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Written By: Atul Modi | Updated : February 13, 2023 7:01 PM IST
बच्चों का स्वभाव चंचल होता है. वह आए दिन शरारतें करते हैं. उनकी ये शरारतें और नादानियां आपको अच्छी लगने लगती हैं. लेकिन अति किसी भी चीज की अच्छी नहीं होती है. बच्चों की शरारतें जब ज्यादा बढ़ जाती है तो आपको परेशान भी करने लगती है. कई बार बच्चे आपस में झगड़ने भी लग जाते हैं, ऐसे में उन्हें सुधारना और सही दिशा दिखाना पैरेंट्स की जिम्मेदारी बन जाती है. कुछ पैरेंट्स तो बच्चों के साथ मारपीट करने लगते हैं. उन्हें डांटने, डपटने लगते हैं. डांटने और मारने से बच्चों की मानसिक स्थिति बहुत ज्यादा प्रभावित होती है, क्योंकि बच्चों का मन बेहद कोमल होता है. इस कंडीशन में आप बच्चों को किस तरह से सही दिशा दिखा सकते हैं. आइए जानते हैं.
सबसे पहले जरूरी है कि बच्चों को पॉजिटिव एनवायरमेंट मिले. ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चे वही काम करते हैं जैसा वह देखते हैं. अगर उनके सामने कोई लड़ाई झगड़ा करता है तो वह इसे जल्दी सीखेंगे. साथ उम्र बढ़ने से पहले ही उनके अंदर उग्रता आ जाएगी. यही स्वभाव बदलने के लिए उनके व्यवहार में सकरात्मता लाने की कोशिश करें.
बच्चों के सामने हमेशा विनम्र रहें. विनम्रता बच्चों को मिलजुलकर रहना सिखाती है. उनके सामने कभी पछपात न करें. ऐसा करने पर बच्चों के मन में असमानता का भाव और हीन भावना आएगी. इसलिए बच्चों को कभी ये फील होने न दें. कि आप उससे कम और दूसरे बच्चे से ज्यादा प्रेम करते हैं. ऐसे में आप विनम्र रहें.
बच्चों को हर वक्त सही ठहराना भी सही नहीं है क्योंकि कभी-कभी आप बीच-बचाव करते समय अपने बच्चों को सही और सामने वाले को गलत साबित करते हैं. ऐसे में आपके बच्चे आप पर ही निर्भर रह जाते हैं और उन्हें कभी सही और गलत के बीच का फर्क भी नहीं समझ आता है. वहीं अगर आपने सामने वाले बच्चे का पक्ष लिया है और अपने बच्चे को गलत ठहरा रहे हैं तो आपके बच्चे में ईर्ष्या का भाव भी पैदा हो सकता है. इसलिए सामंजस्य बना कर रहे और बच्चों को सही गलत का फर्क बताएं.
कभी-कभी अकेलापन भी जरूरी होता है क्योंकि अकेलेपन में आप अपने आप को पहचान पाते हैं. मन में चल रहे उथल पुथल का मंथन कर पाते हैं, तो इसलिए बच्चों को भी प्यार के साथ ही साथ थोड़ी देर के लिए अकेला भी छोड़े क्योंकि बच्चे अगर अकेले रहेंगे तो कुछ सोचने और समझने की शक्ति भी बढ़ती है. लेकिन वातावरण उनके साथ अनुकूल ही होना चाहिए.
बच्चे किस संगति में पड़ रहे हैं इसका विशेषतौर पर ध्यान देना जरूरी है. गलत संगति बच्चों को बिगाड़ भी सकती है. इसलिए बच्चों को हमेशा अपनी निगरानी में रखना चाहिए. बच्चों से कौन मिल रहा है, बच्चों का फ्रेंड कौन है और आपका बच्चा कहां आता और जाता है इन सबका डेटा आपके पास होना चाहिए.