। बच्चों को सुबह और शाम पूरे बाजू के कपड़े पहनाएं। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और खिड़कियों पर जाली लगवाएं। छोटे बच्चों के लिए केवल डॉक्टर की सलाह से सुरक्षित मॉस्किटो रिपेलेंट का उपयोग करें।

बच्चों को दं क्लीन और ताजा खाना

मानसून में दूषित भोजन और पानी से पेट का संक्रमण जल्दी हो सकता है। इसलिए बच्चों को हमेशा ताजा और घर का बना भोजन दें। लंबे समय तक खुला रखा हुआ खाना न खिलाएं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें। पीने के लिए उबला या फिल्टर किया हुआ पानी दें और बच्चे की बोतल व बर्तनों को नियमित रूप से स्टेरिलाइज करें। CDC के मुताबिक, बच्चों में फूड-बॉर्न इंफेक्शन से बचने के लिए सुरक्षित भोजन और स्वच्छ पानी पर जोर देता है। Newborn Baby Care

स्किन की सफाई भी है जरूरी

बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से बच्चों में रैशेज, फंगल इंफेक्शन और डायपर रैश की समस्या हो सकती है। बच्चे को रोज नहलाएं और शरीर, खासकर त्वचा की सिलवटों को अच्छी तरह सुखाएं। डायपर समय-समय पर बदलें और नया डायपर पहनाने से पहले त्वचा को पूरी तरह सूखने दें। बच्चों को सूती और पसीना सोखने वाले कपड़े पहनाएं।

समय पर कराएं वैक्सीनेशन

मानसून हो या कोई भी मौसम, बच्चों का टीकाकरण समय पर कराना बेहद जरूरी है। टीके कई गंभीर संक्रमणों से बचाव में मदद करते हैं। यदि किसी वैक्सीन की तारीख नजदीक है, तो उसे टालें नहीं और अपने शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार सभी टीके लगवाएं। भारत सरकार के निवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के अनुसार बच्चों का समय पर टीकाकरण कई जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।

Disclaimer : अगर बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, बार-बार उल्टी, दस्त, दूध या खाना न पीना, अत्यधिक सुस्ती, दौरे पड़ना या बुखार के साथ शरीर पर दाने दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।