यूं सिखाएं बच्चों को टाइम मैनेज करने की आदत

शुरुआत से ही बच्चों की पढ़ाई और खेलकूद के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उन्हें टाइम-टेबल फॉलो कराना जरूरी है।

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Written By: Anshumala | Published : July 18, 2018 1:36 PM IST

गर्मी की छुट्टियां खत्म होते ही बच्चों का वही पुराना रुटीन शुरू हो जाता है। रोज सुबह जागना, स्कूल के लिए रेडी होना, दौड़ते-भागते स्कूल की बस पकड़ना, पढ़ाई करना, होमवर्क करना और बस आधे-एक घंटे के लिए खेलने चले जाना। आज के बच्चों को इतना वक्त नहीं मिल पाता कि वे कुछ फिजिकल एक्टिविटी कर पाएं। जितना बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से पढ़ाई और स्कूल से संबंधित चीजों से बाहर निकलकर अपने लिए पॉजिटिव और हेल्दी लाइफ जिएंगे, उतना ही उनके दिमाग और पूरे शारीरिक विकास पर सकारात्मक असर होगा। परीक्षा के समय बच्चे और भी ज्यादा दबाव में आ जाते हैं। यदि आप चाहती हैं कि बच्चा हर काम बेहतर तरीके से करे तो सबसे पहले टाइम को सही तरीके से मैनेज करना होगा। तभी बच्चों के लिए हर काम के लिए प्रॉपर समय निकल पाएगा।

यूं सिखाएं टाइम मैनेजमेंट

1 शुरुआत से ही बच्चों की पढ़ाई और खेलकूद के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उन्हें टाइम-टेबल फॉलो कराना जरूरी है। इससे कई फायदे होते हैं। बच्चे अपने समय का सदुपयोग करना सीखते हैं। इससे उन्हें खेलने के लिए भी प्रॉपर टाइम मिलेगा साथ ही उनकी पढ़ाई भी सुचारू रूप से चलती रहेगी। इससे उन्हें टाइम मैनेजमेंट आएगा और वे अनुशासित भी बनेंगे।

2 उनके खाना खाने का समय भी फिक्स करें। स्कूल से आने के बाद उन्हें खाने के लिए दे दें। कई बच्चे भूख नहीं है का बहाना करते हैं। आप उनकी न सुनें। थोड़ा बहुत खाने के लिए जरूर दें। रात के समय भी 9 से 10 के बीच डिनर दे दें। खानपान पर विशेष ध्यान देने से उनके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहेंगे, जिससे उनका विकास भी प्रॉपर होगा और वे पढ़ाई और परीक्षा के दौरान मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होकर तनावमुक्त परीक्षा दे सकेंगे।

3 पढ़ाई करने के लिए भी समय फिक्स करें। स्कूल से आने के बाद दो घंटे सोने के लिए कहें। जब जागें तो उन्हें हल्का-फुल्का स्नैक्स दें और फिर खेलने के लिए भेज दें। दिन में सो जाएंगे, तो उन्हें रात में जल्दी नींद नहीं आएगी। ऐसे वे अपना स्कूल का होमवर्क भी पूरा कर लेंगे। सबसे बढ़कर हमें उन्हें यह यकीन दिलाना चाहिए कि हम हमेशा उनका साथ देने के लिए मौजूद हैं। सिर्फ एक परीक्षा जिंदगी को निर्धारित नहीं करती, इसके आगे जिंदगी के मायने और भी हैं। जरूरत है, तो बस एक सही सकारात्मक सोच की।

4 अलार्म क्लॉक के जरिए उसे समय के मोल के बारे में बताया जा सकता है जैसे शाम को 7 से 9 बजे का समय पढ़ाई का है और फिर आधे घंटे मोबाइल पर गेम या टीवी पर कार्टून देखने का समय है। 7 बजे का अलार्म लगा दीजिए। इससे वे समय पर पढ़ने के लिए बैठ जाएंगे। उसे लगेगा कि यदि वह दो घंटे पढ़ लेगा तो टीवी देखने को मिलेगा। कई बार बच्चे टीवी देखने के चक्कर में टाइम टेबल भूल जाते हैं। ऐसे में आप इस आदत को नजरअंदाज न करें। उन्हें समय पर सोने की बात याद दिलाएं।

5 कैलेंडर बना कर हर रोज उस पर टिक मार्क करें। बच्चे ने जो भी काम समय पर किया है, उस पर टिक लगाने के लिए उसे खुद कहें। यदि कैलेंडर पर लिखा है कि सुबह 6.30 पर उठना है, 6:45 तक नहा लेना है, 7 बजे तक रेडी होकर 7:15 तक बस स्टॉप पर पहुंच जाना है। यदि इन सभी बातों को समय पर बच्चा फॉलो कर रहा है, तो कैलेंडर पर यस का टिक लगा देखकर उसे खुद भी बहुत अच्छा महसूस होगा।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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