बच्चों का आक्रामक व्यवहार, झूठ बोलने की आदत कहीं कंडक्ट डिसऑर्डर तो नहीं? जानें इसके लक्षण, कारण, इलाज

क्या आपका बच्चा बात-बात में आक्रामक हो जाता है? आपसे झूठ बोलने लगा है? यदि हां, तो यह 'कंडक्ट डिसऑर्डर' हो सकता है। जानें, इसके लक्षण, कारण, इलाज....

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Written By: Anshumala | Updated : August 21, 2021 12:17 AM IST

What is Conduct Disorder in Kids: क्या आपका बच्चा कुछ दिनों से बात-बात पर आक्रामक व्यवहार करता है? झूठ बोलने लगा है या फिर आपको धोखा देने लगा है? यदि हां, तो हो सकता है वह मेंटल डिसऑर्डर (Mental disorder in Kids) की समस्या से ग्रस्त हो। इस तरह के मानसिक विकार को 'कंडक्ट डिसऑर्डर' (Conduct Disorder) कहा जाता है। एक एक खतरनाक मानिसक विकार है, जिसका इलाज समय पर कराना बहुत जरूरी है। छोटे बच्चों और किशोरों को ही यह समस्या होती है। आपका बच्चा बहुत अधिक चिडचिड़ा, हिंसात्मक व्यवहार करे, तो यह संभवत: कंडक्ट डिसऑर्डर की समस्या है। कंडक्ट का मतलब होता है व्यवहार या आचरण। यह मानसिक समस्या होने पर बच्चों और किशोरों के आचरण, व्यवहार में काफी हद तक बदलाव आ जाता है। हिंसात्मक वातावरण, घर में लड़ाई-झगड़े होने के कारण इस तरह की समस्या धीरे-धीरे बच्चों के दिमाग (Mental Health of Kids) पर हावी होने लगती है।

कंडक्ट डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms of Conduct Disorder in Hindi)

  • आक्रमक व्यवहार
  • हिंसात्मक स्वभाव
  • दूसरों से अधिक झगड़ा करना
  • क्रूर व्यवहार करना
  • डिस्ट्रैक्टिव व्यवहार
  • घर की चीजों को फेंकना
  • झूठ बोलना, बड़ों को धोखा देना

कंडक्ट डिसऑर्डर के कारण (Causes of Conduct Disorder in Hindi)

  • बायोलॉजिकल
  • अनुवांशिक
  • आसपास का माहौल
  • परिवार में लड़ाई-झगड़े देखना

कंडक्ट डिसऑर्डर का इलाज (Treatment of Conduct Disorder in Hindi)

कंडक्ट डिसऑर्डर का उपचार इसके कारणों पर निर्भर होते हैं। बच्चों में क्या-क्या लक्षण नजर आ रहे हैं, उसकी उम्र क्या है, इन सब बातों का भी खास ख्याल रखा जाता है। इस मानसिक विकार का इलाज मुख्य रूप से दो तरीकों पर निर्भर करता है पहला, साइकोथेरेपी और दूसरा दवाइयां। साइकोथेरेपी में एक थेरेपी के जरिए बच्चों और किशोरों को खुद के व्यवहार पर नियंत्रण रखने के बारे में सिखाया जाता है। बातों को बिना गुस्सा किए, हिंसा किए जाहिर करना सिखाया जाता है। यह थेरेपी बिल्कुल काउंसलिंग की तरह होती है।

दवाइयों के जरिए भी इस मानसिक विकार को दूर करने की कोशिश की जाती है। इन दवाइयों के जरिए दिमाग में होने वाले हार्मोनल इम्बैलेंस को संतुलित करने में मदद मिलती है।

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